उम्मीद का दीया: निराशा के तूफानों में जलती लौ | Lamp of Hope Poem in Hindi
आंधियां जितनी भी तेज हों बाहर साहिब, मन के इस दीये को बुझने मत देना कभी। एक नन्ही सी लौ …
आंधियां जितनी भी तेज हों बाहर साहिब, मन के इस दीये को बुझने मत देना कभी। एक नन्ही सी लौ …