सूखे पत्ते गिर जाने दो, शाखों को रोने मत दो,
दर्द का मौसम बीत चुका है, उम्मीद को खोने मत दो।कल फिर महकेगा चमन नए फूलों की खुशबू से,
धुल जाएगी हर उदासी कुदरत के जादू से।
धैर्य रख मुसाफिर, रात जितनी भी घनेरी हो,
सवेरा दूर नहीं, बस कदम बढ़ाने की देरी हो!