फौजी की मोहब्बत और सरहद का इंतजार | Emotional Army Love Story in Hindi
एक फौजी की मोहब्बत आम इंसानों जैसी नहीं होती। उसकी पहली मोहब्बत तिरंगा होता है और दूसरी वो लड़की जो उसके हर ‘अलविदा’ के पीछे अपनी पूरी ज़िंदगी दांव पर लगा देती है। यह कहानी है कैप्टन विक्रम और नैना की।
सगाई का वो वादा और सियाचिन की पोस्टिंग
सगाई के ठीक तीसरे दिन विक्रम को सियाचिन ग्लेशियर पर तुरंत रिपोर्ट करने का बुलावा आ गया। विदा होते समय नैना की आंखें नम थीं। विक्रम ने उसकी हथेली चूमते हुए कहा था— “नैना, फौजी का वादा है, या तो तिरंगा लहराकर आऊंगा या तिरंगे में लिपटकर आऊंगा, पर आऊंगा ज़रूर। शादी की तारीख तय रखना!”
महीनों तक सिर्फ डाक से चिट्ठियां आती थीं। बर्फ की सफेद चादर पर -30 डिग्री तापमान में बैठा विक्रम जब नैना की तस्वीर देखता, तो उसे बर्फ में भी अंगीठी की गर्माहट महसूस होती थी।
वो मनहूस टेलीग्राम और शहादत की खबर
शादी से ठीक दस दिन पहले गांव में सेना की गाड़ी आई। नैना के पैरों तले ज़मीन खिसक गई जब उसने तिरंगे में लिपटे ताबूत को देखा। विक्रम ने अपना वादा निभाया था— वह आया था, मगर तिरंगे में लिपटकर। उसने सरहद पर घुसपैठियों से लड़ते हुए तीन गोलियां अपने सीने पर खाई थीं और अपनी टुकड़ी के साथियों को बचाते हुए वीरगति पाई थी।
विक्रम की वर्दी की जेब से एक आखिरी खत मिला, जिस पर खून के धब्बे थे। उस खत में लिखा था:
“मेरी नैना, मुझे माफ करना अगर मैं बारात लेकर नहीं आ सका। मेरी पहली मांग इस वतन ने भर दी है। तुम कभी कमजोर मत पड़ना। जब भी तिरंगा लहराते देखना, समझ लेना तुम्हारा विक्रम तुम्हारे सीने के पास मुस्करा रहा है!”
पूरे गांव ने देखा कि नैना ने आंसू नहीं बहाए। उसने विक्रम की शहादत पर सैल्यूट किया और प्रतिज्ञा ली कि वह कभी किसी और से शादी नहीं करेगी। आज नैना सेना के अनाथ बच्चों के लिए स्कूल चलाती है— क्योंकि सच्ची मोहब्बत शरीर के खत्म होने से कभी नहीं मरती।
