Small Moral Stories In Hindi

प्यार, साझेदारी और उम्मीद की कहानी – ‘जादुई पेड़ और दोस्तों की कहानी’। Small Moral Stories In Hindi जो हमें सिखाती है कि जब सभी मिलकर मिलते हैं, तो हर कठिनाई को आसानी से पार किया जा सकता है। इस शिक्षाप्रद कहानी में बच्चों के लिए छोटे से मोरल को समझाने का प्रयास है। यह ‘Small Moral Stories In Hindi’ जो आपके बच्चों को सिखाएंगी सजीव मूल्यों के बारे में।

Small Moral Stories In Hindi – जादुई पेड़ और दोस्तों की कहानी: सबका साथ, सबका विश्वास

एक बार की बात है एक जंगल में बहुत सारे जानवर रहते थे। वो सभी एक दूसरे का खयाल रखते और एक दूसरे की मदद किया करते थे। उनमें से एक खरगोश भी था। खरगोश हमेशा की तरह अपने भोजन की तलाश में निकलता है। आज तो बहुत भूख लगी है। खूब सारे गाजर खाऊंगा। बहुत ढूंढने के बाद भी खरगोश को गाजर नहीं मिलते हैं। वो थक कर एक पेड़ के नीचे बैठ जाता है। तभी उसके पास बिल्ली आती है। अरे खरगोश क्या हुआ? इतने उदास क्यों बैठे हो? क्या बताऊं बिल्ली।

Small Moral Stories In Hindi - जादुई पेड़ और दोस्तों की कहानी: सबका साथ, सबका विश्वास

कई सालों से बारिश न होने की वजह से जंगल सूखता जा रहा है। मैं दिन भर से गाजर ढूंढ रहा हूं, लेकिन देखो जरा, धीरे धीरे सब खत्म होता जा रहा है। खरगोश ये कह ही रहा होता है कि तभी उसे हिरनी की आवाज आती है, तुम बिल्कुल सही कह रहे हो खरगोश, लेकिन इसका कोई तो उपाय होगा।

अगर हमने कुछ नहीं किया तो हम पर मुसीबत आ जायेगी। तुम लोग फिक्र मत करो, हम कोई ना कोई हल निकाल ही लेंगे। यह कहकर बिल्ली और हिरणी वहां से चले जाते हैं। अब खरगोश कुछ सोच ही रहा होता है कि तभी उसकी नजर पेड़ की शाखाओं पर पड़ती है। खरगोश देखता है कि उस पेड़ के पत्ते एक जैसे नहीं थे। खरगोश उन्हें ध्यान से देखता है और खुद से कहता है ये क्या?

ऐसा तो मैंने आज तक कभी नहीं देखा। इस पेड़ पर तो हर किस्म की पेड़ की पत्तियां हैं। भला ये कैसे मुमकिन हो सकता है। खरगोश ये सोच ही रहा होता है कि तभी उसे पेड़ में से आवाज आती है।

ये बिल्कुल मुमकिन है। खरगोश जिस ईश्वर ने ये सृष्टि बनाई। जंगल, पहाड़, हवा और पानी बनाए। उसके लिए मुझे बनाना कौन सी बड़ी बात है? अरे वाह बोलनेवाला पेड़। कहानी में नया ट्विस्ट। आइए दोस्तों, देखते हैं आगे क्या होता है। क्या तुम बोल भी सकते हो?

हां, मैं सभी बीजों से उगने वाला पेड़ सर्व बीज वृक्ष हूं। मैं अपनी शाखाओं और जड़ों में हर तरह के फल उगा सकता हूं और मैं अपने जादू से अच्छे लोगों की इच्छा को पूरी भी करता हूं। खरगोश यह सुनकर बहुत हैरानी से कहता है, तो क्या तुम गाजर भी उगा सकते हो? हां, बिल्कुल। मेरी जड़ों के पास खोदो, तुम्हें गाजर मिल जाएंगे।

खरगोश ये सुनकर बिना देर किए पेड़ के नीचे खोदने लगता है। थोड़ा सा खोदने के बाद ही उसे पेड़ की जड़ों में बहुत सारे गाजर मिलते हैं। ये देखकर खरगोश खुशी से उछल पड़ता है और पेड़ से कहता है अरे वाह! इतने सारे गाजर, थैंक यू जादुई पेड़। तुम तो बहुत अच्छे हो। ये कहकर खरगोश पेट भरकर गाजर खाता है और सारे जानवरों को जादुई पेड़ के बारे में बताता है।

जिसके बाद सारे जानवर रोज खुशी खुशी अपने पसंदीदा फल और पत्तियां खाने लगते हैं। ऐसे ही कुछ दिन बीत जाते हैं और एक दिन जादुई पेड़ बहुत दुखी होता है। तभी खरगोश उसके पास आता है और कहता है अरे जादुई पेड़, आज तुम इतने दुखी क्यों लग रहे हो? मुझे तुम सब से कुछ जरूरी बात करनी है। दोस्त जाओ और जाकर सभी जानवरों को यहां बुलाकर लाओ।

खरगोश सबको बुलाकर लाता है। जिसके बाद जादुई पेड़ उन सबसे कहता है। प्यारे दोस्तों मेरा समयकाल पूरा हो चुका है। अब मेरे जाने का समय आ गया है। मुझे तुम सबका दोस्त बनकर बहुत मजा आया। मुझे ईश्वर ने जितनी इच्छा पूरी करने का लक्ष्य दिया था अब उसे पूरा होने में सिर्फ तीन इच्छायें बाकी हैं। आप सब आपस में बात कर लो और मुझे अपनी तीन इच्छायें बताओ जिसे पूरा करने के बाद मैं यहां से चला जाऊंगा।

Small Moral Stories In Hindi - जादुई पेड़ और दोस्तों की कहानी: सबका साथ, सबका विश्वास

ये सुनकर सभी जानवर उदास हो जाते हैं क्योंकि वो सभी पेड़ से बहुत प्यार करते थे और उसे जाने नहीं देना चाहते थे इसलिए कोई भी इच्छा नहीं मांगता। जिसके बाद पेड़ उन्हें समझाते हुए कहता है।

मेरे प्यारे दोस्तों मेरा जाना निश्चित है अगर तुम ये तीन इच्छा नहीं मांगोगे तो मेरा लक्ष्य अधूरा रह जायेगा और ईश्वर के सामने मुझे शर्मिंदा होना पड़ेगा। इसलिए आप अपनी इच्छा पूरी करिए और खुशी खुशी मुझे विदाई दीजिए।

पेड़ के समझाने पर जानवर इच्छा मांगने के लिए तैयार हो जाते हैं जिसके बाद बंदर इच्छा मांगता है। मेरी ये इच्छा है कि हमारे जंगल में हर साल बारिश हो जिससे ये जंगल कभी बंजर न हो सके।

पेड़ बंदर की इच्छा पूरी कर देता है जिसके बाद लोमड़ी की बारी आती है और लोमड़ी कहती है मेरी इच्छा ये है कि शिकारी इस जंगल में कभी ना आएं जिससे हम जानवर सुरक्षित और निडर होकर रह सकें हैं। अब आखरी इच्छा बची है देखते हैं कि ये इच्छा कौन मांगेगा और इच्छा में क्या मांगेगा। चलिए बिना देरी किए देखते हैं कि आगे क्या होता है। पेड़ लोमड़ी की इच्छा पूरी कर देता है और अब खरगोश की बारी थी। खरगोश थोड़ी देर सोचता है और कहता है मुझे एक बीज चाहिए।

क्या तुम्हें सिर्फ एक बीज चाहिए? हां, मुझे सिर्फ एक बीज ही चाहिए। ठीक है। अगर तुम्हारी यही ख्वाहिश है तो कहो कौन सा बीज चाहिए तुम्हें सर्व बीज? मुझे सर्व बीज चाहिए। पेड़ खरगोश की होशियारी पर मुस्कुराते हुए कहता है। तुम बहुत होशियार हो मेरे दोस्त। इस तरह तुमने मेरा लक्ष्य भी पूरा करवा दिया और मुझे फिर से प्राप्त भी कर लिया। मैं तुम्हारी इच्छा पूरी करता हूँ।

इस तरह पेड़ खरगोश को सर्व बीज देता है और फिर एक तेज रौशनी के साथ वहाँ से गायब हो जाता है। जिसके बाद सभी जानवर मिलकर उसी जगह पर सर्व बीज को गाड़ देते हैं और रोज़ उसमें पानी देने लगते हैं। ऐसे ही कुछ समय बीत जाता है लेकिन सर्व बीज का पौधा मिट्टी से बाहर नहीं आया था जिस वजह से सारे जानवर चिंतित होकर आपस में बात करते हैं।

इतने दिन हो गए। अभी तक तो पौधा बाहर आ जाना चाहिए था। क्या हम जादुई पेड़ को वापिस नहीं ला सकेंगे? अरे नहीं मेरे प्यारे दोस्तो, क्या तुम भूल गए कि हमारे प्यारे जादुई पेड़ की पूरी की हुई इच्छा कभी खाली नहीं जाती। हमें थोड़ा धैर्य से काम लेना चाहिए और रोज़ नियमितता से पानी डालना चाहिए। आज नहीं तो कल हमारा प्यारा जादुई पेड़ हमारे सामने होगा। यह कहकर खरगोश और जानवर अपने अपने घर चले जाते हैं।

ऐसे ही दिन बीतने लगते हैं और एक दिन जंगल में बहुत बड़ा तूफान आता है जिससे सभी जानवरों के घर बर्बाद हो जाते हैं और पहाड़ की चट्टाने टूटकर जंगल की ओर लुढकने लगती हैं। सभी जानवर डर जाते हैं और इकट्ठा होकर वहां से भागने लगते हैं। तभी उनका ध्यान जादुई पेड़ के बीज पर जाता है। ओहो! क्या होगा पेड़ का? क्या वो लोग उसे बचा पाएंगे? चलिए देखते हैं।

हम उसे छोड़कर नहीं जा सकते। लेकिन हम क्या कर सकते हैं? क्या किसी ने खरगोश को देखा है? यह सुनते ही सब समझ जाते हैं कि खरगोश जादुई बीज के पास गया है। सभी उस ओर भागने लगते हैं और जैसे ही वह खरगोश के पास पहुँचते हैं तो देखते हैं कि एक बड़ी चट्टान उनकी ओर तेजी से आ रही है।

जैसे ही वह उन पर गिरने वाली होती है तभी अचानक सब एकदम से थम जाता है और चट्टान भी जहाँ थी वहीं हवा में रुक जाती है। सारे जानवर डर से बंद अपनी आखों को जब खोलते हैं तो देखते हैं कि तूफान रुक चुका है और खरगोश अपनी कमर पर हाथ रखे सिर्फ बीट की तरफ देख रहा है।

जैसे ही वो लोग वहां देखते हैं तो खुशी से उछल पड़ते हैं। उनके जादुई पेड़ का नन्ना पौधा अब जमीन से बाहर आ चुका है। खरगोश उसके पास जाता है और कहता है मुझे पूरा यकीन था कि तुम जरूर आओगे। मेरे प्यारे दोस्त, जादुई पेड़ हमने तुम्हें बहुत मिस किया। इस तरह से जंगल में जादुई पेड़ वापस आ जाता है और सभी झूमने गाने लगते हैं।

इस Small Moral Stories In Hindi से हमें ये सीख मिलती है कि हमें एक होकर रहना चाहिए और सबका भला करने की सोच रखनी चाहिए। और हाँ सबसे ज़रूरी बात हमें उम्मीद कभी नहीं छोड़नी चाहिए चाहे कैसी भी परिस्थिति हो।

निष्कर्ष

इस Small Moral Stories In Hindi से हमें यह सिखने को मिलता है कि साझेदारी, ईमानदारी, और सबका साथ रखना हमें जीवन में सफलता की ऊँचाइयों तक पहुँचा सकता है। ‘Small Moral Stories In Hindi – जादुई पेड़ और दोस्तों की कहानी: सबका साथ, सबका विश्वास’ ने हमें यह बताया है कि जब हम मिलकर काम करते हैं और एक दूसरे का समर्थन करते हैं, तो हम किसी भी मुश्किल को पार कर सकते हैं।

इस Small Moral Stories In Hindi से हमें यह सीखने को मिलता है कि छोटी सी कोशिश से ही हम अपने लक्ष्यों को हासिल कर सकते हैं और आगे बढ़ सकते हैं। इसलिए, Small Moral Stories In Hindi ने हमें एक सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान किया है और बच्चों को सजीव मूल्यों का महत्व सिखाने में सहायक हो सकती है।

Small Moral Stories In Hindi – शरारती गिलहरी: चुनचुन और उसकी सीख

“Small Moral Stories In Hindi – शरारती गिलहरी: चुनचुन और उसकी सीख’। जंगल में घटित इस किस्से में, चुनचुन गिलहरी ने सीखी जिम्मेदारी का मतलब। आओ पढ़ें और ‘Small Moral Stories In Hindi’ के माध्यम से इस छोटे से सीख से रूबरू हों।”

एक जंगल में चुनचुन नाम की शरारती गिलहरी अपनी मां किट्टू के साथ रहती थी। चुनचुन कभी भी किट्टू की बात नहीं मानती थी। चुनचुन की हरकतों से जंगल के सभी जानवर बहुत परेशान रहते थे। एक दिन चुनचुन पेड़ पर खेल रही थी और उसी पेड़ पर फर्राटा नाम का एक बंदर भी सो रहा था। फर्राटा को देख चुनचुन ने अपनी मां से कहा, मां, ये बंदर हमारे पेड़ पर क्यों सो रहा है? ये पेड़ तुम्हारा कब से हो गया चुनचुन? सोने दो से। लेकिन मां जंगल में और भी तो पेड़ हैं। इससे कहो किसी दूसरे पेड़ पर जाकर सोए चुनचुन। 

Small Moral Stories In Hindi - शरारती गिलहरी: चुनचुन और उसकी सीख

जैसे ये जंगल सबका है, वैसे ही यह पेड़ भी सबका है। इसीलिए तुम इस पेड़ से उसे नहीं हटा सकती। किट्टू यह बोलकर चली गई। लेकिन चुनचुन को एक शरारत सूझी। वह बंदर के पास पहुँची। उसने बंदर की पूँछ को पेड़ की टहनी से बांध दिया। उसके थोड़ी ही देर बाद जब फर्राटा बंदर सोकर उठा तो उसने दूसरी टहनी पर छलांग लगाने की कोशिश की, लेकिन उसकी पूँछ बंधी होने के कारण वह दूसरी टहनी तक नहीं पहुँच सका और वहीं पेड़ से उल्टा लटक कर चिल्लाने लगा बचाओ बचाओ। मैं यहाँ पेड़ पर उल्टा लटक गया हूँ। बचाओ।

फर्राटा की चिल्लाने की आवाज सुनकर सभी जानवर वहाँ आ गए और तभी वहां मौजूद जंगल का राजा शेर सिंह बोला अरे फर्राटा! तुम इतना चिल्ला क्यों रहे हो? किसी ने मेरी पूँछ टहनी से बाँध दी है, लेकिन तुम्हारी पूंछ टहनी से कौन बांधेगा? किसी को क्या मिलेगा? ऐसा करके यह काम उस शरारती चुनचुन ने किया होगा। वही जंगल के सभी जानवरों को परेशान करती है।

ये बातें किट्टू और चुनचुन पेड़ के ऊपर बैठकर सुन रही थी। इतने में चुनचुन बोली, हाँ, मैंने ही बंदर की पूँछ पेड़ से बांध दी है। लेकिन तुमने ये सब क्यों किया? बंदर ने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है? जंगल में इतने सारे पेड़ हैं तो ये बंदर इस पेड़ पर क्यों सोया? ये हमारा पेड़ है। यह सुनकर सभी जानवर हैरान रह गए। तभी हिरण बोला। चंचल, एक बात कान खोलकर सुन लो। यह जंगल सबका है, इसलिए यहाँ के पेड़ों पर भी सबका अधिकार है।

चुनचुन! अगर अब तुमने जंगल में किसी जानवर को तंग करने की कोशिश की तो मैं तुम्हें इस जंगल से निकाल दूँगा। यह सुनकर किट्टू जल्दी से बोल पड़ी, नहीं नहीं महाराज, चुनचुना भी छोटी है, उसको माफ कर दीजिए। आज के बाद ऐसी शरारत कभी भी नहीं करेगी। मैं अभी फर्राटा की पूंछ खोल देती हूँ। यह कहकर किट्टू फर्राटा बंदर की पूँछ पेड़ की टहनी से खोलने लगी और तभी फर्राटा बंदर पेड़ से गिर गया। इतने में शेरसिंह बोला। किट्टू किट्टू समझा देना अपनी बेटी को। यह उसके लिए आखिरी चेतावनी है।

यह बोलकर शेर सिंह और जंगल के बाकी जानवर वहाँ से चले गए और किट्टू ने चुनचुन से कहा चुनचुन! तुम ये शरारतें करना कब छोड़ोगे? तुम्हारी ये नासमझी किसी दिन तुम्हारे लिए मुसीबत बन जाएगी। समझी? किट्टू की बात का चुनचुन पर कोई असर नहीं हुआ। ऐसे ही कुछ दिन बीत गए कि तभी किट्टू को किसी काम से जंगल से बाहर जाना पड़ गया और उसने चुनचुन से कहा, चुनचुन, मैं एक जरूरी काम से जंगल के बाहर जा रही हूं, लेकिन तुम यहां किसी को परेशान मत करना और जंगल से कहीं दूर मत जाना।

Small Moral Stories In Hindi - शरारती गिलहरी: चुनचुन और उसकी सीख

ठीक है मां, आप चिंता मत करो, मैं किसी को परेशान नहीं करूंगी। लेकिन चुनचुन की बात पर किट्टू को विश्वास नहीं था। इसीलिए उसने अपने पड़ोस में रहने वाले कालू कौवे से कहा। कालू भाई मैं जंगल से बाहर जा रही हूं। एक दो दिन में वापस आ जाऊंगी। क्या तुम चुनचुन का खयाल रखोगे?

ठीक है किट्टू, लेकिन जल्दी आने की कोशिश करना। तुम्हारी बेटी को ज्यादा दिन तक संभालना मेरे बस की बात नहीं है क्या?

कालू भाई, चिंता मत करो। मैं जल्दी आने की कोशिश करूंगी। यह बोलकर किट्टू चली गई और चुनचुन वहीं जंगल में रहने लगी। एक दिन चुनचुन पेड़ पर अकेली बैठी सोच रही थी। मां को गए हुए इतने दिन हो गए। क्यों न मैं भी जंगल से बाहर जाकर मां से मिलूं।

मां मुझे देखकर कितना खुश होंगी? यह सोचते हुए वह पेड़ से उतरने लगी ताकि वह जंगल से बाहर जा सके। लेकिन पेड़ से उतरते हुए उसे कालू ने देख लिया और वह बोला। चुनचुन, तुम कहां जा रही हो? पेड़ से नीचे उतर रही हो। कहीं नहीं कालू अंकल, मैं तो बस पानी पीने जा रही थी। पानी पीकर जल्दी आ जाऊंगी। ठीक है जाओ लेकिन जल्दी आ जाना।

रात होने वाली है। कालू की बात सुनकर चुनचुन वहां से चली जाती है और वह जंगल से बाहर जाने की कोशिश में रास्ता भूल जाती है। अब उसे दूर दूर तक कोई नहीं दिखाई देता, जिससे वह रास्ता पूछ सके। उधर, किट्टू जब पेड़ पर वापस आई तो उसे चुनचुन कहीं नहीं दिखाई दी। उसने कालू से पूछा, कालू भाई, कालू भाई। चुनचुन कहां है? उसने थोड़ी देर पहले मुझसे कहा था कि वह पानी पीने जा रही है। उसके बाद वह अभी तक नहीं लौटी।

कहीं वह किसी मुसीबत में फंस जाए। हमें जाकर उसकी मदद करनी चाहिए और और रात भी होने वाली है। हमें अभी जाकर जंगल के सभी जानवरों को बताना चाहिए। यह कहकर किट्टू और कालू ने जंगल के सभी जानवरों को सारी बात बता दी। सभी चुनचुन को इधर उधर ढूंढने लगे, लेकिन वह कहीं नहीं मिली। तभी कालू को आसमान में एक बाज उड़ता हुआ दिखाई दिया।

तभी कालू ने कहा, वाह, देखो आसमान में बाज उड़ रहा है। इस समय यह बाज आसमान में क्या कर रहा है? लगता है वह अपना भोजन ढूंढ रहा है। हिरन की बात सुनकर किट्टू घबरा गई और बोली कहीं ऐसा तो नहीं? उस बाज की नजर मेरी किट्टू पर पड़ गई हो। तुम चिंता मत करो। मैं अभी अपने दोस्त मिट्ठू तोते। के साथ जाता हूं और पता करता हूं। यह कहकर कालू मिट्ठू के साथ बाज का पीछा करने चला गया। उसने देखा कि बाज चुनचुन के ऊपर मंडरा रहा था। यह देखकर कालू समझ गया कि उस बाज का शिकार चुनचुन ही थी।

उसने सारी बात जंगल के जानवरों को बता दी और वापस चुनचुन की मदद करने मिटठू तोते के साथ चला गया। अब बाज ने मौका पाकर चुनचुन को अपने पंजों में दबा लिया। यह देखकर कालू बोला। मीटर चलते बाज के पास चलो। मैं ही तो वह चुनचुन को खा जाएगा। यह सुनकर मिट्ठू और कालू आसमान में बाज से लड़ने लगी। वह दोनों बाज पर अपनी चोंच से लगातार वार करने लगे।

इसी दौरान चुनचुन बाज के चंगुल से छूट गई। चुनचुन को नीचे गिरता देख जानवरों ने पट्टियों और घास से बना हुआ जाल नीचे बिछा दिया। चुनचुन उस नरम जाल पर आ गिरी। चुन चुन बेटा तुम ठीक तो होना। हां मां, मैं बिल्कुल ठीक हूं। चुनचुन हम तुम्हें इसलिए समझाते थे कि शरारत मत किया करो। देखा, तुम कितनी बड़ी मुसीबत में फंस गई। यह सुनकर चुनचुन अपनी मां से बोली, मुझे माफ कर दो मां। मैंने कभी आपकी बात नहीं सुनी। अब से मैं कोई शरारत नहीं करूंगी।

निष्कर्ष

इस “Small Moral Stories In Hindi – शरारती गिलहरी: चुनचुन और उसकी सीख” में हमने देखा कि शरारत का परिणाम हमेशा अच्छा नहीं होता है। चुनचुन गिलहरी की बेहद मनोहर कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि साहस और जिम्मेदारी का मतलब सिर्फ़ अपने हिस्से की ज़िम्मेदारी नहीं होता, बल्कि हमें अपने साथीयों की भी देखभाल करनी चाहिए।

चुनचुन ने अपनी शरारत के परिणामस्वरूप सभी को परेशानी में डाल दिया, लेकिन अचानक उसने भी एक बड़ा सबक सीखा और दिखाया कि शिक्षाप्रद कहानियों के माध्यम से हम सभी अपने जीवन में सुधार कर सकते हैं। इस कहानी (Small Moral Stories In Hindi – शरारती गिलहरी: चुनचुन और उसकी सीख) से हमें यह सिखने को मिलता है कि हर काम को सही समय पर और सही तरीके से करना चाहिए, ताकि हमारी शरारतें हमें बड़ी मुसीबत में न डालें। इस प्रकार, शिक्षाप्रद और हास्यपूर्ण तत्वों से भरी इस कहानी से हमें जीवन के मौलिक सिद्धांतों को समझाने का अद्वितीय अवसर मिलता है।

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