धरती पुत्र किसान: पसीने और समर्पण पर भावुक हिंदी कविता | Hindi Poem on Farmer

किसान देश की रीढ़ की हड्डी है। कड़ी धूप, कड़ाके की ठंड और मूसलाधार बारिश में भी जो कभी थकता नहीं, वही सच्चा अन्नदाता है। यह Hindi Poem on Farmer किसान के त्याग और परिश्रम को नमन करती है:

फटी बिवाई पैरों में, सिर पर तपती धूप घनेरी,
हल चलाता खेत में जो, करता कभी न देरी।

पसीना जिसका मोती बनकर मिट्टी में मिल जाता है,
उसी पसीने के दम पर, सारा जग अन्न खाता है।
सूखे सूखे होंठ हैं उसके, खाली सी है थाली,
फिर भी मेहनत से भर देता, खेतों में हरियाली।

नमन है उस अन्नदाता को, जो मिट्टी को सोना बनाता है,
खुद भूखा रहकर भी जो, सारे जग की भूख मिटाता है!

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