Small moral stories in hindi

Small moral stories in hindi

Small moral stories in hindi – चींटी और टिड्डी

Small moral stories in hindi - चींटी और टिड्डी

एक बार की बात है, एक चींटी कड़ी मेहनत से काम कर रही थी। वह अपने घर के लिए भोजन इकट्ठा कर रही थी। तभी, एक टिड्डी उड़कर आई और चींटी से कहा, “तुम इतनी मेहनत क्यों करती हो? चलो, मेरे साथ खेलो।”

चींटी ने कहा, “मुझे अब खेलने का समय नहीं है। मुझे अपने घर के लिए भोजन इकट्ठा करना है।”

टिड्डी ने कहा, “तुम बेवकूफ हो! तुम हमेशा मेहनत करती रहती हो। मैं कभी मेहनत नहीं करती। मैं बस खेलती और गाती रहती हूँ।”

चींटी ने कहा, “तुम्हारा समय आएगा जब तुम भूख से मर जाओगी।”

टिड्डी ने हँसकर कहा, “मुझे भूख नहीं लगेगी। मैं हमेशा भोजन ढूंढ लूँगी।”

Small moral stories in hindi - चींटी और टिड्डी

टिड्डी ने चींटी की बात नहीं मानी और वह खेलती और गाती रही। चींटी ने मेहनत से काम करना जारी रखा।

सर्दियों का मौसम आ गया। टिड्डी को भोजन नहीं मिला। वह बहुत भूखी हो गई। वह चींटी के पास गई और उससे भोजन माँगने लगी।

चींटी ने कहा, “मैंने तुम्हें पहले ही कहा था कि तुम मेहनत नहीं करती हो। अब तुम भूख से मर जाओगी।”

टिड्डी ने बहुत पछताया। उसने चींटी से कहा, “मुझे अपनी गलती का एहसास हुआ है। अब से मैं भी मेहनत करूँगी।”

चींटी ने टिड्डी को भोजन दिया और उसे कहा, “हमेंेशा मेहनत करना चाहिए। कभी भी आलस्य नहीं करना चाहिए।”

निष्कर्ष:

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें हमेशा मेहनत करनी चाहिए। हमें कभी भी आलस्य नहीं करना चाहिए।

Small moral stories in hindi – लोमड़ी और कौवा

 Small moral stories in hindi - लोमड़ी और कौवा

एक बार की बात है, एक पेड़ पर एक कौवा बैठा था। उसके पास एक बहुत ही स्वादिष्ट टुकड़ा था। वह टुकड़े को बहुत ही प्यार से देख रहा था।

तभी, एक लोमड़ी वहाँ आई और कौवे से कहा, “तुम्हारा टुकड़ा बहुत ही स्वादिष्ट लग रहा है। मुझे भी एक टुकड़ा दो।”

कौवा ने कहा, “यह मेरा टुकड़ा है। मैं इसे तुम्हें नहीं दूँगा।”

लोमड़ी ने कहा, “तुम बहुत ही मूर्ख कौवा हो। तुम इस टुकड़े को कैसे खाओगे? तुम उड़ सकते हो। तुम आसमान में जाकर बहुत सारे टुकड़े ढूंढ सकते हो।”

 Small moral stories in hindi - लोमड़ी और कौवा

कौवा ने लोमड़ी की बात मान ली। वह टुकड़े को लेकर आसमान में उड़ गया।

लोमड़ी ने कौवे को देखते ही टुकड़े को छीन लिया और भाग गई।

कौवा बहुत दुखी हुआ। उसने कहा, “मैंने लोमड़ी की बात मान ली और अपना टुकड़ा खो दिया। अब मैं क्या करूँगा?”

कौवे को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने कहा, “हमेशा दूसरों की बात नहीं माननी चाहिए। हमें पहले सोचना चाहिए कि क्या सही है और क्या गलत है।”

निष्कर्ष:

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें हमेशा दूसरों की बात नहीं माननी चाहिए। हमें पहले सोचना चाहिए कि क्या

Small moral stories in hindi – ईमानदार लड़का

 Small moral stories in hindi - ईमानदार लड़का

एक बार की बात है, एक गाँव में एक ईमानदार लड़का रहता था। उसका नाम था राजू। राजू बहुत ही ईमानदार और मददगार था। वह हमेशा दूसरों की मदद करने के लिए तैयार रहता था।

एक दिन, राजू जंगल में घूम रहा था कि अचानक उसे एक थैली मिली। थैली में बहुत सारे पैसे थे। राजू बहुत खुश हुआ। उसने सोचा कि वह इन पैसों से अपना घर बनाएगा और अपने माता-पिता की मदद करेगा।

लेकिन राजू ने फैसला किया कि वह इन पैसों को लौटा देगा। वह जानता था कि ये पैसे किसी के होंगे। वह नहीं चाहता था कि किसी को नुकसान हो।

राजू ने थैली को लेकर गाँव के मुखिया के पास गया। उसने मुखिया को थैली दी और कहा, “मुझे यह थैली मिली है। इसमें बहुत सारे पैसे हैं। मैं नहीं जानता कि ये पैसे किसके हैं। लेकिन मैं चाहता हूँ कि ये पैसे असली मालिक को वापस मिल जाएँ।”

मुखिया ने राजू की ईमानदारी से बहुत प्रभावित हुआ। उसने राजू को धन्यवाद दिया और कहा, “तुम बहुत ही ईमानदार लड़के हो। तुमने सही काम किया है। ये पैसे एक गरीब किसान के हैं। वह इन पैसों को खोने के बाद बहुत दुखी था। अब तुमने उसकी मदद कर दी है।”

गाँव के सभी लोग राजू की ईमानदारी से बहुत खुश हुए। उन्होंने राजू को शाबाशी दी और कहा, “तुम हम सभी के लिए एक ईमानदार लड़के हो।”

राजू की ईमानदारी की वजह से गाँव के सभी लोग उसे बहुत प्यार करते थे। वह हमेशा गाँव वालों की मदद करने के लिए तैयार रहता था।

निष्कर्ष:

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें हमेशा ईमानदार रहना चाहिए। हमें कभी भी दूसरों का सामान नहीं लेना चाहिए। हमें हमेशा दूसरों की मदद करने के लिए तैयार रहना चाहिए।

Small moral stories in hindi – शेर और चूहा

 Small moral stories in hindi - शेर और चूहा

एक जंगल में एक शेर सो रहा था। एक छोटा चूहा उसके ऊपर से भाग गया, जिससे शेर की नींद खुल गई। शेर बहुत गुस्से में था और वह चूहे को खाना चाहता था। लेकिन चूहे ने उससे दया करने के लिए विनती की और कहा कि अगर वह उसे जाने देगा तो वह एक दिन उसकी मदद करेगा। शेर ने हंसकर चूहे को छोड़ दिया क्योंकि उसे विश्वास नहीं था कि इतना छोटा चूहा उसकी मदद कर सकता है।

कुछ दिन बाद, शेर एक शिकारी के जाल में फंस गया। वह बहुत जोर से चिल्लाया, लेकिन कोई उसकी मदद करने नहीं आया। तब चूहे को शेर की याद आई और वह जंगल में दौड़ता हुआ शेर के पास गया। उसने शिकारी के जाल के तार को अपने दांतों से काट दिया और शेर को आजाद कर दिया। शेर बहुत खुश हुआ और उसने चूहे से कहा कि वह उसका दोस्त है और वह उसका हमेशा आभारी रहेगा।

Small moral stories in hindi – किसान और गधा

 Small moral stories in hindi - किसान और गधा

एक किसान के पास एक गधा था। वह गधा बहुत आलसी था और वह कभी भी काम नहीं करना चाहता था। एक दिन किसान को गाँव जाना था और उसने गधे पर अपनी सारी चीजें लाद दीं। लेकिन जब वे गाँव के रास्ते पर चल रहे थे, तो गधा अचानक से रुक गया और वह फिर से चलना नहीं चाहता था। किसान ने उसे बहुत मारने की कोशिश की, लेकिन वह फिर भी नहीं चला।

तब किसान को एक विचार आया। वह गधे के पास गया और उससे बहुत मीठी बातें करने लगा। उसने गधे से कहा कि वह उसका सबसे अच्छा दोस्त है और वह उसके बिना नहीं रह सकता। गधा किसान की बातों में आ गया और वह फिर से चलने लगा। किसान बहुत खुश हुआ और उसने गधे को एक बड़ा गाजर दिया। गधा बहुत खुश हुआ और वह किसान के लिए काम करने लगा।

Small moral stories in hindi – चालाक खरगोश और शेर

 Small moral stories in hindi - चालाक खरगोश और शेर

एक जंगल में, एक शेर रहता था जो सभी जानवरों से डरता था। वह हर समय उनके द्वारा हमला किए जाने के डर में रहता था। एक दिन, एक चालाक खरगोश ने शेर को देखा और उसका मजाक उड़ाया। खरगोश ने कहा, “तुम जंगल का राजा हो, लेकिन तुम इतने डरपोक क्यों हो?”

शेर को खरगोश की बातों से गुस्सा आया, लेकिन उसने कुछ नहीं कहा। इसके बजाय, उसने खरगोश को एक चुनौती दी। शेर ने कहा, “अगर तुम मुझे दिखा सकते हो कि मैं कैसे बहादुर हो सकता हूँ, तो मैं तुम पर हमला नहीं करूँगा।”

 Small moral stories in hindi - चालाक खरगोश और शेर

खरगोश ने चुनौती स्वीकार कर ली। वह एक पेड़ पर चढ़ गया और शेर से कहा, “मुझे देखो! मैं एक पेड़ पर चढ़ सकता हूँ, लेकिन तुम नहीं कर सकते।”

शेर ने कोशिश की कि वह पेड़ पर चढ़ जाए, लेकिन वह नहीं कर सका। वह गिर गया और बहुत शर्मिंदा हुआ। खरगोश ने हँसते हुए कहा, “देखो, तुम कितने कमजोर हो! तुम्हें मुझे डरने की जरूरत नहीं है।”

शेर ने खरगोश की बातों पर विश्वास किया और उसने कभी भी खरगोश पर हमला नहीं किया।

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