भाई दूज पर भाई-बहन के अटूट रिश्ते पर भावुक कविता व संदेश | Bhai Dooj Poem in Hindi
तिलक और रक्षा का वचन:
यम द्वितीया यानी भाई दूज भाई-बहन के उस मासूम रिश्ते का उत्सव है जहाँ नोकझोंक भी है, एक-दूसरे की चॉकलेट छीनना भी है, और ज़रूरत पड़ने पर दुनिया से लड़ जाने वाला असीम प्यार भी है। बहन जब भाई के माथे पर कुमकुम और अक्षत का तिलक लगाती है, तो यमराज भी उस भाई की लंबी उम्र को टाल नहीं सकते।
यम द्वितीया यानी भाई दूज भाई-बहन के उस मासूम रिश्ते का उत्सव है जहाँ नोकझोंक भी है, एक-दूसरे की चॉकलेट छीनना भी है, और ज़रूरत पड़ने पर दुनिया से लड़ जाने वाला असीम प्यार भी है। बहन जब भाई के माथे पर कुमकुम और अक्षत का तिलक लगाती है, तो यमराज भी उस भाई की लंबी उम्र को टाल नहीं सकते।
भाई दूज की भावुक कविता: “माथे का वो लाल टीका”
“थाली में सजाकर कुमकुम, अक्षत और मिठाई का हार,
माथे पर तिलक लगाकर बहना मांगे खुशियों का संसार!
बचपन की वो प्यारी सी लड़ाई और फिर एक हो जाना,
दूर होकर भी दिल के सबसे करीब होता है भाई का याराना!
सलामत रहे मेरी बहना का हर वो नन्हा सा सपना,
भगवान से पहले मेरे लिए मेरी बहन है सबसे अपना!”
माथे पर तिलक लगाकर बहना मांगे खुशियों का संसार!
बचपन की वो प्यारी सी लड़ाई और फिर एक हो जाना,
दूर होकर भी दिल के सबसे करीब होता है भाई का याराना!
सलामत रहे मेरी बहना का हर वो नन्हा सा सपना,
भगवान से पहले मेरे लिए मेरी बहन है सबसे अपना!”
भाई दूज 4 Line शायरी
“बहन के हाथ का टीका भाई की तकदीर संवार देता है,
उसकी एक मीठी सी दुआ हर मुश्किल को टाल देता है!
खुशनसीब होते हैं वो भाई जिनकी कलाई और माथा सूना नहीं होता,
बहन का प्यार वो अनमोल खजाना है जो कभी पुराना नहीं होता!”
उसकी एक मीठी सी दुआ हर मुश्किल को टाल देता है!
खुशनसीब होते हैं वो भाई जिनकी कलाई और माथा सूना नहीं होता,
बहन का प्यार वो अनमोल खजाना है जो कभी पुराना नहीं होता!”
