26 जनवरी ‘गणतंत्र दिवस’ भारत के स्वाभिमान, संविधान और उन अमर हुतात्माओं के बलिदान का राष्ट्रीय उत्सव है जिन्होंने तिरंगे की आन, बान और शान के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। स्कूल प्रार्थना सभाओं (Morning Assembly), भाषण प्रतियोगिताओं और मंच संचालन (Anchoring) के लिए राष्ट्रकवि दिनकर, माखनलाल चतुर्वेदी, रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ की कालजयी कविताओं सहित 10 सबसे जोशीली देशभक्ति कविताओं और 10 मंच संचालन शायरी का यह प्रामाणिक संकलन प्रस्तुत है।
जब सर्द जनवरी की सुबह विद्यालय के प्रांगण में तिरंगा फहराया जाता है और सैकड़ों नन्हे-मुन्ने बच्चे अपनी नन्हीं हथेलियों को मस्तक पर रखकर राष्ट्रगान गाते हैं, तो प्रत्येक भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। 26 जनवरी 1950 को भारत एक संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न लोकतांत्रिक गणराज्य बना। यह पर्व हमें अपने संविधान की मर्यादा और अमर बलिदानियों के ऋण की याद दिलाता है।
26 जनवरी: संविधान, गणतंत्र और शहीदों के बलिदान का दिन
15 अगस्त 1947 को देश आजाद हुआ, लेकिन 26 जनवरी 1950 को बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा निर्मित संविधान को लागू करके भारत ने अपने भाग्य के फैसले खुद लेने की शपथ ली थी।
कविताएं केवल शब्दों का मेल नहीं होतीं; देशभक्ति की कविताएं वह चिंगारी हैं जो छात्रों और नागरिकों के भीतर राष्ट्रीय कर्तव्य की अग्नि प्रज्वलित करती हैं।
10 चुनिंदा देशभक्ति कविताएं (भाषण व असेंबली हेतु)
1. "विजयी विश्व तिरंगा प्यारा…" — पार्षद जी
(झंडा गीत – स्कूल असेंबली का गौरव)
विजयी विश्व तिरंगा प्यारा,
झंडा ऊँचा रहे हमारा।सदा शक्ति बरसाने वाला,
प्रेम सुधा सरसाने वाला,
वीरों को हरषाने वाला,
मातृभूमि का तन-मन सारा,
झंडा ऊँचा रहे हमारा।स्वतंत्रता के भीषण रण में,
लखकर बढ़े जोश क्षण-क्षण में,
काँपे शत्रु देखकर मन में,
मिट जावे भय संकट सारा,
झंडा ऊँचा रहे हमारा!
— श्यामलाल गुप्त 'पार्षद'
2. "पुष्प की अभिलाषा" — माखनलाल चतुर्वेदी
(बलिदान की सर्वोच्च भावना)
चाह नहीं मैं सुरबाला के
गहनों में गूँथा जाऊँ,
चाह नहीं, प्रेमी-माला में
बिंध प्यारी को ललचाऊँ!चाह नहीं, सम्राटों के शव
पर, हे हरि, डाला जाऊँ,
चाह नहीं, देवों के सिर पर
चढ़ूँ, भाग्य पर इठलाऊँ!मुझे तोड़ लेना, वनमाली!
उस पथ पर देना तुम फेंक,
मातृभूमि पर शीश चढ़ाने
जिस पथ जावें वीर अनेक!
— माखनलाल चतुर्वेदी
3. "कलम, आज उनकी जय बोल" — रामधारी सिंह दिनकर
(शहीदों को श्रद्धांजलि)
जला अस्थियाँ बारी-बारी,
चिटकाई जिनमें चिंगारी,
जो चढ़ गये पुण्यवेदी पर
लिए बिना गर्दन का मोल,
कलम, आज उनकी जय बोल!जो अगणित लघु दीप हमारे,
तूफ़ानों में एक किनारे,
जल-बुझ गए किसी निशिथ में,
मांगा नहीं स्नेह मुँह खोल,
कलम, आज उनकी जय बोल!
— रामधारी सिंह 'दिनकर'
4. "हम प्रभात की नई किरण हैं…"
(छात्रों के लिए संकल्प गीत)
हम प्रभात की नई किरण हैं, हम दिन के आलोक नवल,
हम नवीन भारत के सैनिक, धीर, वीर, गंभीर, अचल।हम प्रहरी ऊँचे हिमाद्रि के, सुरभि स्वर्ग की लेते हैं,
हम हैं शांतिदूत धरणी के, छाँह सभी को देते हैं।कोटि-कोटि कंठों से गूँजे, भारत माँ की जय-जयकार,
हम न रुकेंगे, हम न झुकेंगे, करते हैं यह कौल करार!
5. "सरफरोशी की तमन्ना…" — अमर शहीद बिस्मिल
(वीर रस की अमर हुंकार)
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है,
देखना है ज़ोर कितना बाज़ू-ए-कातिल में है!वक़्त आने दे बता देंगे तुझे ऐ आसमाँ,
हम अभी से क्या बताएँ क्या हमारे दिल में है!खींच कर लाई है सब को क़त्ल होने की उम्मीद,
आशिक़ों का आज जमघट कूचा-ए-कातिल में है!
— पं. रामप्रसाद 'बिस्मिल'
6. "यह देश है वीर जवानों का…" (कक्षा 1 से 5 के बच्चों के लिए)
नन्हा-मुन्ना राही हूँ, देश का सिपाही हूँ,
बोलो मेरे संग, जय हिंद, जय हिंद!रस्ते पे चलूँगा न डर-डर के,
चाहे मुझे जीना पड़े मर-मर के,
मंजिल से पहले न लूँगा कहीं दम,
आगे ही आगे बढ़ाऊँगा कदम!
दाहिने-बाएं, दाहिने-बाएं, थम!
7. "भारत देश हमारा है" (सरल कविता)
उत्तर में रखवाला पर्वत, दक्षिण में सागर लहराए,
पूरब में सूरज मुस्काए, पश्चिम में मरुथल मुस्काए।भिन्न-भिन्न भाषाएं अपनी, भिन्न-भिन्न वेशभूषाएं,
लेकिन जब तिरंगा लहराए, एक सुर में हम सब गाएं:
भारत देश हमारा है, यह प्राणों से भी प्यारा है!
8. "शहीदों के मजारों पर…"
शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले,
वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशां होगा।कभी वो दिन भी आएगा कि जब आज़ाद हम होंगे,
ये अपनी ही ज़मीं होगी, ये अपना आसमाँ होगा।
9. "कदम मिलाकर चलना होगा" — अटल बिहारी वाजपेयी
बाधाएँ आती हैं आएँ,
घिरें प्रलय की घोर घटाएँ,
पावों के नीचे अंगारे,
सिर पर बरसें यदि ज्वालाएँ,
निज हाथों में हँसते-हँसते,
आग लगाकर जलना होगा।
कदम मिलाकर चलना होगा!
— अटल बिहारी वाजपेयी
10. "सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा"
सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्तां हमारा,
हम बुलबुलें हैं इसकी, ये गुलसिताँ हमारा।पर्बत वो सबसे ऊँचा, हम्साया आसमाँ का,
वो संतरी हमारा, वो पासबाँ हमारा।मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना,
हिन्दी हैं हम, वतन है हिन्दोस्तां हमारा!
मंच संचालन (Anchor) के लिए 10 जोशीली देशभक्ति 2-लाइन शायरी
| # | मंच संचालन देशभक्ति 2-लाइन शायरी (Anchoring Sher) | प्रयोग का अवसर |
|---|---|---|
| 1 | कुछ नशा तिरंगे की आन का है, कुछ नशा मातृभूमि की शान का है! | ध्वजारोहण के ठीक बाद |
| 2 | ना पूछो ज़माने से कि क्या हमारी कहानी है, हमारी पहचान तो सिर्फ यह है कि हम हिंदुस्तानी हैं! | मुख्य अतिथि के स्वागत में |
| 3 | लहराएगा तिरंगा अब सारे आसमान पर, भारत का ही नाम होगा सबकी जुबान पर! | सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत में |
| 4 | चढ़ गए जो हंसकर फांसी, वो देशभक्ति का पैगाम थे, जिनके लहू से सींचा चमन, वो भगत सिंह और सुखदेव के नाम थे! | देशभक्ति नाटक/नृत्य से पहले |
| 5 | खुशनसीब हैं वो जो वतन पर मिट जाते हैं, मरकर भी वो इतिहास के पन्नों में अमर हो जाते हैं! | शहीदों को मौन श्रद्धांजलि के समय |
| 6 | गंगा, जमुना, नर्मदा का यह पावन नीर है, यह भारत देश संतों और वीरों की जागीर है! | देशगान से पूर्व |
| 7 | वतन से मोहब्बत इस कदर निभा गए, मोहब्बत के दिन वतन पर जान लुटा गए! | वीर रस कविता पाठ के समय |
| 8 | देशभक्ति की लौ को कभी बुझने न देंगे, भारत माँ के सम्मान को कभी झुकने न देंगे! | भाषण के समापन पर |
| 9 | संविधान है हमारी ढाल, तिरंगा हमारा मान है, इस गणतंत्र दिवस पर भारत माता को शत-शत प्रणाम है! | प्रधानाचार्य के उद्बोधन से पूर्व |
| 10 | जय हिंद का नारा गूँजेगा हर एक गली और द्वार पर, गर्व है हमें अपने इस पावन गणतंत्र के त्योहार पर! | कार्यक्रम के अंतिम धन्यवाद ज्ञापन में |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
प्रश्न 1: स्कूल असेंबली में देशभक्ति कविता सुनाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
उत्तर: असेंबली में कविता पाठ करते समय आवाज बुलंद, स्पष्ट और वीर रस के अनुकूल होनी चाहिए। शब्दों का उच्चारण शुद्ध रखें और चेहरे पर आत्मविश्वास व राष्ट्रीय गौरव के भाव झलकने चाहिए।
प्रश्न 2: 15 अगस्त और 26 जनवरी के झंडा फहराने में क्या तकनीकी अंतर होता है?
उत्तर: 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) को झंडे को नीचे से रस्सी खींचकर ऊपर ले जाया जाता है और फिर फहराया जाता है, जिसे 'ध्वजारोहण' (Flag Hoisting) कहते हैं। जबकि 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) को झंडा पहले से ही पोल के शीर्ष पर बंधा होता है, केवल उसकी गाँठ खोलकर फहराया जाता है, जिसे 'झंडा फहराना' (Flag Unfurling) कहते हैं।
प्रश्न 3: क्या प्राथमिक कक्षाओं के छात्र भी इन कविताओं को याद कर सकते हैं?
उत्तर: हाँ, क्रमांक 6, 7 और 10 की कविताएं विशेष रूप से छोटी कक्षाओं (कक्षा 1 से 5) के विद्यार्थियों के लिए सरल, लयबद्ध और कंठस्थ करने में बहुत आसान हैं।