हथेली पर बाल क्यों नहीं उगते? | Hatheli Par Bal Kyon Nahi Ugte Story in Hindi

हथेली पर बाल क्यों नहीं उगते? | Hatheli Par Bal Kyon Nahi Ugte Story in Hindi

कहानी का सार (Quick Summary):
‘हथेली पर बाल क्यों नहीं उगते?’ बीरबल की त्वरित बुद्धि और बादशाही चुटकियों का सबसे मीठा उदाहरण है। अकबर ने बीरबल को निरुत्तर करने के लिए पूछा कि इंसान के पूरे शरीर पर बाल उगते हैं, लेकिन हथेली पर बाल क्यों नहीं उगते? क्या तुम्हारी हथेली पर बाल हैं? बीरबल ने जो जवाब दिया, उसमें बादशाह की दानशीलता, अपनी सेवा और दरबारियों की ईर्ष्या तीनों को एक साथ लपेट दिया!

अकबर का टेढ़ा सवाल और बीरबल की परीक्षा

एक दोपहर दरबार का काम खत्म होने के बाद बादशाह अकबर और बीरबल बाग में टहल रहे थे। अकबर के दिमाग में बीरबल को किसी ऐसे सवाल में फंसाने की इच्छा हुई जिसका कोई वैज्ञानिक या सीधा जवाब न हो।

अकबर ने अपनी दोनों हथेलियां सामने फैलाईं और बीरबल से पूछा—

“बीरबल! एक बात बताओ। कुदरत ने इंसान के सिर पर, दाढ़ी में, छाती पर और हाथों-पैरों पर इतने सारे बाल उगाए हैं… लेकिन इंसान की इस हथेली पर कभी कोई बाल क्यों नहीं उगता? क्या तुम्हारी हथेली पर बाल हैं?”

बीरबल ने अपनी हथेलियां देखीं और मुस्कुराए— “नहीं जहाँपनाह, मेरी हथेली पर भी एक भी बाल नहीं है।”

अकबर ने चुटकी लेते हुए कहा— “तो फिर बताओ बीरबल, तुम्हारी हथेली पर बाल क्यों नहीं उगे?”

बीरबल का पहला वार: ‘इनाम लेने का घर्षण’

बीरबल ने बिना एक सेकंड की भी देरी किए हाथ जोड़े और कहा—

“जहाँपनाह! मेरी हथेली पर बाल इसलिए नहीं उगते, क्योंकि आप इतने बड़े दानवीर और दयालु शहंशाह हैं कि दिन-रात अपनी इस हथेली से मुझे सोने की मोहरें, रत्न और इनाम बख्शते रहते हैं!

हुजूर! जब रोज़ाना आपकी हथेली से इनाम मेरी हथेली पर गिरता है, तो उस लगातार सोने के सिक्कों के घर्षण और रगड़ की वजह से मेरी हथेली पर एक भी बाल उगने का मौका ही नहीं मिलता!”

अकबर अपनी यह तारीफ सुनकर गदगद हो गए! लेकिन अकबर भी कम चतुर नहीं थे। उन्होंने तुरंत दूसरा पेंच फंसाया।

अकबर का पलटवार: ‘तो फिर मेरी हथेली पर बाल क्यों नहीं हैं?’

अकबर ने मुस्कुराते हुए अपनी हथेलियां बीरबल के सामने कर दीं और कहा—

“चलो मान लिया बीरबल कि इनाम लेने की रगड़ से तुम्हारी हथेली गंजी हो गई… लेकिन यह बताओ कि मेरी अपनी हथेली पर बाल क्यों नहीं हैं? मैं तो किसी से इनाम नहीं लेता!”

दरबारी सांस रोके खड़े थे कि अब बीरबल क्या बोलेंगे!

बीरबल ने तुरंत सिर झुकाकर कहा—

“हुजूर! यह तो और भी सीधा है! आप दिन-रात अपनी इन मुबारक हथेलियों से गरीबों, फकीरों और प्रजा को दान लुटाते रहते हैं। आपकी हथेली से इतना धन और दान निकलता है कि उस देने के घर्षण से आपकी हथेली पर भी बाल नहीं उग पाते!”

अकबर अपनी इस दूसरी तारीफ पर भी खुशी से झूम उठे। लेकिन तभी एक जलने वाले दरबारी ने बीच में टांग अड़ाई।

दरबारियों की हथेली का राज और बीरबल का मास्टरस्ट्रोक

उस दरबारी ने आगे बढ़कर कहा— “बीरबल जी! बादशाह सलामत दान देते हैं इसलिए उनकी हथेली पर बाल नहीं हैं, आप दान लेते हैं इसलिए आपकी हथेली पर बाल नहीं हैं… लेकिन हम बाकी दरबारियों की हथेलियों पर बाल क्यों नहीं हैं? हम तो न उतना दान देते हैं और न उतना इनाम लेते हैं!”

उस दरबारी को लगा कि अब बीरबल फंस गए। लेकिन बीरबल ने जो जवाब दिया, उसने पूरे दरबार को हिलाकर रख दिया!

बीरबल ने उस दरबारी की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए कहा—

“अरे भाई! आपकी हथेलियों पर बाल कैसे उगेंगे?

जब जहाँपनाह मुझे इनाम देते हैं और मैं अपनी हथेलियों से इनाम लेता हूँ, तो आप सब दरबारी दिन-रात ईर्ष्या और जलन के मारे ‘अपने हाथ मलते रहते हैं!’

जब आप 24 घंटे जलन में हाथ मलते रहेंगे, तो उस रगड़ की वजह से आपकी हथेलियों पर भला बाल कैसे उगेंगे!”

दरबार में हंसी का फव्वारा

बीरबल का यह तीर सीधे निशाने पर लगा! उस दरबारी का मुंह ऐसा उतर गया मानो उस पर घड़ों पानी पड़ गया हो। सारे दरबारी अपनी हथेलियां छुपाने लगे और अकबर अपनी कुर्सी पकड़कर पेट फूलने तक हंसते रहे!

अकबर ने कहा— “वाह बीरबल! तुम्हारी हाजिरजवाबी का कोई मुकाबला नहीं। तुमने एक ही सांस में हमारी शान भी बढ़ा दी, अपनी वफादारी भी साबित कर दी और इन ईर्ष्यालु दरबारियों की बोलती भी हमेशा के लिए बंद कर दी!”

अकबर ने बीरबल को अपनी उंगली से एक और बेशकीमती अंगूठी उतारकर थमा दी।


कहानी से सीख (Moral of the Story):

  • हाजिरजवाबी सबसे बड़ा गहना है: कठिन से कठिन और असहज सवाल का जवाब भी यदि विनम्रता, चतुराई और हास्य के साथ दिया जाए, तो वह सबकी वाह-वाही लूट लेता है।
  • ईर्ष्या करने वाले का हमेशा नुकसान होता है: दूसरों की तरक्की और इनाम देखकर जलने वाले लोग खुद ही अपना मज़ाक बनवा बैठते हैं।
  • सकारात्मक संवाद की शक्ति: बीरबल ने बिना किसी को गाली दिए या अपशब्द कहे, केवल बुद्धि के बल पर विरोधी को पूरी तरह निरुत्तर कर दिया।

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