पिता का साया और अनकहा त्याग | Emotional Father Poem in Hindi

जेब खाली हो फिर भी कभी मना नहीं करते,
मैंने पिता से अमीर इंसान इस जहां में नहीं देखा।

खुद पुराने जूते पहनकर मेरे नए जूते लाते हैं,
अपनी हर ख्वाहिश को दबाकर मेरे सपने सजाते हैं।
चट्टान की तरह खड़े रहते हैं हर तूफान के सामने,
पिता का हाथ सिर पे हो तो डर नहीं किसी जमाने का!

Advertisement

Leave a Comment