जब बैंक खाता खाली था और सबने साथ छोड़ दिया (Never Give Up)
जब पहली कंपनी डूबी और ₹20 लाख का कर्ज सिर पर आया
अमित ने 26 साल की उम्र में अपनी सारी जमा-पूंजी लगाकर एक स्टार्टअप शुरू किया था। बाज़ार की मंदी और गलत पार्टनर्स की वजह से 2 साल के अंदर कंपनी पूरी तरह दिवालिया हो गई। अमित के सिर पर ₹20 लाख का भारी कर्ज आ गया।
बैंक वाले रोज़ दरवाजे पर खड़े होते थे। जिन दोस्तों को अमित ने कभी लाखों की मदद की थी, उन्होंने अमित का फोन ब्लॉक कर दिया। अमित 3 महीने तक गहरे डिप्रेशन में रहा, कई बार मन में आया कि सब कुछ ख़त्म कर ले।
वो एक रात जिसने सोच बदल दी
एक रात जब अमित बालकनी में खड़ा अपनी नाकामियों पर रो रहा था, उसकी बूढ़ी माँ पीछे से आई और उसने अमित के हाथ में एक गर्म चाय का प्याला थमाते हुए कहा: “बेटा, पैसा गया है, तेरी बुद्धि और तेरी मेहनत तो नहीं गई। जब तक तू ज़िंदा है, तू दोबारा खड़ा हो सकता है। मुझे तुझपर पूरा भरोसा है।”
माँ के इन 2 वाक्यों ने अमित के अंदर सोए शेर को जगा दिया। उसने अगले ही दिन से एक छोटी सी नौकरी पकड़ी, दिन में 12 घंटे नौकरी की और रात को 5 घंटे अपनी नई डिजिटल सर्विस पर फ्रीलांसिंग की।
3 साल में कर्ज मुक्त और एक नई शुरुआत
अमित ने अगले 3 साल तक न कोई नया कपड़ा खरीदा, न किसी पार्टी में गया। उसने एक-एक पाई बचाकर अपने सारे कर्ज चुकाए। जब उसकी साख बाज़ार में दोबारा मजबूत हुई, तो उसी मेहनत से उसने अपनी नई कंसल्टिंग फर्म बनाई।
आज अमित की कंपनी भारत के 50 से ज्यादा बड़े ब्रांड्स को डिजिटल ग्रोथ देती है। जो रिश्तेदार कभी मुंह मोड़ते थे, आज वो शादी-ब्याह में अमित के साथ फोटो खिंचवाने के लिए कतार में खड़े रहते हैं।
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हार मानने से पहले ये 3 बातें याद रखें
- असफलता केवल एक घटना है, आपकी पहचान नहीं: आप तब तक नहीं हारते जब तक आप मैदान छोड़कर भाग न जाएं।
- वक्त हमेशा बदलता है: रात चाहे कितनी भी काली और लंबी क्यों न हो, सुबह का सूरज निकलने से कोई नहीं रोक सकता।
- भीड़ से शाबाशी की उम्मीद मत रखिए: जब आप गिरेंगे तो लोग तमाशा देखेंगे, जब आप जीतेंगे तो वही लोग ताली बजाएंगे।
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