बगुला और केकड़ा: छल-कपट का अंत हमेशा विनाशकारी होता है | Treachery Avenged Moral Story in Hindi

एक बूढ़ा बगुला तालाब की मछलियों को धोखे से बहलाता था कि तालाब सूखने वाला है और वह उन्हें दूसरे बड़े तालाब में ले जाएगा। वह मछलियों को ले जाकर एक चट्टान पर मार कर खा जाता था।

एक दिन उसने केकड़े से भी यही कहा। केकड़ा उसकी गर्दन पकड़कर उड़ चला। रास्ते में जब केकड़े ने नीचे हड्डियों का ढेर देखा, तो उसे बगुले का छल समझ आ गया। केकड़े ने तुरंत अपने तेज पंजों से बगुले की गर्दन काट दी और दुष्ट बगुला वहीं तड़प कर मर गया।

💡 सीख: जो दूसरों के साथ छल-कपट और विश्वासघात करता है, उसका विनाश उसी के कर्मों से तय होता है।

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