मगध के सम्राट धनानंद से पहली जंग में जब चाणक्य और चंद्रगुप्त हारकर जंगलों में भटक रहे थे, तो वे एक बूढ़ी मां की झोपड़ी में पहुंचे। बूढ़ी मां ने अपने बच्चे को गरम-गरम खिचड़ी परोसी। बच्चे ने बीच में उंगली डाल दी और उसका हाथ जल गया।
बूढ़ी मां ने डांटकर कहा, “तू भी चाणक्य की तरह मूर्ख है क्या? जो गरम खिचड़ी में सीधे बीच में हाथ डाल रहा है! खिचड़ी हमेशा किनारे-किनारे से खानी चाहिए जहां वह ठंडी होती है!”
यह सुनकर चाणक्य की आँखें खुल गईं। उन्हें समझ आ गया कि मगध की राजधानी पाटलिपुत्र पर सीधे हमला करने के बजाय पहले सीमावर्ती छोटे राज्यों को जीतना चाहिए। चाणक्य ने रणनीति बदली और अखंड भारत का निर्माण किया।
💡 सीख: जब भी कोई बड़ा लक्ष्य या कठिन परीक्षा सामने हो, तो सीधे पूरी किताब देखकर घबराएं नहीं। छोटे-छोटे अध्यायों से शुरुआत करें और कदम-दर-कदम आगे बढ़ें।