1. “कभी-कभी खुद से ही बिछड़ जाना पड़ता है,
दुनिया के दिए जख्मों को छुपाने के लिए।”
2. “आंखों के आंसू तो फिर भी सूख जाते हैं साहब,
मगर दिल के आंसुओं की नमी कभी कम नहीं होती।”
1. “कभी-कभी खुद से ही बिछड़ जाना पड़ता है,
दुनिया के दिए जख्मों को छुपाने के लिए।”
2. “आंखों के आंसू तो फिर भी सूख जाते हैं साहब,
मगर दिल के आंसुओं की नमी कभी कम नहीं होती।”