Yaksh Ke Prashn | यक्ष के सवाल और धर्मराज युधिष्ठिर के जवाब

Yaksh Ke Prashn – यक्ष के सवाल और धर्मराज युधिष्ठिर के जवाब | इस अद्भुत कांड में, महाभारत के धरोहर, युधिष्ठिर, को एक रहस्यमय यक्ष के सवालों का सामना है। जानिए कैसे वे उत्तर देते हैं और धर्म की महत्वपूर्ण बातें साझा करते हैं। यह युगल संवाद महाभारत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जो जीवन के उद्दीपन की ओर प्रवृत्ति करता है।

Yaksh Ke Prashn
Credit:BR Chopra Mahabharat (Lallantap)

पांडव जन अपने 13 वर्षीय वनवास के दौरान वनों में विचरण कर रहे थे। तब उन्होंने एक बार प्यास बुझाने के लिए पानी की तलाश की। पानी का प्रबंध करने का जिम्मा सर्वप्रथम सहदेव को सौंपा गया। उन्हें पास में एक जलाशय दिखा जिसमें पानी लेने वहाँ पहुँचा। जलाशय के स्वामी अदृश्य यक्ष ने आकाशवाणी के द्वारा उन्हें रोकते हुए पहले कुछ प्रश्नों का उत्तर देने की शर्त रखी। सहदेव उस शर्त और यक्ष को अनदेखा कर जलाशय से पानी पीने लगे।

तब यक्ष ने सहदेव को निर्जीव कर दिया। सहदेव के न लौटने पर क्रमशः नकुल, अर्जुन और भीम ने पानी लाने की जिम्मेदारी उठाई। वे उसी जलाशय पर पहुंचे और यक्ष की शर्तों की अवज्ञा करने के कारण निर्जीव हो गए। अंत में चिंतित युधिष्ठिर स्वयं उस जलाशय पर पहुँचे।

अदृश्य यक्ष ने प्रकट होकर उन्हें आगाह किया और अपने प्रश्नों के उत्तर देने के लिए कहा। युधिष्ठिर ने धैर्य दिखाया। उन्होंने न केवल यक्ष के सभी प्रश्न ध्यानपूर्वक सुने अपितु उनका तर्कपूर्ण उत्तर भी दिया जिसे सुनकर यक्ष संतुष्ट हो गया। आइए जानते हैं कि यक्ष ने कौन कौन से प्रश्न पूछे। वैसे तो यक्ष ने लगभग 100 प्रश्न पूछे परन्तु हम यहाँ कुछ ही प्रश्न और उसके उत्तर को जानेंगे।

यक्ष ने पूछा संसार में दुख क्यों हैं? युधिष्ठिर ने उत्तर दिया संसार के दुख का कारण लालच, स्वार्थ और भय है। यक्ष ने प्रश्न किया तो फिर ईश्वर ने दुख की रचना क्यों की? युधिष्ठिर ने उत्तर दिया ईश्वर ने संसार की रचना की और मनुष्य ने अपने विचारों और कर्मों से दुख और सुख की रचना की।

यक्ष ने प्रश्न पूछा भाग्य क्या है? युधिष्ठिर ने उत्तर दिया हर क्रिया, हर कार्य का एक परिणाम है। परिणाम अच्छा भी हो सकता है, बुरा भी हो सकता है। यह परिणाम ही भाग्य है। आज का प्रयत्न कल का भाग्य है।

यक्ष ने पूछा क्या ईश्वर है? कौन है वह? क्या वह स्त्री है या पुरुष? युधिष्ठिर ने उत्तर दिया कारण के बिना कार्य नहीं। यह संसार उस कारण के अस्तित्व का प्रमाण है। तुम हो, इसलिए वह भी है। उस महान कारण को ही आध्यात्म में ईश्वर कहा गया है। वह न स्त्री है, न पुरुष। यक्ष ने पुनः प्रश्न किया सुख और शांति का रहस्य क्या है? युधिष्ठिर ने उत्तर दिया सत्य, सदाचार, प्रेम और क्षमा सुख का कारण है। असत्य, अनाचार, घृणा और क्रोध का त्याग शांति का मार्ग है।

यक्ष ने पुनः युधिष्ठिर से प्रश्न पूछा सच्चा प्रेम क्या है? युधिष्ठिर ने उत्तर दिया स्वयं को सभी में देखना सच्चा प्रेम है। स्वयं को सर्वव्याप्त देखना सच्चा प्रेम है। स्वयं को सभी के साथ एक देखना सच्चा प्रेम है। यक्ष ने प्रश्न पूछा बुद्धिमान कौन है? युधिष्ठिर ने उत्तर दिया जिसके पास विवेक है।

यक्ष ने प्रश्न पूछा चोर कौन है? युधिष्ठिर ने उत्तर दिया इंद्रियों के आकर्षण जो इंद्रियों को हर लेते हैं, वही चोर हैं।

यक्ष ने प्रश्न पूछा नरक क्या है? युधिष्ठिर ने उत्तर दिया इंद्रियों की दासता नरक है। यक्ष ने प्रश्न पूछा अज्ञान क्या है? युधिष्ठिर ने उत्तर दिया आत्मज्ञान का भाव अज्ञान है।

यक्ष ने प्रश्न पूछा मनुष्य का साथ कौन देता है? युधिष्ठिर ने उत्तर दिया धैर्य ही मनुष्य का साथी होता है।

यक्ष ने पूछा आकाश से भी ऊंचा कौन है? युधिष्ठिर ने उत्तर दिया पिता। यक्ष ने प्रश्न पूछा भूमि से भी भारी चीज क्या है? युधिष्ठिर ने उत्तर दिया संतान को कोख में धरने वाली मां भूमि से भी भारी होती है, जिसका कर्ज कभी नहीं चुकाया जा सकता।

यक्ष ने प्रश्न पूछा। हवा से भी। तेज चलने वाला कौन है? युधिष्ठिर ने उत्तर दिया मन! मन की गति निरंतर जारी रहती है। इसकी गति को समझ पाना मुश्किल है।

यक्ष ने प्रश्न पूछा। घास से भी तुच्छ चीज क्या है? युधिष्ठिर ने उत्तर दिया चिन्ता, चिन्ता घास से भी तुच्छ चीज है। यक्ष ने प्रश्न पूछा घर में रहने वाले का साथी कौन होता है? युधिष्ठिर ने उत्तर दिया पत्नी।

यक्ष ने प्रश्न पूछा। विदेश जाने वाले का साथी कौन होता है? युधिष्ठिर ने उत्तर दिया विद्या। यक्ष ने प्रश्न पूछा किसके छूट जाने पर मनुष्य सर्वप्रिय बनता है? युधिष्ठिर ने उत्तर दिया। अहंभाव के छूट जाने पर मनुष्य सर्वप्रिय बनता है।

यक्ष ने प्रश्न पूछा संसार में सबसे बड़े आश्चर्य की बात क्या है? युधिष्ठिर ने उत्तर दिया हर रोज आंखों के सामने कितने ही प्राणियों की मृत्यु हो जाती है। यह देखते हुए भी इंसान अमरता के सपने देखता है। यही महान आश्चर्य है।

इस प्रकार से युधिष्ठिर ने सारे प्रश्नों के उत्तर सही दिए। अंत में यक्ष बोला युधिष्ठिर! मैं तुम्हारे एक भाई को जीवित करूंगा। तब युधिष्ठिर ने अपने छोटे भाई नकुल को जिंदा करने के लिए कहा। यक्ष हैरान था। उसने कहा, तुमने भीम और अर्जुन जैसे वीरों को जिंदा करने के बारे में क्यों नहीं सोचा?

युधिष्ठिर बोले, मनुष्य की रक्षा धर्म से होती है। मेरे पिता की दो पत्नियां थी। कुंती का एक पुत्र। मैं तो बच्चा हूं। मैं चाहता हूं कि माता माद्री का भी एक पुत्र जीवित रहे। यक्ष यह उत्तर सुनकर काफी खुश हुए और सभी भाइयों को जीवित कर दिया और महाभारत की जीत का वरदान देकर वह अपने धाम लौट गए।

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