1. “जिस्मों की चाहत तो हर कोई करता है साहब,
मज़ा तो तब है जब कोई आपकी रूह से मोहब्बत करे।”
2. “तेरा और मेरा रिश्ता लफ़्ज़ों का मोहताज नहीं,
मेरी हर धड़कन में सिर्फ तेरी ही इबादत होती है।”
1. “जिस्मों की चाहत तो हर कोई करता है साहब,
मज़ा तो तब है जब कोई आपकी रूह से मोहब्बत करे।”
2. “तेरा और मेरा रिश्ता लफ़्ज़ों का मोहताज नहीं,
मेरी हर धड़कन में सिर्फ तेरी ही इबादत होती है।”