स्कूल के पहले प्यार की वो आखिरी विदा | School First Love Story in Hindi

स्कूल के पहले प्यार की वो आखिरी विदा | School First Love Story in Hindi

मासूमियत का वो सुनहरा दौर:
जिंदगी में प्यार चाहे कितनी भी बार हो, लेकिन स्कूल के उस पहले प्यार की बात ही कुछ और होती है— जहाँ न पैसे की फिक्र थी, न करियर का तनाव, बस रिसेस की घंटी और एक नज़र देखने की बेताबी ही दुनिया की सबसे बड़ी खुशी होती थी।

सुबह की प्रार्थना और वो पहली चोरी-छिपे नज़र

कक्षा 10वीं ‘बी’ का कमरा और तीसरी बेंच। अमन के दिन की शुरुआत तभी अच्छी होती थी जब प्रेयर ग्राउंड में कतार में खड़ी प्रिया की आंखें एक पल के लिए उससे मिलती थीं। ना कोई फोन था, ना फेसबुक। प्यार का एकमात्र जरिया गणित की कॉपी में छुपाकर दिया गया एक छोटा सा कागज का टुकड़ा होता था।

अमन ने अपने टिफिन के परांठे सिर्फ इसलिए प्रिया की सहेलियों को खिला दिए थे ताकि वे प्रिया की पसंद-नापसंद बता सकें। वह प्यार इतना पवित्र था कि हाथ छूने में भी हाथ कांपते थे।

बोर्ड परीक्षा और बिछड़ने की आहट

12वीं की परीक्षा का आखिरी दिन था। स्कूल का मैदान, जो रोज़ बच्चों के शोर से गूंजता था, उस दिन एक अजीब सी उदासी में डूबा था। सबको पता था कि आज के बाद रास्ते बदल जाएंगे— कोई दिल्ली जाएगा, कोई कोटा, कोई इंजीनियरिंग में तो कोई मेडिकल में।

साइकिल स्टैंड के पीछे प्रिया खड़ी थी। अमन ने कांपते हाथों से अपनी जेब से एक कलम निकाली और कहा— “प्रिया, यह कलम मेरे पास तब से है जब तुमने पहली बार मुझसे परीक्षा में एक्स्ट्रा पेन मांगा था। इसे रख लो।”

प्रिया की आंखों से आंसू टपक पड़े। उसने कहा— “अमन, काश हम कभी बड़े न होते! काश यह स्कूल की घंटी कभी बजना बंद न होती!”

“बस्ते का बोझ भले ही भारी था उन दिनों में,
मगर वो दिल का बोझ हल्का कर देती थी एक मुस्कान में!
स्कूल छूट गया, यार छूट गए, वो पहला इश्क भी छूट गया,
मगर वो यादें आज भी ताज़ा हैं इस सीने के वीराने में!”

उस दिन के बाद दोनों कभी नहीं मिले। ज़िंदगी अपने-अपने रास्तों पर आगे बढ़ गई। लेकिन आज भी जब अमन किसी स्कूल बस को बच्चों के शोर के साथ गुजरते देखता है, तो उसकी नज़रें अनायास ही उस सफेद यूनिफॉर्म और लाल रिबन में प्रिया को ढूंढने लगती हैं।

Advertisement

Leave a Comment