⚡ आलस्य पर चाणक्य नीति:
“आलसी मनुष्य का न तो वर्तमान होता है और न ही भविष्य।”
1. “कल का काम आज करो, आज का काम अभी करो; पल में प्रलय होएगी, बहुरि करोगे कब।”
2. “सफलता बिस्तर पर पड़े-पड़े सपने देखने से नहीं, सुबह जल्दी उठकर पसीना बहाने से मिलती है।”
⚡ आलस्य पर चाणक्य नीति:
“आलसी मनुष्य का न तो वर्तमान होता है और न ही भविष्य।”
1. “कल का काम आज करो, आज का काम अभी करो; पल में प्रलय होएगी, बहुरि करोगे कब।”
2. “सफलता बिस्तर पर पड़े-पड़े सपने देखने से नहीं, सुबह जल्दी उठकर पसीना बहाने से मिलती है।”