समय की पाजेब: पल-पल फिसलते वक्त पर कविता | Time Fleeting Poem in Hindi

रेत की मानिंद फिसलता जाए वक्त का यह साया,
न किसी के रोके रुका, न किसी के हाथ आया।

आज जो है पास तेरे, कल वो बीता पल बनेगा,
कर्म जो आज तू करेगा, वही कल तेरा कल बनेगा।
सजा ले हर लम्हे को तू नेकी और प्यार से,
फिर न मिलेगा यह मौका इस जीवन के संसार से!

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