पर्वत की चोटी से पुकार: बुलंदियों का आह्वान | Summit Call Hindi Poem

पुकारती है चोटी तुझको, तू कदम बढ़ा मुसाफिर,
बर्फ की हर फिसलन से तू आंख मिला मुसाफिर।

जो डर गया तूफानों से वो तलहटी में रह गया,
जो सीना तान के लड़ा, वो शिखर का ताज ले गया।
आसमान खुद झुकेगा तेरे इस हौसले के आगे,
जब तेरे पुरुषार्थ से सोया हुआ मुकद्दर जागे!

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