1. “गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में,
वो तिफ़्ल क्या गिरे जो घुटनों के बल चले।”
2. “कल की बात भूल जा, आज नया सवेरा है,
हौसला अगर बुलंद हो तो हर मुकाम तेरा है।”
1. “गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में,
वो तिफ़्ल क्या गिरे जो घुटनों के बल चले।”
2. “कल की बात भूल जा, आज नया सवेरा है,
हौसला अगर बुलंद हो तो हर मुकाम तेरा है।”