बुजुर्ग घर के बरगद की उस शीतल छांव जैसे हैं,
जिनके कदमों में बसे चारों धाम जैसे हैं।झुर्रियों भरे चेहरे में छिपा है तजुर्बों का समंदर,
उनके आशीर्वाद से महकता है हमारा हर मुकद्दर।
कद्र करो इन फरिश्तों की जब तक ये साथ हैं,
इनकी दुआओं में ही तो भगवान के साक्षात हाथ हैं!