बीरबल का राज्य छोड़ना और अकबर का विलाप | Birbal Ki Vidai Aur Wapsi Story in Hindi
‘बीरबल का राज्य छोड़ना और वापसी’ अकबर और बीरबल की गहरी दोस्ती और आत्मीयता की सबसे भावुक दास्तान है। गुस्से में अकबर ने बीरबल को राज्य छोड़ने का हुक्म दे दिया। बीरबल वेश बदलकर एक दूरदराज के गांव में किसान बनकर रहने लगे। बीरबल के बिना अकबर ऐसे तड़पने लगे मानो शरीर से प्राण निकल गए हों। बीरबल को ढूंढने के लिए अकबर ने ‘सूरज की रोशनी में चलने’ की एक ऐसी पहेली भेजी, जिसने बीरबल का पता बता दिया।
क्रोध का क्षण और बीरबल का निष्कासन
एक दिन दरबार में किसी राजनीतिक फैसले पर मतभेद इतना बढ़ गया कि बादशाह अकबर ने अपना आपा खो दिया। गुस्से में तमतमाते हुए अकबर ने चिल्लाकर कहा—
“बीरबल! तुम हमारी हर बात काटते हो! हम तुम्हारी शक्ल भी नहीं देखना चाहते। इसी वक्त हमारी सल्तनत की सीमा से बाहर निकल जाओ और कभी लौटकर मत आना!”
बीरबल ने चुपचाप सिर झुकाया, अपने शाही वस्त्र और आभूषण उतारकर मेज पर रख दिए और उसी रात चुपचाप आगरा छोड़कर चले गए।
सूना दरबार और अकबर का पश्चाताप
कुछ ही दिनों में अकबर का गुस्सा ठंडा पड़ गया। लेकिन अब उन्हें बीरबल की कमी हर पल, हर सांस में खलने लगी।
दरबार में कोई भी मुकदमा आता, तो न्याय नहीं हो पाता था। कोई विदेशी दूत पहेली पूछता, तो सारे मंत्री बगलें झांकने लगते थे। शाम की सैर सूनी हो गई थी और अकबर का खाना-पीना छूट गया था।
अकबर रोते हुए अपनी बेगम से कहते— “हाय! मैंने गुस्से में आकर अपने जिगर के टुकड़े, अपने सबसे सच्चे दोस्त को खो दिया! बीरबल के बिना यह सल्तनत मेरे लिए एक कब्रिस्तान जैसी है!”
अकबर ने चारों दिशाओं में गुप्तचर दौड़ाए, लेकिन बीरबल का कोई सुराग नहीं मिला।
बीरबल को ढूंढने की अनोखी पहेली
जब सारे जासूस थक गए, तो अकबर ने एक तरकीब सोची। वे जानते थे कि ऐसी पहेली जिसका जवाब सिर्फ बीरबल ही दे सकते हैं, वही बीरबल को सामने ला सकती है।
अकबर ने देश के सभी राजाओं, जमींदारों और गांव के मुखियाओं को एक शाही फरमान भेजा—
“जो कोई भी हमारे पास ऐसा सेवक या आदमी भेजेगा, जो एक ही समय में एक पैर धूप में और एक पैर छांव में रखकर हमारे दरबार तक चलकर आएगा, उसे 10,000 सोने की मोहरें दी जाएंगी! जो नहीं भेज सकेगा, उसे जुर्माना भरना पड़ेगा!”
दूरदराज का गांव और किसान बीरबल
बीरबल आगरा से सैकड़ों मील दूर एक छोटे से गांव में एक गरीब किसान के घर शरण लेकर खेती कर रहे थे। उस किसान का नाम रामू था।
जब उस गांव के मुखिया को यह शाही फरमान मिला, तो वह रोने लगा कि ऐसा आदमी कहाँ से लाएं! रामू के घर जब यह चर्चा हुई, तो बीरबल ने मुस्कुराते हुए किसान से कहा—
“रामू भाई! तुम फिक्र मत करो। तुम आगरा के दरबार जाओ। तुम अपने एक पैर में जूता पहन लेना और दूसरा पैर नंगा रखना!
जिस पैर में जूता होगा वह छांव में रहेगा, और नंगा पैर ज़मीन की धूप में रहेगा! तुम एक पैर धूप और एक पैर छांव में दरबार पहुंच जाओगे और तुम्हें 10,000 मोहरें मिल जाएंगी!”
दरबार में किसान और बीरबल का राज
किसान रामू एक पैर में जूता और एक पैर नंगा रखकर दरबार पहुंचा। जब अकबर ने उसे देखा, तो अकबर की आँखें खुशी से चमक उठीं!
अकबर समझ गए कि यह दिमाग इस सीधे किसान का नहीं हो सकता! अकबर ने किसान को प्यार से बिठाया और पूछा— “सच-सच बताओ भाई, तुम्हें यह युक्ति किसने सिखाई?”
किसान ने डरते हुए सच बता दिया कि उसके खेत में काम करने वाले एक अजनबी पंडित जी ने यह सिखाया है।
अकबर ने एक पल की भी देरी नहीं की। वे खुद अपने शाही रथ में सवार होकर, मंत्रियों को पीछे छोड़कर उस गांव की तरफ दौड़े!
अकबर और बीरबल का आंसुओं भरा मिलन
खेत में जब बीरबल हल चला रहे थे, तो अचानक उन्होंने देखा कि शहंशाह अकबर धूल से सने हुए खुद उनके सामने खड़े हैं!
अकबर ने आगे बढ़कर बीरबल को अपने सीने से लगा लिया। अकबर की आँखों से आंसुओं की धार बह रही थी। अकबर रोते हुए बोले—
“बीरबल! मुझे माफ कर दो! तुम्हारे बिना मेरा तख्त, मेरा ताज और मेरी सल्तनत सब बेमानी है। अपने इस दोस्त को छोड़कर कभी मत जाना!”
बीरबल की आँखें भी भर आईं। उन्होंने अकबर के पैर छू लिए। अकबर बीरबल को अपने साथ शाही पालकी में बिठाकर आगरा लाए और पूरे शहर में दीप जलाकर जश्न मनाया गया।
कहानी से सीख (Moral of the Story):
- सच्चे मित्र अनमोल होते हैं: पद और प्रतिष्ठा के बीच सच्चे, ईमानदार और निस्वार्थ मित्रों का स्थान कोई दौलत नहीं ले सकती।
- क्रोध में रिश्ते मत तोड़िए: गुस्से के एक पल का फैसला जीवन भर का पश्चाताप बन सकता है।
- गुण कभी छिपते नहीं: बीरबल चाहे फटे कपड़ों में खेत में हल चला रहे हों, उनकी बुद्धि का प्रकाश दुनिया के किसी भी कोने से पहचाना जा सकता है।
अकबर-बीरबल की अन्य प्रसिद्ध कहानियां पढ़ें:
1 thought on “बीरबल का राज्य छोड़ना और अकबर का विलाप | Birbal Ki Vidai Aur Wapsi Story in Hindi”