पुकारती है चोटी तुझको, तू कदम बढ़ा मुसाफिर,
बर्फ की हर फिसलन से तू आंख मिला मुसाफिर।जो डर गया तूफानों से वो तलहटी में रह गया,
जो सीना तान के लड़ा, वो शिखर का ताज ले गया।
आसमान खुद झुकेगा तेरे इस हौसले के आगे,
जब तेरे पुरुषार्थ से सोया हुआ मुकद्दर जागे!