जीवन एक रंगमंच है साहब, सब अपना किरदार निभाते हैं,
कोई हंसाता है इस महफिल में, कोई अश्क बहाते हैं।पर्दा गिरते ही सब खो जाते, उस सन्नाटे की चादर में,
क्या लेकर आए थे हम, क्या खोया इस समंदर में?
निभाओ किरदार कुछ ऐसा कि तालियां गूंजे जाने के बाद भी,
नाम अमर हो जाए तुम्हारा इस दुनिया के फसाने में भी!