बाप की पुरानी चप्पल और बेटे की कामयाबी | Prernadayak Kahani in Hindi
माँ का प्यार तो सबको दिखता है क्योंकि वह आंसुओं में बहता है, लेकिन पिता का प्यार अक्सर छिप जाता है क्योंकि वह पसीने में बहता है। पिता वो छत है जो खुद धूप और बारिश सहकर अपनी औलाद को महफूज रखती है।
नई नौकरी का पहला दिन और जूते का डिब्बा
समीर की एक बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनी में अच्छे पैकेज पर नौकरी लग गई थी। वह शहर जाने के लिए अपना सूटकेस पैक कर रहा था। उसके पास ब्रांडेड जूते, नई घड़ियां और महंगे कपड़े थे। तभी उसके पिता रामसेवक जी कमरे में आए। उनके पैरों में वही दस साल पुरानी घिसी हुई हवाई चप्पल थी, जिसमें तार बंधा हुआ था।
पिताजी ने जेब से ₹5,000 के मुड़े-तुड़े नोट निकाले और समीर के हाथ में रख दिए— “बेटा, नए शहर में शुरुआती खर्चे ज्यादा होते हैं। यह रख लो, कभी जरूरत पड़ जाए।” समीर ने मना किया, पर पिता की ज़िद के आगे वह चुप हो गया।
अलमारी का वो रहस्य और मां का खुलासा
रात को समीर जब पानी पीने उठा, तो उसने मां को पिताजी के पैरों में सरसों का तेल लगाते देखा। पिताजी के तलवे फटे हुए थे और उनमें से खून रिस रहा था। समीर ने मां से पूछा— “मां, पिताजी नई चप्पल क्यों नहीं खरीद लेते? इनके पास तो पैसे थे!”
मां की आंखों से आंसू छलक पड़े। मां ने फुसफुसाते हुए कहा— “बेटा, जब तू कॉलेज के आखिरी साल में था और तेरी फीस भरने के लिए ₹20,000 कम पड़ रहे थे, तब तेरे पिता ने अपनी दो बीघा ज़मीन गिरवी रख दी थी। इन्होंने पिछले पांच साल से कोई नया कपड़ा नहीं खरीदा। जो ₹5,000 इन्होंने तुझे दिए हैं, वो इन्होंने अपनी टूटी चप्पल बदलने और मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराने के लिए जोड़े थे। इन्होंने कहा— ‘मेरा ऑपरेशन बाद में हो जाएगा, पहले मेरे बेटे को किसी के आगे हाथ न फैलाना पड़े!'”
“पिता वो दरख्त है जो खुद जलकर भी छांव देता है,
अपनी हर ख्वाहिश मारकर जो औलाद के सपने बुनता है!
कद्र कर उस बाप के फटे जूतों की ऐ इंसान,
उसी के घिसे हुए तलवों से तेरे पैरों में मखमली रास्ता बना है!”
समीर के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। वह अपने कमरे में गया और अपने ₹6,000 वाले ब्रांडेड जूतों को देखकर फूट-फूट कर रो पड़ा। सुबह होते ही समीर सबसे पहले बाज़ार गया और पिताजी के लिए सबसे आरामदायक जूते और चप्पल खरीद लाया। उसने पिताजी के पैरों में बैठकर अपने हाथों से वो नई चप्पल पहनाई और उनके चरण छूकर माफी मांगी।
उस दिन समीर समझ गया कि दुनिया में पिता से बड़ा कोई दानी और त्यागी नहीं होता।
