रेत की मानिंद फिसलता जाए वक्त का यह साया,
न किसी के रोके रुका, न किसी के हाथ आया।आज जो है पास तेरे, कल वो बीता पल बनेगा,
कर्म जो आज तू करेगा, वही कल तेरा कल बनेगा।
सजा ले हर लम्हे को तू नेकी और प्यार से,
फिर न मिलेगा यह मौका इस जीवन के संसार से!
रेत की मानिंद फिसलता जाए वक्त का यह साया,
न किसी के रोके रुका, न किसी के हाथ आया।आज जो है पास तेरे, कल वो बीता पल बनेगा,
कर्म जो आज तू करेगा, वही कल तेरा कल बनेगा।
सजा ले हर लम्हे को तू नेकी और प्यार से,
फिर न मिलेगा यह मौका इस जीवन के संसार से!