जब तक सांसें रहीं, सिर्फ तेरा इंतजार किया (रुला देने वाली लव स्टोरी)
कॉलेज की लाइब्रेरी से शुरू हुआ मासूम प्यार
अमन बेहद शांत और सीधा लड़का था, जिसे किताबों और कविताओं से प्यार था। सिमरन कॉलेज की सबसे चुलबुली और मासूम लड़की थी। दोनों की आँखें जब पहली बार कॉलेज की सीढ़ियों पर मिलीं, तो बिना एक लफ्ज़ कहे दोनों समझ गए थे कि वो एक-दूसरे के लिए बने हैं।
अमन अक्सर सिमरन के लिए अपनी डायरी में नज़्में लिखा करता था और सिमरन हर शाम उस डायरी के पन्नों को अपने सीने से लगाकर सोया करती थी। दोनों ने एक-दूसरे से वादा किया था कि ज़िंदगी के हर मोड़ पर चाहे जो हो जाए, उनका प्यार कभी कम नहीं होगा।
किस्मत का बेरहम फैसला
कॉलेज खत्म होते ही सिमरन के परिवार वालों ने समाज और जाति की दीवारें खड़ी कर दीं। अमन ने बहुत मिन्नतें कीं, अपने पैरों पर खड़े होने के लिए वक्त मांगा, लेकिन सिमरन के पिता ने अपनी झूठी शान की खातिर सिमरन की शादी किसी अनजान अमीर खानदान में तय कर दी।
अपनी शादी की रात सिमरन ने अमन को अपना आख़िरी खत भेजा, जिसमें लिखा था: “अमन, मेरा जिस्म तो ये दुनिया किसी और को सौंप रही है, मगर मेरी रूह और मेरी धड़कनों पर कयामत तक सिर्फ तुम्हारा हक रहेगा। मुझसे नफ़रत मत करना, मैं सिर्फ मजबूर हूँ।”
40 साल का खामोश इंतज़ार
अमन ने अपनी पूरी ज़िंदगी किसी दूसरी औरत को अपने दिल में जगह नहीं दी। उसने गाँव के एक छोटे से स्कूल में बच्चों को पढ़ाना शुरू किया और अपनी लिखी हुई कविताओं की किताब सिमरन के नाम समर्पित कर दी।
40 साल बाद, जब अमन अपनी ज़िंदगी की आख़िरी सांसें गिन रहा था, तो उसके तकिए के नीचे से सिमरन का वही 40 साल पुराना खत निकला, जो आंसुओं से धुंधला हो चुका था। उसने जाते-जाते मुस्कुराकर सिर्फ एक बात कही: “सिमरन, मेरा इंतज़ार मुकम्मल हुआ, अब हम उस जन्नत में मिलेंगे जहाँ जुदाई की कोई रस्म नहीं होती।”
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जुदाई और इंतज़ार पर 3 गहरे शेर
हमने अपनी हर सांस तेरे नाम कर दी,
तूने तो बस एक बार कहा था कि थोड़ा सब्र करो!
हमने तो अपनी पूरी ज़िंदगी ही तेरे इंतज़ार में नीलाम कर दी!
जिस्मों की दूरी से मोहब्बत कम नहीं होती,
तेरी यादों से मेरी आँखें कभी नम नहीं होती!
तू चाहे जहाँ भी रहे महफूज़ रहे,
तेरे बाद इस दिल में किसी और की तमन्ना नहीं होती!
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