किसान के बेटे की सफलता की प्रेरक कहानी (हौसले की उड़ान)
कच्चे मकान में दीये की रोशनी से कोडिंग की शुरुआत
आकाश के पिता के पास सिर्फ 2 बीघा ज़मीन थी, जिसमें बारिश न होने पर साल भर का राशन भी मुश्किल से निकलता था। आकाश ने सरकारी स्कूल में पढ़ाई की। 12वीं में जब पहली बार उसने अपने दोस्त के कंप्यूटर पर कोडिंग देखी, तो उसे लगा जैसे यही उसकी दुनिया है।
घर में कंप्यूटर खरीदने के पैसे नहीं थे। आकाश ने गाँव के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर ₹8,000 जोड़े और एक पुराना सेकेंड हैंड लैपटॉप खरीदा, जिसकी बैटरी सिर्फ 15 मिनट चलती थी। गाँव में बिजली रोज़ 10 घंटे गायब रहती थी, इसलिए वो दोपहर में लैपटॉप चार्ज करने 5 किलोमीटर दूर कस्बे में जाता था।
सॉफ्टवेयर की दुनिया में पहला कदम
इंटरनेट के नाम पर सिर्फ 1GB का मोबाइल डेटा था। आकाश रातभर यूट्यूब से प्रोग्रामिंग लैंग्वेज और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट सीखता रहा। 3 साल की कड़ी मेहनत के बाद उसने किसानों के लिए मौसम और फसलों के दाम बताने वाला एक आसान ऐप तैयार किया।
शुरुआत में किसी ने उस ऐप पर ध्यान नहीं दिया। लेकिन आकाश ने खुद गाँव-गाँव जाकर किसानों को अपने मोबाइल में वो ऐप डाउनलोड कराया। 6 महीने के अंदर उस ऐप पर 50,000 किसान जुड़ गए।
₹50 करोड़ की फंडिंग और अंतरराष्ट्रीय पहचान
आकाश के इस अनोखे आइडिया को देखकर बेंगलुरु के एक बड़े वेंचर कैपिटल फंड ने उसकी कंपनी में ₹50 करोड़ का निवेश किया। आज आकाश की कंपनी से 10 लाख से ज्यादा किसान जुड़े हैं और उसकी कंपनी का वैल्यूएशन ₹200 करोड़ पार कर चुका है।
जब आकाश से पूछा गया कि आपकी सबसे बड़ी पूंजी क्या थी, तो उसने मुस्कुराकर कहा: “मेरे पिता की मेहनत की पसीने की खुशबू और गाँव की मिट्टी, जिसने मुझे कभी भूखा सोना नहीं सिखाया।”
• बेस्ट हिंदी ऑडियोबुक
स्टार्टअप और बिजनेस का ब्लूप्रिंट
जानिए कि बिना बड़े बजट के भी अपने हुनर और आइडिया से बड़ा बिजनेस कैसे खड़ा किया जाए। Kuku FM पर सुनिए मशहूर ऑडियोबुक ‘ज़ीरो इन्वेस्टमेंट स्टार्टअप: आइडिया से अरबपति तक’ और 10,000+ हिंदी कहानियाँ।
युवाओं के लिए 3 बड़े जीवन मंत्र
- संसाधनों का रोना मत रोइए: दुनिया में जिसके पास सबसे कम सुविधाएं थीं, इतिहास उसी ने रचा है।
- समस्या का समाधान खोजिए: पैसा उन लोगों के पास आता है जो लोगों की असली तकलीफें दूर करते हैं।
- अपनी जड़ों को कभी न भूलें: आप कितने भी बड़े मुकाम पर पहुँच जाएं, अपनी सादगी और संस्कार कभी न छोड़ें।
function copyHpsText(btn) {
var card = btn.closest(‘.hps-copy-card’);
var text = card ? card.querySelector(‘.hps-text’).innerText : ”;
if (!text) return;
navigator.clipboard.writeText(text).then(function() {
var orig = btn.innerHTML;
btn.innerHTML = ‘✅ कॉपी हो गया!’;
btn.style.background = ‘#10b981’;
setTimeout(function() {
btn.innerHTML = orig;
btn.style.background = ‘#e11d48’;
}, 2000);
});
}
