नीम की वो शीतल छांव, वो चौपालों की बातें,
कहाँ खो गईं वो तारों भरी गांव की रातें?
कच्ची पगडंडी पे दौड़ते हुए पसीने का बहना,
दादी की कहानियों में खोकर सपनों में रहना।
शहर के सीमेंट में वो सुकून कहाँ मिलता है,
जो गांव की मिट्टी की सौंधी खुशबू में खिलता है!