गर्मियों के मौसम में एक मेहनती चींटी दिनभर अनाज के दाने इकट्ठा करके अपने बिल में जमा कर रही थी ताकि सर्दियों में भोजन की कमी न हो। वहीं एक टिड्डा दिनभर गिटार बजाता और धूप में नाचता-गाता था।
टिड्डे ने चींटी का मजाक उड़ाया, “अरे पगली! इतना हसीन मौसम है, तू दिनभर मजदूरी क्यों कर रही है? चल मेरे साथ नाच।” चींटी ने कहा, “मैं आने वाले शीतकाल के लिए भोजन जुटा रही हूँ, तुम भी तैयारी कर लो।” टिड्डे ने हंसकर बात टाल दी।
कुछ महीनों बाद भीषण बर्फबारी और ठंड शुरू हो गई। बाहर एक भी दाना नहीं बचा। टिड्डा भूख और ठंड से कांपते हुए चींटी के बिल पर पहुँचा और गिड़गिड़ाया। चींटी ने कहा, “जब मौसम तैयारी का था तब तुम नाच रहे थे, तो अब ठंड में भी नाचो!”
💡 सीख: जो आज अपने आराम और समय की आहुति देकर मेहनत करता है, उसका कल सुरक्षित और खुशहाल होता है।