देवउठनी एकादशी व तुलसी विवाह (पावन कथा, पूजा विधि व मंगलकामनाएं)
तुलसी विवाह की पावन पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, जालंधर नाम का एक महाप्रतापी असुर था, जिसकी पत्नी वृंदा अत्यंत पतिव्रता और भगवान विष्णु की अनन्य भक्त थी। वृंदा के सतीत्व के बल पर जालंधर अजेय हो गया था और उसने स्वर्ग पर अधिकार कर लिया था। देवताओं की प्रार्थना पर भगवान विष्णु ने जालंधर का रूप धारण करके वृंदा का सतीत्व खंडित किया, जिससे युद्ध में जालंधर का वध हो सका।
जब वृंदा को इस छल का पता चला, तो उसने दुखी होकर भगवान विष्णु को पत्थर का हो जाने का शाप दिया। भगवान विष्णु शालिग्राम रूप में पत्थर बन गए। लेकिन वृंदा के पवित्र प्रेम और भक्ति को देखकर भगवान ने वरदान दिया: “हे वृंदा! तुम तुलसी के पौधे के रूप में अवतरित होगी और बिना तुम्हारे पत्तों के मेरी पूजा कभी संपूर्ण नहीं होगी। हर साल कार्तिक एकादशी को मेरा विवाह तुम्हारे साथ संपन्न होगा।”
• बेस्ट हिंदी ऑडियोबुक
विष्णु पुराण और भारतीय त्योहारों की अमर कथाएं
जानिए हमारे पावन व्रतों, एकादशी और सनातन संस्कृति के गहरे आध्यात्मिक रहस्य। Kuku FM पर सुनिए मशहूर ऑडियोबुक ‘विष्णु पुराण: कथाएं और मोक्ष का मार्ग’ और 10,000+ हिंदी कहानियाँ।
तुलसी विवाह व देवउठनी एकादशी पर 5 सुंदर बधाई संदेश (Copy & Share)
हर घर में हो तुलसी माता का वास,
शालिग्राम जी पूरा करें हर विश्वास!
आए आपके आँगन में खुशियों की बहार,
मुबारक हो आपको तुलसी विवाह का पावन त्योहार!
शुभ देवउठनी एकादशी!
उठो देव हमारे, अब जागे हैं भाग हमारे!
तुलसी संग ब्याह रचाएं भगवान शालिग्राम प्यारे!
आपके घर में सदा धन, धान्य और खुशहाली का वास हो।
देवउठनी एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएं!
तुलसी की खुशबू और चंदन का हार,
ईश्वर का आशीष और अपनों का प्यार!
सारे कष्ट मिटें और पूरी हो हर आस,
सदा बना रहे आपके घर में लक्ष्मी जी का वास!
function copyHpsText(btn) {
var card = btn.closest(‘.hps-copy-card’);
var text = card ? card.querySelector(‘.hps-text’).innerText : ”;
if (!text) return;
navigator.clipboard.writeText(text).then(function() {
var orig = btn.innerHTML;
btn.innerHTML = ‘✅ कॉपी हो गया!’;
btn.style.background = ‘#10b981’;
setTimeout(function() {
btn.innerHTML = orig;
btn.style.background = ‘#e11d48’;
}, 2000);
});
}
