Story for Kids in Hindi | बच्चों के लिए नैतिक शिक्षाप्रद कहानियाँ

मुर्गा की अकल ठिकाने

मुर्गा की अकल ठिकाने

एक समय की बात है, एक गांव में ढेर सारे मुर्गे रहते थे। गांव के बच्चे ने किसी एक मुर्गे को तंग कर दिया था। मुर्गा परेशान हो गया, उसने सोचा अगले दिन सुबह मैं आवाज नहीं करूंगा। सब सोते रहेंगे तब मेरी अहमियत सबको समझ में आएगी, और मुझे तंग नहीं करेंगे। मुर्गा अगली सुबह कुछ नहीं बोला। सभी लोग समय पर उठ कर अपने-अपने काम में लग गए इस पर मुर्गे को समझ में आ गया कि किसी के बिना कोई काम नहीं रुकता। सबका काम चलता रहता है। 

नैतिक शिक्षा:

घमंड नहीं करना चाहिए। आपकी अहमियत लोगों को बिना बताए पता चलती है।

बुद्धिमान बंदर

Story for Kids in Hindi

एक गांव में एक बंदर रहता था। वह बंदर बहुत ही बुद्धिमान था। गांव के लोग उसकी बुद्धि की तारीफ करते थे। एक दिन गांव में बड़ा मेला आया। बंदर भी मेले में जाने का सोचा।

मेले में बंदर ने एक खास खेल देखा। खेल में एक बड़ा टांगा लटका हुआ था। टांगे पर एक बेलन लटका हुआ था। लोगों को टांगे पर बैठकर बेलन को छूना था। जो भी बेलन को छूता, वह खेल जीत जाता।

बंदर ने भी खेल में भाग लिया। वह टांगे पर बैठकर बेलन को छूने की कोशिश करने लगा। लोग उसे हंसते देख रहे थे। बंदर ने बेलन को छूने की कोशिश की, पर वह नहीं हो पाया।

बंदर ने अपनी बुद्धि का इस्तेमाल किया। वह टांगे की ओर देखने लगा। उसने देखा कि टांगे के नीचे एक छोटी सी खाई है। खाई में एक बंदर बैठा हुआ था। बंदर ने खाई में जाकर बेलन को छू लिया। खेल जीत गया।

नैतिक शिक्षा:

बुद्धि का सही इस्तेमाल करना जरूरी है। जीवन में हमें समस्याओं का सही समाधान ढूंढना चाहिए।

चमकती गुफा का रहस्य

चमकती गुफा का रहस्य

एक छोटी सी गुलाबी गौरैया लिली, जंगल की खबरों और रहस्यमय चीजों के बारे में जानने की बहुत उत्साही थी। एक सुबह, उसने बूढ़े तोते दादा से जंगल के दूसरे हिस्से से आने वाली एक चमकती रोशनी के बारे में सुना। जिज्ञासा ने लिली को बेचैन कर दिया, और उसने अपने दोस्तों बबली और टूटी के साथ मिलकर रहस्य को सुलझाने का फैसला किया।

सूर्योदय से पहले, तीनों दोस्त रोशनी की ओर चल पड़े। रास्ता लंबा और कठिन था, लेकिन रोमांच की उम्मीद ने उनकी थकान को दूर रखा। आखिरकार, उन्होंने एक समाधि क्षेत्र में पहुंचे, जहां एक पत्थर के नीचे से चमकती रोशनी निकल रही थी।

डर और उत्सुकता के मिश्रण के साथ, उन्होंने झाँक कर देखा। अंधेरे में चमकते हुए कीड़े, जिन्हें उन्होंने पहले कभी नहीं देखा था, गुफा के अंदर रोशन कर रहे थे! डर गायब हो गया, और आश्चर्य चमक उठा।

लिली, बबली और टूटी ने सीखा कि रहस्य हमेशा डरावने नहीं होते हैं। कभी-कभी, वे प्रकृति के जादुई आश्चर्यों का द्वार खोलते हैं। साथ में, उन्होंने किसी भी रोमांच का सामना करने का साहस पाया।

खुशी-खुशी अपने घोंसले की ओर लौटते हुए, उन्हें पता था कि जंगल में और भी अनगिनत रहस्य छिपे होंगे। अब उनके पास एक नया मिशन था – जिज्ञासा की रोशनी से जंगल के चमत्कारों को उजागर करना!

नैतिक शिक्षा: –

जिज्ञासा हमें रोमांच की ओर ले जाती है, लेकिन दोस्ती और साहस हमें किसी भी रहस्य का सामना करने में सक्षम बनाते हैं। डर से ज्यादा, प्रकृति के चमत्कारों की खोज में असली जादू होता है।

राजा भँवरलाल और जादुई चश्मा

राजा भँवरलाल और जादुई चश्मा
राजा भँवरलाल और जादुई चश्मा

एक बार की बात है, एक छोटे से राज्य में राजा भँवरलाल राज करते थे। वे दयालु थे, लेकिन उन्हें दूर की चीज़ें देखने में परेशानी होती थी। जंगल की सैर, पहाड़ों का नज़ारा, या दूर से आने वाले मेहमानों का स्वागत करना, उनके लिए मुश्किल था।

एक दिन, एक विदेशी व्यापारी महल में आया। उसके पास एक जादुई चश्मा था, जो पहनने वाले को दूर की चीज़ें साफ-साफ दिखा सकता था। व्यापारी ने राजा को यह चश्मा दिखाया और कहा, “महामहिम, यह चश्मा आपकी परेशानी का हल है।”

राजा भँवरलाल ने चश्मा पहना और आश्चर्य में रह गए। वह दूर-दूर तक सब कुछ देख सकते थे! उन्हें जंगल में घूमते हिरण, पहाड़ों की चोटियों पर टहलते बादल, और आते हुए मेहमानों का चेहरा भी पहचान सकते थे।

इस जादुई चश्मे के साथ, राजा भँवरलाल का शासन और भी बेहतर हो गया। वे दूर से ही जंगल में होने वाले अन्याय को देख सकते थे और उसकी रक्षा कर सकते थे। वे आने वाले मेहमानों की ज़रूरतें दूर से ही समझ सकते थे और उनका बेहतर स्वागत कर सकते थे।

लेकिन एक समय, यह चश्मा राजा भँवरलाल के लिए समस्या बन गया। वे इतना दूर तक सब कुछ देखने लगे की नज़दीकी चीज़ों पर ध्यान नहीं देते थे। वे अपने महल के लोगों की बात सुनने में कम रुचि लेने लगे, और दूर के नज़ारों में खोए रहते थे।

एक दिन, एक गरीब किसान के खेत में बाढ़ आ गई। किसान मदद के लिए चिल्ला रहा था, लेकिन राजा ने उसे सुना नहीं, क्योंकि वह दूर के पहाड़ों पर एक रंगीन पक्षी को देख रहे थे। इस घटना ने राजा भँवरलाल को झकझोर दिया। उन्होंने समझा कि दूर की चीज़ें देखने का मतलब, नज़दीकी चीज़ों की अनदेखी करना नहीं है।

राजा भँवरलाल ने जादुई चश्मा उतार दिया और अपने राज्य पर फिर से ध्यान देना शुरू किया। वे लोगों की बात सुनते थे, उनके दुख का दर्द समझते थे, और उनकी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए काम करते थे। उन्होंने पाया कि पास की चीज़ों पर ध्यान देना, दूर की चीज़ों को देखने से कहीं ज़्यादा ज़रूरी और ज़्यादा खुशी देने वाला है।

उस दिन से, राजा भँवरलाल चश्मे का कम और अपने लोगों का ज़्यादा ख्याल रखने लगे। उन्होंने सीखा कि सच्ची दूरदर्शिता सिर्फ दूर चीज़ों को देखने में नहीं, बल्कि अपने ही राज्य और लोगों के दुख-सुख को समझने में होती है।

नैतिक शिक्षा:

दूर की चीज़ों को देखना अच्छा है, लेकिन अपने आस-पास की चीज़ों को और लोगों को नज़रअंदाज़ न करें। सच्ची खुशी पास की चीज़ों को महत्व देने और लोगों की सेवा करने में मिलती है।

चांदनी रात की कहानी

चांदनी रात की कहानी
चांदनी रात की कहानी

एक छोटे से गाँव में, मंजू नाम की एक छोटी लड़की रहती थी। उसे गाँव की ज़िंदगी पसंद थी, लेकिन ज़्यादा रात में चांदनी निकलने का उसे सबसे ज़्यादा इंतज़ार रहता था। जब भी चांदनी खिलती, मंजू अपने छत पर बैठती और आसमान को निहारती रहती।

एक रात, मंजू को खूबसूरत चांदनी के साथ कुछ अलग सा लगा। ऐसा लगा जैसे चांदनी उससे बात कर रही है। उसने कहा, “मंजू, क्या तुम गाँव से बाहर की दुनिया देखना चाहती हो?”

मंजू ने तुरंत हां कह दिया। चांदनी ने उसे अपनी किरणों से ढँक लिया और उसे ऊपर उठा लिया। मंजू हवा में तैरने लगी, गाँव और उसके नीचे फैले खेतों का नज़ारा लेते हुए। उन्होंने आसमान में चमकते तारों को छुआ, गुबारती बादलों पर सवारी की और सुदूर पहाड़ों की चोटियों पर झूमते झंडों को देखा।

चांदनी ने मंजू को दुनिया के विभिन्न कोनों में दिखाया – विशाल रेगिस्तान के अंतहीन सुनहरे टीले, गहरे नीले समुद्र की लहरों का उठना-बैठना, बर्फीले पहाड़ों की चोटियों पर टहलते बादल, और जगमगाते शहरों की रातें। हर जगह कुछ नया, कुछ अद्भुत था।

लेकिन धीरे-धीरे, मंजू को उदासी होने लगी। उसने अपने छोटे से गाँव की याद आनी शुरू कर दी, अपने माता-पिता के चेहरे, उसकी सहेलियों की हँसी और उसके पालतू कुत्ते के भौंकने की आवाज़। उसे एहसास हुआ कि दुनिया देखना भले ही कितना अद्भुत हो, लेकिन अपने घर और चाहने वालों से दूर रहना अच्छा नहीं लगता।

चांदनी ने उसकी उदासी समझ ली। धीरे-धीरे, उसने मंजू को वापस उसके छत पर उतारा। मंजू ने नीचे अपने गाँव को देखा, जो अब और भी प्यारा लग रहा था। उसने चांदनी से कहा, “धन्यवाद, आपने मुझे ये खूबसूरत जगहें दिखाईं। लेकिन अब मैं अपने घर जाना चाहती हूँ।”

चांदनी मुस्कुराई और मंजू की इच्छा पूरी कर दी। वह धीरे-धीरे उसके चारों ओर अपनी किरणों को कम कर ले आई, और मंजू अपने प्यारे से छत पर सुरक्षित वापस आ गई।

उस रात, मंजू ने सोते हुए ख्वाबों में दुनिया की सैर की, लेकिन सुबह जब उसकी आँखें खुलीं, तो वह अपने ही बिस्तर में थी। उसने महसूस किया कि उसके पास पहले से ही सबसे बड़ा खजाना है – उसका प्यारा गाँव, उसका परिवार और उसके दोस्त। उसने सीखा था कि भले ही दुनिया देखना रोमांचक हो, लेकिन घर की गर्मी और चाहने वालों के पास होना असली खूबसूरती है।

उसके बाद से, मंजू रात में चांदनी को देखा करती थी, लेकिन अब सिर्फ इसलिए नहीं कि वह दूर-दूर तक ले जाए, बल्कि इसलिए कि चांदनी उसके अपने गाँव की खूबसूरती को और भी ज़्यादा बढ़ा देती थी। उसने जाना कि खुशी बड़ी-बड़ी यात्राओं में नहीं, बल्कि छोटे-छोटे पलों और अपने चाहने वालों के पास होने में मिलती है।

नैतिक शिक्षा:

  • भले ही दुनिया देखना रोमांचक हो, लेकिन अपनी जड़ों को न भूलें। घर की गर्मी और चाहने वालों के पास होना सबसे बड़ा खजाना है।
  • खुशी को बड़ी-बड़ी यात्राओं में न ढूंढें, बल्कि छोटे-छोटे पलों और अपने आस-पास को महत्व दें।

चमचम और टिमटिम की रोशनी

चमचम और टिमटिम की रोशनी
चमचम और टिमटिम की रोशनी

एक छोटे से समुद्र तट पर, चमचम नाम की एक छोटी सी सीपी रहती थी। दिन की रोशनी में, वह अपने खोल में छिपी रहती थी। लेकिन रात आते ही, जब चांदनी निकलती थी, तब वह बाहर निकलती थी और तट पर चमकती थी। चमचम की रोशनी हल्की थी, लेकिन मीठी और सुनहरी थी, एक छोटे तारे की तरह, जो लहरों के साथ नाचती थी।

एक रात, तट पर चमचम खेल रही थी, जब उसने बड़ी लहर के साथ कुछ तैरता हुआ देखा। यह टिमटिम नाम का एक छोटा सा कीड़ा था, जो किनारे पर फंस गया था। उसकी रोशनी कमजोर और फीकी थी, लगभग न के बराबर।

“मुझे बचाओ!” टिमटिम बुझते स्वर में बोला।

चमचम धीरे से उसे रेत से निकाला और चट्टान के ठंडे कोने में रखा। “तुम ठीक हो?” उसने पूछा।

टिमटिम ने सिर हिलाया। “मेरी रोशनी कमजोर हो रही है। मुझे डर है, यह कभी बुझ जाएगी।”

चमचम उसे समझाते हुए बोली, “चिंता मत करो, टिमटिम। रात अभी लंबी है। साथ में हम इतनी रोशनी फैलाएंगे कि तट भी जगमगा उठेगा!”

उस रात, चमचम और टिमटिम साथ-साथ चमकने लगे। चमचम की सुनहरी रोशनी और टिमटिम की हल्की नीली रोशनी मिलकर एक नया, जादुई चमक पैदा कर रही थी। वे साथ-साथ लहरों पर नाचे, चट्टानों पर घूमे और पूरे तट को रोशन किया।

उनकी रोशनी आकर्षित होकर छोटे-छोटे जीव उनके पास आने लगे। चमकते कीड़े, जगमगाते घोंघे, और मछलियाँ जो अपने पंखों से पानी को चमकाती थीं। हर कोई उनकी रोशनी में खेलता, गाता और एक दूसरे से बात करता था।

रात भर, चमचम और टिमटिम को एहसास हुआ कि उनकी अलग-अलग रोशनियाँ मिलकर एक खूबसूरत सफर में तब्दील हो गई थीं। उन्होंने सीखा कि छोटी-छोटी रोशनियाँ, जब साथ आती हैं, तो कुछ बहुत बड़ा और खूबसूरत बना सकती हैं।

सुबह होने तक, लहरों ने टिमटिम को वापस समुद्र में ले लिया। वह हल्के से चमक रहा था, लेकिन उसकी रोशनी में पहले से ज़्यादा ज़िंदगी थी।

“धन्यवाद, चमचम,” टिमटिम ने कहा। “तुमने मेरी रोशनी को बचाया, और साथ में हमने कुछ और भी जादुई बनाया।”

चमचम ने मुस्कुराते हुए कहा, “यह आपसी था, टिमटिम। हर रोशनी खास होती है, और जब हम अपनी रोशनी एक साथ मिलते हैं, तो हम दुनिया को ज़्यादा खूबसूरत बना सकते हैं।”

उस दिन से, चमचम कभी अकेले नहीं चमकी। वह हमेशा उन रोशनी की तलाश में रहती थी, जो मिलकर तट को ज़्यादा चमकदार बना सकें। क्योंकि उसने सीखा था कि सच्ची सुंदरता अकेले चमकने में नहीं, बल्कि साथ मिलकर रोशन करने में होती है।

नैतिक शिक्षा:

  • हर किसी की अपनी खास रोशनी होती है, कुछ बड़ी, कुछ छोटी।
  • जब हम अपनी रोशनी एक साथ लाते हैं, तो हम कुछ और भी खूबसूरत बनाते हैं।
  • साथ मिलकर हम दुनिया को ज़्यादा चमकदार बना सकते हैं।

राजा सुलेमान और गरीब किसान की बुद्धि

राजा सुलेमान और गरीब किसान की बुद्धि
राजा सुलेमान और गरीब किसान की बुद्धि

एक बार की बात है, राजा सुलेमान अपने राज्य में न्याय करने के लिए यात्रा कर रहे थे। रास्ते में, वे एक बूढ़े किसान से मिले जो ज़मीन को हल चला रहा था। राजा ने किसान से उसकी फसल के बारे में पूछा।

किसान ने जवाब दिया, “मेरे पास गेहूँ का एक छोटा सा खेत है, महामहिम। यह मुझे और मेरे परिवार का पेट भरने के लिए काफी है।”

राजा ने सोचा, “यह आदमी बहुत संतुष्ट लगता है। क्या उसकी छोटी सी ज़िंदगी में सुख का राज छिपा होगा?”

राजा ने पूछा, “बताओ, तुम इतने खुश क्यों हो? तुम्हारे पास धन-दौलत तो ज्यादा नहीं है।”

किसान ने मुस्कुराते हुए कहा, “महामहिम, खुशी बड़े महलों या सोने के ढेर में नहीं होती। यह हमारे दिल की शांति और ज़मीन से उगने वाली रोटी के स्वाद में होती है। मैं कड़ी मेहनत करता हूँ, ईमानदारी से जीता हूँ, और जो कुछ ज़रूरी है, वो मेरे पास है। इससे बढ़कर क्या खुशी हो सकती है?”

राजा सुलेमान किसान की बुद्धि से प्रभावित हुए। उन्होंने महसूस किया कि उनका सोने का महल और अनगिनत खजाने असल में सच्ची खुशी नहीं दे सकते। किसान की सरल ज़िंदगी में एक खास शांति और संतुष्टि थी, जो उनके पास नहीं थी।

उस दिन से, राजा सुलेमान ने एक नज़रिए से जीवन देखना शुरू किया। उन्होंने अपने लोगों के लिए न्याय और सुरक्षा को सबसे ज़रूरी मानना शुरू किया, और अनावश्यक ज़रूरतों के पीछे भागना कम कर दिया। उन्होंने सीखा कि वास्तविक खुशी सरलता, कड़ी मेहनत और दूसरों की भलाई में छिपी होती है।

नैतिक कहानी:

  • सच्ची खुशी धन-दौलत में नहीं, बल्कि शांति, संतुष्टि और अच्छे कर्मों में होती है।
  • कड़ी मेहनत और ईमानदारी से जीने का महत्व।
  • सरल ज़िंदगी में छिपा सौंदर्य और संतुष्टि।

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