छठ महापर्व: सूर्य देव व छठी मईया के पावन अर्घ्य पर कविता व दोहे | Chhath Puja Poem in Hindi

छठ महापर्व: सूर्य देव व छठी मईया के पावन अर्घ्य पर कविता व दोहे | Chhath Puja Poem in Hindi

लोक आस्था का अद्वितीय महापर्व:
छठ पर्व पूरी दुनिया में एकमात्र ऐसा पर्व है जहाँ डूबते हुए सूर्य को भी उतना ही आदर और अर्घ्य दिया जाता है जितना उगते हुए सूर्य को। 36 घंटे का निर्जला व्रत, गंगा और नदियों के पावन घाट, ठेकुआ का पारंपरिक प्रसाद और छठी मईया के सुमधुर लोकगीत— यह प्रकृति, सूर्य और मातृशक्ति के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का सबसे कठोर और पावन अनुष्ठान है।

छठ महापर्व की पावन कविता: “गंगा तीरे सजल दउरा”

“सिर पर सूप और दउरा लिए चले व्रती घाट की ओर,
गंगा मइया की लहरों पर गूंजे छठी मईया का शोर!
डूबते सूरज को अर्घ्य देकर सिखाती है यह पावन रीति,
कि ढलते हुए का भी सम्मान करना ही है सच्ची प्रीति!
उषा काल की पहली किरण जब लालिमा बिखराती है,
हर संतान और परिवार के आंगन में खुशहाली भर जाती है!”

छठ पूजा के भक्तिमय दोहे

“ठेकुआ की भीनी महक, गन्ने का सुंदर ठाठ,
छठी मईया के जयकारों से गूंज उठे सब घाट!

सूर्य देव की कृपा मिले, दूर हो तन का रोग,
सफल हो 36 घंटे का यह पावन निर्जला योग!”

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