मूर्ख शिष्य और पत्थर पर रस्सी का निशान: अभ्यास की शक्ति | Power of Practice Story in Hindi

वरदराज आश्रम का सबसे मंदबुद्धि बालक था। गुरुजी के बार-बार समझाने पर भी उसे कुछ समझ नहीं आता था। निराश होकर गुरुजी ने उसे घर लौट जाने को कहा।

रास्ते में वरदराज को प्यास लगी। वह एक कुएं पर गया। उसने देखा कि कुएं की कठोर पत्थर की मुंडेर पर कोमल रस्सी के बार-बार घिसने से गहरे निशान बन गए थे!

वरदराज के मन में बिजली कौंध गई: “जब एक कोमल रस्सी के बार-बार आने-जाने से कठोर पत्थर पर गहरा निशान बन सकता है, तो क्या निरंतर अभ्यास से मेरी बुद्धि तेज नहीं हो सकती?”

वह तुरंत आश्रम लौटा और कठोर परिश्रम शुरू किया। वही वरदराज आगे चलकर संस्कृत के प्रकांड विद्वान और ‘लघुसिद्धांत कौमुदी’ के रचयिता बने!

💡 सीख: अभ्यास की शक्ति असीमित है। लगन और निरंतर प्रयास से कोई भी असंभव कार्य संभव हो सकता है।

Advertisement

Leave a Comment