आसमान की नीली चादर पर तारे टिमटिमाते हैं,
सन्नाटों की इस महफिल में चुपके से मुस्कुराते हैं।दिनभर का कोलाहल सो गया, अब नींद की बारी है,
चांदनी की शीतल किरणों में सजी दुनिया सारी है।
खो जाओ तुम भी इन मीठे सपनों की छांव में,
सवेरे फिर चलना है उम्मीदों के नए गांव में!