जब हौसले बुलंद हों तो कोई भी आंधी या तूफान उड़ान को रोक नहीं सकता। यह Motivational Hindi Poetry for Youth हर उस युवा के लिए है जो ऊंचे आसमान में अपना नाम दर्ज कराना चाहता है:
खोल दे पंख मेरे, कहता है परिंदा,
अभी और उड़ान बाकी है।
ज़मीं नहीं है मंज़िल मेरी,
अभी पूरा आसमान बाकी है।लहरों की ख़ामोशी को समंदर की बेबसी मत समझ ए नादां,
जितनी गहराई अंदर है, बाहर उतना तूफ़ान बाकी है।
मत डर इन अंधेरों से, तू तो सूरज की संतान है,
चीर के काली घटाओं को, तेरी विजय का गान बाकी है!