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राजकुमारी और मेंढक – Hindi Story

कहानी का नाम है राजकुमारी और मेंढक। एक सुंदर। शाम को एक छोटी सी राजकुमारी ने अपनी टोपी और गहने पहनी और अकेले एक जंगल में घूमने निकली और जब वह एक ठंडे पानी के स्रोत तक पहुंची जो किसी बीच में उठता था, तो वह वहां बैठ गई थी। अब उसके हाथ में एक सुनहरा गेंद था जो उसका पसंदीदा खिलौना था और वह हमेशा उसे ऊपर फेंकती और फिर से गिरने पर उसे पकड़ लेती थी। Story in Hindi | Hindi Story | Hindi Kahaniya | Moral Story

राजकुमारी और मेंढक - Hindi Story

कुछ समय बाद उसने इसे इतनी ऊंचाई पर फेंका कि उसने गिरते समय इसे पकड़ना छोड़ दिया और गेंद दूर उछल गई और जमीन पर आगे पीछे रोल करती रही। जब आखिरकार यह स्रोत में गिर गई, राजकुमारी ने अपनी गेंद के पीछे झील में जांच की लेकिन वह बहुत गहरी थी। फिर उसने अपनी हानि का विलाप करना शुरू किया और कहा, आह, अगर मुझे अपनी गेंद पुनः प्राप्त हो सकती है, तो मैं अपने सभी शानदार कपड़े और गहनों और जो कुछ भी मेरे पास है उसे दे दूंगी। जब वह बोल रही थी, तब एक मेंढक ने अपना सिर पानी से बाहर निकाला और कहा, राजकुमारी, तुम इतनी कड़ी से क्यों रो रही हो?

बोली वह तुम मेरे नाप संक्षेप में क्या कर सकते हो? तुम घिनौना मेंढक हो। मेरी सोने की गेंद इस झील में गिर गई है। मेंढक ने कहा, मुझे तुम्हारी मोती और मनके और शानदार कपड़े चाहिए। नहीं। लेकिन अगर तुम मुझसे प्यार करोगी और मुझे तुम्हारे साथ रहने और तुम्हारी सोने की चट्टी पर खाना खाने की इजाजत दोगी और तुम्हारे बिस्तर पर सोने की इजाजत दोगी तो मैं तुम्हें तुम्हारी गेंद वापस लेकर दूंगा। क्या बकवास है? राजकुमारी ने सोचा यह बेवकूफ मेंढक बोल रहा है। 

यह शायद मेरी गेंद मुझे मिला सकता है। इसलिए मैं इसे जो कुछ भी वह मांग रहा है, वही दूंगी। तब मेंढक ने राजकुमारी से कहा, ठीक है। मेंढक ने अपना सिर पानी में डाला और थोड़ी देर बाद वह फिर से ऊपर आया जिसमें गेंद उसकी मुंह में थी और उसने इसे स्रोत के किनारे पर फेंक दिया।

जैसे ही राजकुमारी ने अपनी गेंद देखी, वह भाग कर उसे उठाने चली और उसे फिर से हाथ में पाकर इतनी खुशी हुई कि उसने मेंढक को भूल गई। बस उसके साथ घर की ओर बढ़ी। मेंढक ने पीछे कहा, रुको राजकुमारी, और मुझे तुम्हारे साथ लेकर जाओ जैसा तुमने कहा था। लेकिन उसने किसी बात की परवाह नहीं की। अगले दिन जब राजकुमारी ने खाना खाने बैठी, एक अजीब सी आवाज सुनी।

टैप, टैप, फ्लैश, फ्लैश। जैसे कुछ मार्बल सीढ़ियों से ऊपर आ रहा हो। और ठीक बाद में दरवाजे पर हल्की धड़कन हुई और एक छोटी सी आवाज बोली, दरवाजा खोलो। मेरी प्रिय राजकुमारी, अपने सच्चे प्रेम को यहां बुलाओ और यह ध्यान रखो जो तू और मैंने कहा था ठंडे स्रोत के पास हरियाली भरे जंगल की छाया में। तब राजकुमारी दरवाजा खोलने के लिए दौड़ी और वहां उसने मेंढक को देखा जिसे उसने पूरी तरह से भूला रखा था।

 इस दृश्य को देखकर वह दुखित हो गई और जैसे ही वह दरवाजे को जितनी जल्दी हो सके बंद कर ली। वह अपनी सीट पर वापस गई। राजा उसके पिताजी ने देखा कि कुछ उसे डराया हुआ है। उससे पूछा कि क्या बात है, यहां एक नीच मेंढक है। बोली वह जो मेरी गेंद को स्रोत से बाहर निकाला। मैंने उससे कहा था कि वह मेरे साथ यहां रहेगा। सोचती थी कि वह स्रोत से निकल नहीं सकता, लेकिन वह यहां दरवाजे पर है और वह अंदर आना चाहता है।

जब वह यह कह रही थी तब मेंढक ने फिर से दरवाजे पर खटखटाया और बोला, दरवाजा खोलो मेरी प्रिय राजकुमारी, अपने सच्चे प्रेम को यहां बुलाओ और यह ध्यान रखो जो तू और मैंने कहा था ठंडे स्रोत के पास हरियाली भरे जंगल की छाया में। तब राजा ने युवा राजकुमारी से कहा, तुमने जो वादा किया है, उसे निभाना होगा तो जाओ और उसे अंदर ले आओ। वह ऐसा करने गई और मेंढक कमरे में कूद गया और फिर सीधा टैप।

टैप फ्लैश फ्लैश करके आया उसने राजकुमारी से बोला। मुझे तुम्हारे पास बैठने दो। अपनी प्लेट मेरे पास रखो ताकि मैं इसे खा सकूं। राजकुमारी ने यह किया और जब उसने खा लिया तो उसने कहा, अब मैं थक गया हूं। मुझे ऊपर ले जाओ और मुझे अपने बिस्तर पर रखो। और राजकुमारी ने उसे अपने हाथ में उठाया और अपने बिस्तर की तकिये पर रख दिया, जहां उसने पूरी रात सो लिया।

जैसे ही सुबह हुई वह उछलकर खड़ा हो गया और कूदकर घर से बाहर गया तो राजकुमारी ने सोचा अब वह चला गया है और मुझे उसके साथ और परेशानी नहीं होगी। लेकिन वह गलत थी क्योंकि जब रात फिर आई तो दरवाजे पर वही कड़कने की आवाज सुनी गई और मेंढक फिर आया और बोला दरवाजा खोलो मेरी प्रिय राजकुमारी, अपने सच्चे प्रेम को यहां बुलाओ और यह ध्यान रखो जो तू और। मैं ने कहा था ठंडे स्रोत के पास हरियाली भरे जंगल की छाया में।

जब राजकुमारी ने दरवाजा खोला तो मेंढक अंदर चला गया और फिर वैसे ही उसकी तकिये पर सो गया जैसे पहले किया था और तीसरी रात भी उसने वही किया। लेकिन जब राजकुमारी अगली सुबह जागी तो उसने हैरान होकर देखा कि मेंढक की जगह उसे एक सुंदर राजकुमार देख रहा है जो उसके बिस्तर के सिरे पर खड़ा था। राजकुमार ने उससे कहा कि उसे किसी कटु दानव ने एक मेंढक में बदल दिया था और किसी राजकुमारी ने उसे एक स्रोत से निकालकर उसकी प्लेट से खिलाया और उसकी बिस्तर पर तीन रातें सोने दिया। तो तुम ठीक हो जाओगे।

राजकुमार ने कहा, उसका कठिन वशीकरण तुमने तोड़ दिया है और अब मेरे पास कुछ इच्छा नहीं है। बस यही चाहूंगा कि तुम मेरे पिताजी के राज्य में मेरे साथ चलो, जहां मैं तुमसे विवाह करूंगा और जब तक तुम जीती हो, तुमसे प्यार करूंगा।

राजकुमारी ने इस सब पर हां कहने में देर नहीं की और जब वे बातचीत कर रहे थे तो एक रंगीन सीटी वाली सुंदर गाड़ी आई जिसमें आठ खूबसूरत घोड़े थे जिन्हें फूलों के साथ सजाया गया था और गाड़ी के पीछे राजकुमार का सेवक वफादार हेनरिच जिन्होंने अपने प्यारे स्वामी के गयाब होने का दुख इतनी देर तक रोते हुए बिताया था। फिर उन्होंने राजा से विदाई ली और आठ घोड़ों वाली गाड़ी में बैठे। पूर्ण हर्ष और उल्लास के साथ राजकुमार के राज्य की ओर बढ़े और वहां वे बहुत खुशहाली से रहे।

 चालाक लोमड़ी – Hindi Story

सालों पहले एक जंगल में गधा, लोमड़ी और शेर के बीच अच्छी दोस्ती हो गई। तीनों ने एक दिन बैठकर साथ में शिकार करने के बारे में सोचा। कुछ देर बाद सबने मिलकर तय किया कि शिकार करने के बाद उस पर तीनों का बराबर हक होगा। यह फैसला लेने के बाद तीनों दोस्त शिकार के लिए जानवर की तलाश में जंगल की ओर निकल पड़े। Story in Hindi | Hindi Story | Hindi Kahaniya | Moral Story

 चालाक लोमड़ी - Hindi Story

कुछ ही दूरी पर उन तीनों को जंगल में हिरण दिखा। एकदम तीनों ने हिरण पर झपट्टा मारने की कोशिश की। उसे देखते ही वह तेजी से दौड़ने लगा। दौड़ते दौड़ते थक कर हिरण कुछ देर के लिए रुक गया। तभी मौका देखकर शेर ने हिरण का शिकार कर दिया। गधा, लोमड़ी और शेर तीनों काफी खुश हो गए। मरे हुए हिरण के तीन हिस्से करने के लिए शेर ने अपने दोस्त गधे को कहा। जैसा पहले तय हुआ था, उसी हिसाब से गधे ने शिकार को तीन बराबर हिस्सों में बांट दिए। यह देखकर शेर को बिल्कुल अच्छा नहीं लगा।

वह गुस्से में जोर जोर से दहाड़ें मारने लगा। दहाड़ते दहाड़ते शेर ने गधे पर हमला करके उसे अपने दांतों और पंजों की मदद से मार दिया। लोमड़ी ये सब होते हुए देख रही थी। तभी शेर ने एकदम से लोमड़ी को कहा, चलो दोस्त, अब तुम इस शिकार का अपना हिस्सा ले लो। लोमड़ी चालाक और समझदार दोनों ही थी। उसने बड़ी ही अक्लमंदी के साथ हिरण के शिकार का तीन चौथाई हिस्सा शेर को दे दिया और खुद के लिए एक चौथाई हिस्सा ही बचाया। इस तरह हुए शिकार के हिस्से से शेर काफी

खुश हो गया। उसने हंसते हुए लोमड़ी से कहा अरे वाह! तुमने एकदम मेरे मन का काम किया है। तुम्हारा दिमाग काफी तेज है। इतना कहते ही शेर ने लोमड़ी से पूछा तुम इतनी समझदार कैसे हो? तुम्हें कैसे पता चला कि मैं क्या चाहता हूं? तुमने इतना अच्छे से शिकार का हिस्सा लगा। हमसे सीखा है।

शेर के सवालों का जवाब देते। आप जंगल के राजा हैं और आपको कैसे हिस्सा लगाना है, यह समझना मुश्किल नहीं है। साथ ही मैंने उस गधे की हालत भी देख ली थी। उसके साथ जो कुछ भी हुआ, उससे सीख लेते हुए मैंने ऐसी समझदारी दिखाई है। जवाब सुनकर शेर काफी खुश हुआ।

होशियार बंदर – Hindi Story

दूसरी कहानी का नाम है होशियार बंदर। एक बहुत घना जंगल था जहां सभी जानवर एक दूसरे के साथ बहुत प्यार से रहा करते थे।

उस जंगल के बीच एक बहुत सुंदर और बड़ा तालाब भी था। उस तालाब में एक मगरमच्छ और उसका परिवार रहता था। और तो और तालाब के चारों ओर बहुत सारे मीठे मीठे फलों के पेड़ लगे हुए थे। उनमें से एक जामुन के पेड़ पर एक बंदर रहता था। उस पेड़ के जामुन बहुत मीठे थे। बंदर और मगरमच्छ एक दूसरे के बहुत अच्छे दोस्त थे। बंदर पेड़ से मीठे और स्वादिष्ट जामुन खाता रहता था और साथ ही साथ अपने दोस्त मगरमच्छ को भी देता रहता था। Story in Hindi | Hindi Story | Hindi Kahaniya | Moral Story

होशियार बंदर - Hindi Story

बंदर अपने दोस्त मगरमच्छ का खास खयाल रखता था और मगरमच्छ भी उसे अपनी पीठ पर बैठाकर पूरे तालाब में घुमाता रहता था। ऐसे ही हंसीखुशी दिन निकलते गए और दोनों की दोस्ती बहुत गहरी होती गई। बंदर जो जामुन मगरमच्छ को खाने के लिए देता था, मगरमच्छ उनमें से कुछ जामुन अपनी पत्नी के लिए भी ले जाता था। दोनों जामुनों को बड़े ही चाव से मिलकर खाते थे। कुछ दिनों के बाद मगरमच्छ की पत्नी ने सोचा कि बंदर तो हमेशा ही स्वादिष्ट जामुन खाता रहता है। जब जामुन इतने स्वादिष्ट है तो उसका कलेजा कितना स्वादिष्ट होगा। उसने यह सारी बात मगरमच्छ को भी बोली और

वह उससे जिद करने लगी कि उसे तो बंदर का कलेजा ही खाना है। मगर ने उसे बहुत समझाने की कोशिश की लेकिन उसने उसकी एक भी बात नहीं मानी और वह मगरमच्छ से रूठ गई। अब मगर को न चाहते हुए भी उसे हां बोलना पड़ा। उसने अपनी पत्नी से कहा कि वह बंदर को अपनी गुफा में लेकर आ जाएगा। तब उसका कलेजा निकालकर खा लेना। हर दिन की तरह स्वादिष्ट जामुनों के साथ बंदर मगरमच्छ का इंतजार कर रहा था। कुछ ही देर में मगर आ गया और हमेशा की तरह दोनों ने मिलकर जामुन खाए।

मगरमच्छ ने बंदर से बोला कि दोस्त आज तुम्हारी भाभी तुमसे मिलना चाहती है, चलो तालाब की दूसरी ओर मेरा घर है, आज वहां चलते हैं। बंदर भी मगरमच्छ की पत्नी से मिलने के लिए तुरंत मान गया और उछलकर मगरमच्छ की पीठ पर बैठ गया। मगरमच्छ उसे लेकर अपनी गुफा की ओर बढ़ने लगा। जैसे ही दोनों तालाब के बीच पहुंचे वैसे ही मगरमच्छ ने कहा कि मित्र आज तुम्हारी भाभी की एक इच्छा है कि वह तुम्हारा स्वादिष्ट कलेजा खाए। ऐसा कहकर उसने बन्दर पूरी बात बता दी। सारी बात सुनकर बंदर कुछ सोचने लगा और मगरमच्छ से बोला मित्र तुमने मुझे यह पहले क्यों नहीं बताया?

मगर ने पूछा क्यों मित्र, क्या हो गया? तुम ऐसा क्यों बोल रहे हो? बंदर ने बोला कि मैं तो अपना कलेजा पेड़ पर ही छोड़ आया हूं। तुम मुझे वापस ले चलो तो मैं अपना कलेजा अपने साथ में ले आऊंगा, जिससे भाभी की इच्छा भी पूरी हो जाएगी। मगरमच्छ भी बंदर की बातों में आ गया और उसे वापस किनारे पर ले आया।

वह दोनों जैसे ही किनारे पर पहुंचे वैसे ही बंदर झट से अपने पेड़ पर चढ़ गया। पेड़ पर चढ़ते ही बोला कि मूर्ख मगरमच्छ, तुझे पता नहीं कि कलेजा हमारे अंदर ही होता है। मैं हमेशा ही तुम्हारा भला सोचता रहा और तुम मुझे ही खाने चले थे। कैसी मित्रता है यह तुम्हारी? चले जाओ यहां से।

दोस्ती की मिसाल – Hindi Story

तीसरी कहानी का नाम है दोस्ती की मिसाल। एक बड़े से जंगल में एक बंदर और एक खरगोश बड़े प्यार से रहते थे। दोनों में इतनी अच्छी दोस्ती थी कि हमेशा एक साथ खेलते और अपना सुख दुख बांटते थे। एक दिन खेलते खेलते बंदर ने कहा, मित्र खरगोश आज कोई नया खेल खेलते हैं। खरगोश ने पूछा बताओ कौन सा खेल खेलने का मन है तुम्हारा? Story in Hindi | Hindi Story | Hindi Kahaniya | Moral Story

दोस्ती की मिसाल - Hindi Story

बंदर बोला आज हम दोनों को आंख मिचोली खेलनी चाहिए। खरगोश हंसते हुए कहने लगा ठीक है खेल लेते हैं, बड़ा मजा आएगा। दोनों यह खेल शुरू करने ही वाले थे कि तभी उन्होंने देखा कि जंगल के सारे पशु पक्षी इधर उधर भाग रहे हैं। बंदर ने फुर्ती दिखाते हुए पास से भाग रही लोमड़ी से पूछा, अरे ऐसा क्या हो गया है? क्यों सब भाग रहे हैं?

लोमड़ी ने जवाब दिया एक शिकारी जंगल में आया है इसलिए हम सब अपनी जान बचाकर भाग रहे हैं। तुम भी जल्दी भागो वरना वह तुम्हें पकड़ लेगा। इतना बोलकर लोमड़ी तेजी से वहां से भाग गई। शिकारी की बात सुनते ही बंदर और खरगोश भी डरकर भागने लगे। भागते भागते दोनों उस जंगल से काफी दूर निकल आए। तभी बंदर ने कहा मित्र खरगोश, सुबह से हम भाग रहे हैं। अब शाम हो चुकी है। चलो थोड़ा आराम कर लेते हैं। मैं थक गया हूं।

खरगोश बोला, हां, थकान ही नहीं, प्यास भी बहुत लगी है। थोड़ा पानी पी लेते हैं, फिर आराम करेंगे। बंदर ने कहा, प्यास तो मुझे भी लगी है। चलो पानी ढूँढते हैं। दोनों साथ में पानी ढूँढने के लिए निकले। कुछ ही देर में उन्हें पानी का एक मटका मिला। उसमें बहुत कम पानी था। अब खरगोश और बंदर दोनों के मन में हुआ कि अगर इस पानी को मैं पी लूंगा तो मेरा दोस्त प्यासा ही रह जायेगा। अब खरगोश कहने लगा तुम पानी पी लो। मुझे ज्यादा प्यास नहीं लगी है। तुमने उछलकूद बहुत की है, इसलिए तुम्हें ज्यादा प्यास लगी होगी।

रहस्यमय सोने की गुफा – Hindi Story

कहानी का नाम है रहस्यमय सोने की गुफा। सालों पहले फारस देश में अलीबाबा और कासिम नाम के दो भाई रहते थे। पिता की मृत्यु के बाद से दोनों भाई मिलकर अपने पिता का व्यापार संभालते थे। बड़ा भाई कासिम बहुत लालची था। उसने धोखे से पूरा व्यापार हथियाकर अलीबाबा को घर से निकाल दिया। इसके बाद अलीबाबा किसी बस्ती में जाकर अपनी पत्नी के साथ झोपड़ी में गरीबी की जिंदगी व्यतीत करने लगा। वह रोजाना जंगल जाकर लकड़ियां काटकर लाता और बाजार में उन्हें बेचकर जैसे कैसे घर का गुजारा चलाता था। एक दिन अलीबाबा ने जंगल में लकड़ी काटते समय 40 घुड़सवार को वहां आते हुए देखा। Story in Hindi | Hindi Story | Hindi Kahaniya | Moral Story

रहस्यमय सोने की गुफा - Hindi Story

सभी घुड़सवार के पास धन की पोटली और खंजर थे। यह देखकर वह समझ गया था कि ये सभी चोर हैं। अलीबाबा एक पेड़ के पीछे छिप कर उन्हें देखने लगा। तभी सभी घुड़सवार एक पहाड़ के पास जाकर खड़े हो गए। तभी चोरों के सरदार ने पहाड़ी के सामने खड़े होकर बोला खुल जा सिमसिम। इसके बाद पहाड़ में से एक गुफा का दरवाजा खुला। सारे घुड़सवार उस गुफा के अंदर चले गए। अंदर जाकर उन्होंने बोला बंद हो जा सिमसिम और गुफा का द्वार बंद हो गया। यह देख अलीबाबा दंग रह गया।

कुछ देर बाद वह दरवाजा फिर से खुला और उसमें से वह सभी घुड़सवार निकले और वहां से रवाना हो। अलीबाबा यह जानने को बेताब हो गया कि आखिर इस गुफा में क्या है और वो सब यहां क्या कर रहे थे। इसके बाद उसने गुफा में जाने का फैसला किया। वह उस पहाड़ के सामने गया और चोरों के सरदार के शब्द बोलने लगा। खोल जा सिमसिम, खुल जा सिमसिम। गुफा का

दरवाजा खुल गया। अलीबाबा गुफा के अंदर गया और उसने देखा कि वहां सोने की गिन्नियां, अशर्फियां, गहने आदि रखे थे। चारों तरफ खजाना ही खजाना था। यह सब देखकर उसकी खुशी का ठिकाना नहीं था। उसे मालूम हो गया था कि वह चोर सारा चोरी का सामान यहां आकर छुपाते हैं। अलीबाबा ने वहां से एक पोटली में सोने की अशर्फियां भरी और घर चला आया।

घर जाकर अलीबाबा ने इस पूरे किस्से के बारे में अपनी पत्नी को। एक साथ इतनी सारी अशर्फियाँ देखकर उसकी पत्नी हैरान रह गई और अशर्फियों को गिनने बैठ गई। तभी अलीबाबा ने बोला कि ये इतनी अशर्फियाँ हैं कि इन्हें गिनते गिनते रात हो जाएगी। मैं गड्ढा खोदकर इन्हें छुपा देता। जिससे किसी को भी हम पर शक न हो। अलीबाबा की पत्नी बोली, मैं इनकी गिनती नहीं कर सकती हूं, लेकिन अंदाजे के लिए इन्हें तोल तो सकती हूं। यह देख कर अलीबाबा की पत्नी भागती हुई कासिम के घर गई और उसकी पत्नी से गेहूं को तोलने के लिए तराजू मांगने लगी। कासिम की पत्नी को उस पर शक हुआ।

उसने सोचा कि इन गरीब लोगों के पास अचानक उनके पास इतना अनाज कैसे आया। वह अंदर गई और तराजू के नीचे गोंद लगाकर लाई और उसे दे दिया। रात को अलीबाबा की बीवी ने सारी अशर्फियों को तोला और सुबह उनका तराजू लौटा आई। कासिम की पत्नी ने तराजू को उल्टा करके देखा तो उस पर सोने की एक अशर्फी चिपकी हुई थी। उसने यह बात अपने पति को बताई। कासिम और उसकी पत्नी यह जानकर जलभुन गए। दोनों को रात भर नींद नहीं आई। सुबह होते ही कासिम अलीबाबा के घर गया और

उससे धन का स्रोत पूछने लगा। यह सुनकर अलीबाबा ने कहा, आपको कोई गलतफहमी हुई है? मैं तो एक मामूली लकड़हारा हूं। कासिम ने बोला कि तुम्हारी बीवी कल हमारे घर से अशर्फियों को तोलने के लिए तराजू लेकर गई थी। यह देखो, यह अशर्फी तराजू पर चिपकी मिली है। सब सच बताओ नहीं तो मैं सबको बता दूंगा कि तुमने चोरी की है। यह सुनकर अलीबाबा ने सच सच सारी कहानी बता।

कासिम के मन में लालच आ गया। उसने खजाना हथियाने का प्लान बनाया और अगले दिन गुफा पहुँच गया। वह अपने साथ एक गधा भी लेकर गया ताकि वह उस पर खजाना लाद कर ला सके। गुफा के सामने पहुँचकर उसने अलीबाबा ने जैसे बताया था, वैसे ही किया। उसके खुल जा सिमसिम बोलते ही गुफा का दरवाजा खुल गया। अंदर पहुँचकर चारों तरफ खजाना देखकर वह भौचक्का रह गया। उसने बोरियों में सोने के सिक्के भरे और बाहर निकलते समय क्या बोलना है, वही भूल गया।

गुफा से बाहर निकलने की कासिम ने तमाम प्रयास किए, लेकिन कोई रास्ता न निकला। वह गुफा के अंदर कैद हो जाता है। कुछ देर बाद जब चोरों का गिरोह वहाँ पहुँचा तो उन्होंने देखा कि बाहर एक गगहा बंधा है। वे समझ जाते हैं कि यहाँ कोई आया है। चोर अंदर जाते हैं और कासिम को ढूँढकर मार देते हैं।

इधर जब कासिम घर नहीं पहुँचता तो उसकी पत्नी परेशान हो जाती है और अलीबाबा के घर जाकर बड़े भाई को ढूंढकर लाने के लिए बोलती। अलीबाबा ढूँढता हुआ गुफा के पास पहुँचा तो वहां उसने भाई के गधे को घास चरते हुए देखा। वह समझ जाता है कि कासिम अंदर गया था और चोरों ने उसे पकड़ लिया है।

अलीबाबा जब गुफा के अंदर। तो उसे कासिम की लाश मिली। अलीबाबा लाश को घर लाता है और बिना किसी को बताए कासिम की पत्नी के साथ उसका अंतिम संस्कार कर। कासिम की पत्नी के कहने पर अलीबाबा और उसकी पत्नी कासिम का व्यापार संभालने लगते हैं और उसके साथ रहने लगते हैं। कहानी से सीख। लालच मनुष्य का दुश्मन है। लालच करने से सब काम खराब हो जाते हैं। इसलिए कभी भी लालच नहीं करना चाहिए।

भरोसे में धोका  – Hindi Story

बेलापुर गांव के अंदर एक छोटा सा तालाब था जो कि बोहत प्यारा था। उस तालाब के अंदर सुंदर सुंदर मछलियां रहा करती थीं। सभी मछलियों में बहुत ज्यादा प्यार और एकता थी। उसी तरफ से कुछ दूरी पर एक दूसरा तालाब था। जिस तालाब में एक मगरमच्छ रहा करता था। उस तालाब की सारी मछलियां मगरमच्छ खा चुका था। एक दिन मगरमच्छ खुद से कहता है। Story in Hindi | Hindi Story | Hindi Kahaniya | Moral Story