Emotional Sad Story in Hindi | कलेक्टर बनेगा तब बात करूंगा

दोस्तों आज हम आप के वह कहानी लेकर आये है जिसको पढ़ने से आप इमोशनल हो जाओगे। Emotional Sad Story in Hindi मैं आप को मनोरंजन के साथ बहुत कुछ सीखने भी मिलेगा।अगर आप को Emotional Sad Story in Hindi पसंद है  तो आप को यह पोस्ट बहुत पसंद आनेवाली है।

Emotional Sad Story in Hindi

 

Emotional Sad Story in Hindi

दोस्तों यह कहानी है बिहार के एक गाँव की जिसमें विजय नाम का लड़का रहा करता था। बचपन से ही पढ़ाई में होशियार वियज अपने मम्मी पापा की आखिरी उम्मीद था। विजय के दादा ने अपने समय में बहुत कर्ज ले लिया था जिसको चुकाने में पापा की पूरी जिंदगी मजदूरी में निकल गई।

उनके पास थोड़ी सी जमीन थी जिससे उनका गुजरा हो रहा था। पापा की तबीयत मजदूरी करने से ख़राब रहती थी पर पापा विजय को इस बात का अहसास नहीं होने देते थे। विजय को पढ़ाई मैं इतना होशियार देख कर उसके मम्मी पापा ने हर वह काम किया जिससे वह विजय को पढ़ा पाए। 

विजय की कॉलेज की पढ़ाई खत्म हो गई थी और वह एक छोटी सी नौकरी करने लगा जिससे उसका खर्चा निकल जाता और साथ में वह कलेक्टर बनने की तैयारी भी कर रहा था। विजय अपने वक़्त का एक मिनिट भी फालतू नहीं गुजारता था। 

वियज ने पूरा समय पढ़ाई और नौकरी में ही लगा दिया। विजय के पापा को यह पता था की वह कलेक्टर बनना चाहता है इसलिए घर की हालत बहुत ज्यादा ख़राब होने पर भी उन्होंने विजय से कभी इस बात का जिक्र नहीं किया और न उसको अच्छी नौकरी करने के लिए कहा।

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 लगातार दो साल तक विजय पास नहीं हो पाया उसके बाद भी उसके पिता ने अपना घर और जमीन गिरवी रखकर विजय को आईएएस की कोचिंग ज्वाइन करवाई और उसकी नौकरी भी छुड़वा दी और केवल पढाई करने को कहा।

 

विजय के पापा हमेशा उस से कहा करते – बेटा खेत और घर दोबारा आ जाएंगे पर कलेक्टर दोबारा नहीं बन सकते । आज पूरे साल पढ़ाई करने के बाद विजय का रिजल्ट आ गया जिसमे वह अच्छे नम्बरों से निकल गया था। आज उसके पिता से ज्यादा खुस कोई नहीं था। ऐसा लग रहा था जैसे विजय का सपना पूरा होने वाला है पर भगवान को कुछ और ही मंजूर था।

 विजय का कल इंटरव्यू था और सुबह से उसके पापा की तबियत ख़राब थी। विजय के पापा उसकी माँ से बार बार कह रहे थे की विजय को मत बताना और उस दिन देर रात उन की मौत हो गई। 

अब एक माँ जिसकी गोद में उसका पति गुजर गया और वह अपने दर्द को भुला कर अपने बेटे की जिंदगी के बारे में सोच रही थी। माँ ने पड़ोसिओं तक को इस बात का अहसास नहीं होने दिया की उसका पति अब नहीं रहा। 

पूरी रात ऐसे रोई की आवाज़ भी न निकले और सुबह विजय जब इंटरव्यू देने जाने लगा तब माँ और पापा के आशीर्वाद के लिए उसने माँ को कॉल किया। Emotional Sad Story in Hindi

 माँ ने पूरी हिम्मत लगा दी अपना सच छुपाने के लिए और विजय को आशीर्वाद दिया और जब विजय ने पापा से बात करने को कहा तो माँ बोली – पापा अब तुम से बात नहीं करेंगे , वह कलेक्टर से बात करेंगे। इतनी बात करके माँ ने फ़ोन रख दिया। 

विजय का जब इंटरव्यू हो गया तब उसे बताया गया की उसके पिता की तबीयत ख़राब है। उसको तुरंत घर जाना है। विजय को एक पल नहीं लगा अपने पिता की हालत समझने में। 

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घर पहुंच कर पिता के पैरो में गिरकर वह जोर जोर से रोने लगा और कहने लगा पापा उठो देखो मैं – कलेक्टर बन गया। 

आज उसके पिता को वह खुशी मिली थी जिसका उनको वर्षों से इंतजार था।  पर आज वह इस दुनिया में नहीं थे। भगवान विजय के पिता की जिंदगी में सुख लिखना ही भूल गए थे। पहले वह अपने पिता के कर्ज में जिंदगी भर मजदूरी करते रहे और फिर बेटे के सपनों में फिर घर और जमीन गिरवी रखनी पड़ी।

Emotional Sad Story in Hindi – विजय के पिता का कर्ज

वह जिंदगी में कर्ज लेकर आये और कर्ज लेकर चले गए। 

 विजय के पिता को भले ही जिंदगी में कुछ हासिल न हुआ हो पर वह अपने लड़के को इस काबिल बना गए की वह अपनी साथ पुश्तों को बैठे बैठे खिला पाए। Emotional Sad Story in Hindi

विजय की माँ ने जो उस रात किया जिसको करने का जज्बा बहुत कम लोगों में होता है। जब विजय कलेक्टर बनकर घर आया तब माँ ने विजय से कहा बेटा तुम आज इतने बड़े बन गए हो की हाजरो गरीबों का भला कर सकते हो। 

जब भी तुम्हारे सामने कोई गरीब मदद मांगने आए तो अपने पिता और मेरे बारे में सोचना , मैं तुम्हारे बराबर पढ़ी लिखी और समझदार तो नहीं हूँ पर इतना जरुरु जानती हूँ गरीब आदमी की बहुत मज़बूरी होती है। तुम कभी किसा का बुरा मत करना।

शिक्षा – दोस्तों इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है की वक़्त किता भी ख़राब हो हम उसे बदल जरुरु सकते है। माँ और बाप के अहसानों को हम कभी नहीं उतार सकते है , पर हम अपने कर्मो से उनकी इच्छा जरूर पूरी कर सकते है।     

यह Emotional Sad Story in Hindi  सच्चाई पर आधारित है। Emotional Sad Story in Hindi में आप ने पढ़ा की कैसे विजय के पिता का जीवन लग गया उसे कलेक्टर बनाने में , जब भी कोई किसी पोस्ट पर या जीवन में बहुत ऊपर किसी पद पर पहुंच जाता तब उसमे बहुत सारे लोगों की महनत और त्याग लगता है।

जब हम दो मिनट में किसी को अच्छा या बुरा कह देते है तब हम उसके जीवन का संघर्ष भूल जाते है। किसी अधिकारी नेता या बिज़नेस को बुरा भला कहने से पहले उसके पीछे की मेहनत और त्याग के बारे में जरूर सोचे। धन्याद  

दोस्तों आप को हमारी यह कहानी Emotional Sad Story in Hindi कैसी लगी हमें कमेंट करके जरूर बताएं।दोस्तों आप को हमारी यह कहानी Emotional Sad Story in Hindi कैसी लगी हमें कमेंट करके जरूर बताएं।धन्याद

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