4 बार फेल होने के बाद बने IAS (सच्ची प्रेरक संघर्ष गाथा)
जब 12वीं में फेल होकर दुनिया ने नकारा
गाँव के एक छोटे से स्कूल में पढ़ने वाला सुमित (नाम परिवर्तित) 12वीं क्लास में फेल हो गया था। गाँव वालों ने ताने मारे: “यह लड़का तो ज़िंदगी में कुछ नहीं कर पाएगा, इसे किसी ढाबे पर लगा दो।” लेकिन सुमित के दिल में एक चिंगारी सुलग रही थी। उसने गाँव छोड़कर दिल्ली जाने का फैसला किया।
दिल्ली का संघर्ष: लाइब्रेरी में झाड़ू और रातों की पढ़ाई
दिल्ली आकर सुमित के पास रहने की जगह नहीं थी। उसने मुखर्जी नगर की एक लाइब्रेरी में रात को सफाई और दिन में चौकीदारी का काम पकड़ा। दिनभर वो छात्रों को किताबें ले जाते देखता और रात 2 बजे जब सब चले जाते, तो उसी लाइब्रेरी की फर्श पर बैठकर अपनी पढ़ाई करता।
कई दिन ऐसे गुज़रे जब उसने सिर्फ ₹10 के बिस्कुट खाकर पूरा दिन निकाला। तीन बार उसने UPSC प्रीलिम्स और मेन्स दिए, लेकिन तीनों बार उसका नाम फाइनल लिस्ट में नहीं आया। रिश्तेदार कहने लगे: “अब उम्र निकल रही है, शादी कर लो और कोई छोटी-मोटी नौकरी पकड़ लो।”
चौथे प्रयास में रचा इतिहास
चौथे और अपने अंतिम प्रयास में सुमित ने अपनी सारी ताकत झोंक दी। उसने अपनी पिछली कमियों को सुधारा, आंसर राइटिंग पर रात-दिन मेहनत की। जब 2026 का फाइनल रिजल्ट आया, तो सुमित का नाम ऑल इंडिया रैंक 34 पर चमक रहा था!
जिस लड़के को कभी दुनिया ने ‘नाकारा’ कहा था, आज पूरा जिला उसकी गाड़ी के आगे सैल्यूट मारने के लिए लाइन में खड़ा था। उसके बूढ़े पिता की आँखों में वो आँसू थे जो सिर्फ 20 साल के संघर्ष के बाद ही निकलते हैं।
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12th Fail: मनोज शर्मा की संघर्ष गाथा
जानिए कि कैसे एक चंबल का लड़का कुत्ता टहलाने और चक्की पीसने से लेकर IPS अफसर बना। Kuku FM पर सुनिए मशहूर ऑडियोबुक ’12th Fail: रीस्टार्ट योर लाइफ’ और 10,000+ हिंदी कहानियाँ।
UPSC व प्रतियोगी छात्रों के लिए 3 गोल्डन टिप्स
- असफलता से डरो मत, उससे सीखो: हर फेलियर आपको यह बताता है कि आपकी तैयारी में कहाँ चूक रह गई थी।
- नेगेटिव लोगों से 100 मील की दूरी बनाएं: जो लोग आपके सपनों पर हँसते हैं, उन्हें अपने रिजल्ट से जवाब दें, जुबान से नहीं।
- धैर्य (Patience) ही सबसे बड़ी ढाल है: बड़ा मुकाम वक्त मांगता है; अगर इरादा पक्का है तो देर भले हो, अंधेरा कभी नहीं होगा।
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