दरबार में गधे का प्रवेश (दरबारियों को सबक) | Darbar Mein Gadha Story in Hindi

दरबार में गधे का प्रवेश (दरबारियों को सबक) | Darbar Mein Gadha Story in Hindi

कहानी का सार (Quick Summary):
‘दरबार में गधा’ व्यंग्य और हास्य की एक चुटीली दास्तान है। दरबार के कुछ मंत्रियों ने बीरबल का अपमान करने के लिए उन्हें गधा कहने की कोशिश की। बीरबल ने सचमुच एक गधे को दरबार में शाही पोशाक पहनाकर पेश किया और साबित कर दिया कि वह गधा उन चापलूस मंत्रियों से कहीं ज्यादा समझदार और वफादार है।

दरबारियों का ताना और बीरबल पर हमला

एक दिन दीवान-ए-खास में बीरबल किसी काम से थोड़ी देर से पहुंचे। जब वे अंदर दाखिल हुए, तो एक मंत्री ने अपने बगल वाले वजीर से जोर से हंसते हुए कहा— “अरे देखो! जब भी कोई गधा आता है, तो सब लोग खड़े हो जाते हैं!”

मंत्री का इशारा सीधे बीरबल की तरफ था। कुछ चापलूस दरबारी दबी हंसी हंसने लगे।

बीरबल ने उनकी बात सुन ली। वे मुस्कुराते हुए आगे बढ़े और बोले—

“वजीर साहब! आप गधे का इतना अपमान मत कीजिए। दुनिया में गधा ही वह एकमात्र जीव है जो बिना किसी शिकायत के दिन-रात अपने मालिक का भारी बोझ ढोता है। जबकि दरबार में कई ऐसे लोग हैं जो शाही रोटियां तोड़ते हैं पर काम के नाम पर सिर्फ ढेंचू-ढेंचू करते हैं!”

अकबर ने बीच-बचाव करते हुए हंसकर कहा— “बीरबल! क्या तुम सचमुच मानते हो कि गधा दरबारियों से ज्यादा समझदार हो सकता है? अगर ऐसा है तो कल दरबार में एक गधा पेश करो और साबित करो!”

शाही लिबास में गधे का स्वागत

अगले दिन बीरबल एक धोबी के सीधे-सादे गधे को नहला-धुलाकर, उसके माथे पर चंदन का टीका लगाकर और रेशमी चादर ओढ़ाकर सीधे भरे दरबार में ले आए!

दरबार में गधे को देखकर अकबर अपनी हंसी नहीं रोक पाए— “अरे बीरबल! तुम सचमुच गधा ले आए? अब बताओ यह हमारे इन मंत्रियों से ज्यादा समझदार कैसे है?”

बीरबल ने कहा— “जहाँपनाह! अभी साक्षात परीक्षा हो जाएगी।”

परीक्षा नंबर 1: तारीफ और चापलूसी

बीरबल ने उस मंत्री को बुलाया जिसने कल ताना मारा था। बीरबल ने कहा— “मंत्री जी, ज़रा इस गधे के कान में जाकर कहिए कि ‘तुम दुनिया के सबसे सुंदर और बुद्धिमान इंसान हो’!”

मंत्री ने झेंपते हुए गधे के कान में कहा। गधे ने अपनी पूंछ हिलाई और चुपचाप अपनी घास चरता रहा। उसने कोई घमंड नहीं दिखाया।

बीरबल ने कहा—

“देखा जहाँपनाह! गधे को झूठी चापलूसी का कोई शौक नहीं है। वह झूठी तारीफ सुनकर हवा में नहीं उड़ता। जबकि हमारे इन वजीरों की अगर कोई दो कौड़ी की तारीफ कर दे, तो ये अपनी औकात भूल जाते हैं!”

परीक्षा नंबर 2: शराब और हराम का माल

बीरबल ने आगे दो कटोरे मंगवाए। एक कटोरे में सादा साफ पानी था और दूसरे कटोरे में महंगी शराब थी।

बीरबल ने दोनों कटोरे गधे के सामने रखे। गधे ने शराब वाले कटोरे को सूंघा और तुरंत मुंह फेर लिया! फिर उसने साफ पानी वाले कटोरे को मुंह लगाकर पूरा पानी पी लिया।

बीरबल ने मुस्कुरा कर कहा—

“जहाँपनाह! दूसरा सुबूत देखिए! एक गधा भी जानता है कि नशा और शराब स्वास्थ्य और बुद्धि को नष्ट कर देती है, इसलिए वह शराब को सूंघता तक नहीं है!

लेकिन हमारे ये बड़े-बड़े विद्वान मंत्री हर शाम मदिरा के नशे में धुत होकर अपने होश गंवा बैठते हैं! अब आप ही बताइए कि नशे से दूर रहने वाला यह गधा समझदार हुआ, या नशे में डूबने वाले ये मंत्री?”

दरबारियों का सिर झुका और ठहाकों की गूंज

बीरबल के इन दोनों सटीक तर्कों ने उन ईर्ष्यालु मंत्रियों की बोलती पूरी तरह बंद कर दी। अकबर अपनी गद्दी से उठकर तालियां बजाने लगे।

अकबर बोले— “लाजवाब बीरबल! तुमने व्यंग्य के बाणों से यह साबित कर दिया कि किसी को नीचा दिखाने के लिए अपशब्द कहना आसान है, लेकिन कर्म और आचरण से श्रेष्ठ होना कठिन है।”

अकबर ने उस गधे के मालिक धोबी को 100 सोने की मोहरें दिलवाईं और मंत्रियों को चेतावनी दी कि आइंदा किसी के आत्मसम्मान को ठेस न पहुँचाएं।


कहानी से सीख (Moral of the Story):

  • दूसरों को अपमानित करने का प्रयास उलटा पड़ता है: जो दूसरों को मूर्ख या गधा साबित करने की कोशिश करते हैं, वे अपनी ही संकीर्ण सोच का शिकार बन जाते हैं।
  • सादगी और संयम ही असली समझदारी है: नशा और अहंकार से दूर रहने वाला एक साधारण जीव भी उन विद्वानों से बेहतर है जो ज्ञान का घमंड करते हैं।
  • व्यंग्य से प्रहार का हुनर: बीरबल ने बिना क्रोध किए, हास्य और तर्क के माध्यम से ऐसा जवाब दिया जिसे दरबारी जिंदगी भर नहीं भूल सके।

अकबर-बीरबल की अन्य प्रसिद्ध कहानियां पढ़ें:

Advertisement

Leave a Comment