Small Moral Stories In Hindi

Small moral stories in hindi

Small moral stories in hindi – दयालु राजा और उसका बगीचा

Small moral stories in hindi - दयालु राजा और उसका बगीचा

एक बार की बात है, एक दयालु और न्यायप्रिय राजा था जो अपने प्रजा के सुख-दुख में सदैव उनके साथ खड़ा रहता था। राजा के महल के पीछे एक सुंदर बगीचा था, जिसमें तरह-तरह के फूल, फल और सब्जियाँ उगती थीं। यह बगीचा राजा का सबसे प्रिय स्थान था, जहाँ वह अक्सर घूमने और प्रकृति की सुंदरता का आनंद लेने के लिए जाता था।

एक दिन, राजा बगीचे में घूम रहा था तभी उसने देखा कि एक बागवान बगीचे के पेड़ों को बहुत जोर से काट रहा है। राजा ने बागवान से पूछा कि वह ऐसा क्यों कर रहा है, तो बागवान ने जवाब दिया कि उसे राजा के लिए सबसे बड़े और सुंदर सेब लाने हैं।

राजा ने बागवान को समझाया कि उसे ऐसे बड़े सेबों की कोई जरूरत नहीं है, बल्कि वह चाहता है कि बगीचे में सभी पेड़-पौधे स्वस्थ और खुशहाल रहें। बागवान राजा की बातों को समझ गया और उसने पेड़ों को काटना बंद कर दिया।

राजा की दयालुता का पता जब प्रजा को चला तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने राजा को और भी अधिक प्यार करने लगे और वे सभी सुख-दुख में राजा के साथ खड़े रहने लगे।

राजा के बगीचे में एक बुजुर्ग पेड़ था जो बहुत पुराना और बीमार था। बागवान ने उस पेड़ को काटने की सलाह दी, लेकिन राजा ने उसे ऐसा करने से मना कर दिया। राजा ने कहा कि वह उस पेड़ को काट नहीं सकता क्योंकि वह उसके लिए बहुत कीमती है।

राजा ने उस पेड़ की देखभाल करने के लिए एक विशेष बागवान को नियुक्त किया। नए बागवान ने पेड़ की अच्छी देखभाल की और जल्द ही पेड़ स्वस्थ हो गया। राजा बहुत खुश हुआ और उसने नए बागवान को इनाम दिया।

एक दिन, राजा बगीचे में घूम रहा था तभी उसने देखा कि बुजुर्ग पेड़ पर एक सुंदर फूल खिला है। राजा ने उस फूल को तोड़ा और उसे अपने महल ले गया। राजा ने उस फूल को अपने कमरे में एक फूलदान में रखा और रोजाना उसकी देखभाल करता था।

एक दिन, राजा के पास एक मेहमान आया। मेहमान ने उस फूल को देखा और उससे पूछा कि यह फूल इतना सुंदर कैसे है। राजा ने मेहमान को बुजुर्ग पेड़ की कहानी सुनाई। मेहमान राजा की दयालुता और बुजुर्ग पेड़ के प्रति उसके प्यार से बहुत प्रभावित हुआ।

राजा की दयालुता और बुद्धिमत्ता की कहानियाँ दूर-दूर तक फैल गईं। लोग राजा को एक आदर्श राजा के रूप में मानने लगे। राजा ने अपनी दयालुता और न्यायप्रियता से अपने राज्य को एक खुशहाल और समृद्ध राज्य बना दिया।

कहानी का नैतिक

  • दयालुता और न्यायप्रियता एक राजा के सबसे महत्वपूर्ण गुण हैं।
  • प्रकृति की सुंदरता का सम्मान करना चाहिए।
  • बुजुर्गों और कमजोर लोगों की देखभाल करनी चाहिए।

अतिरिक्त जानकारी

  • इस कहानी में, राजा दयालु और न्यायप्रिय होने के साथ-साथ बुद्धिमान भी है। वह बागवान को समझाता है कि बगीचे के सभी पेड़-पौधे महत्वपूर्ण हैं, भले ही वे बड़े और सुंदर न हों। वह बुजुर्ग पेड़ की देखभाल करने के लिए एक विशेष बागवान को नियुक्त करता है और जब पेड़ स्वस्थ हो जाता है तो उसे इनाम देता है।
  • इस कहानी से हमें यह भी सीख मिलती है कि प्रकृति की सुंदरता का सम्मान करना चाहिए। राजा बुजुर्ग पेड़ को काटने से मना कर देता है क्योंकि वह उसके लिए बहुत कीमती है।
  • अंत में, यह कहानी हमें यह भी सिखाती है कि बुजुर्गों और कमजोर लोगों की देखभाल करनी चाहिए। राजा बुजुर्ग पेड़ की देखभाल करता है और उसे फूल खिलाता है।

Small moral stories in hindi – मेहनती चींटी और आलसी टिड्डी

Small moral stories in hindi - मेहनती चींटी और आलसी टिड्डी

एक बार की बात है, एक घने जंगल में एक मेहनती चींटी और एक आलसी टिड्डी रहती थीं। चींटी हमेशा काम में व्यस्त रहती थी और वह सर्दियों के लिए अनाज जमा करती थी। जबकि टिड्डी दिन भर घूमती-फिरती और गाना गाती रहती थी।

एक दिन, टिड्डी ने चींटी से कहा, “तुम इतना क्यों काम करती हो? सर्दियों के लिए अनाज जमा करने की क्या जरूरत है? हम तो अभी भी गर्मियों का आनंद ले सकते हैं।”

चींटी ने जवाब दिया, “मैं जानती हूँ कि गर्मियों में मौसम अच्छा है, लेकिन सर्दियों में मौसम बहुत ठंडा हो जाता है। अगर हम उस समय अनाज जमा नहीं करेंगे, तो हमें भूखा रहना पड़ेगा।”

टिड्डी ने चींटी की बात नहीं सुनी और वह दिन भर गाना गाती और नाचती रही। जब सर्दी आई तो टिड्डी को बहुत भूख लगी। वह चींटी से मदद मांगने लगी।

चींटी ने टिड्डी को बताया कि उसने पहले से ही सर्दियों के लिए अनाज जमा कर लिया है। टिड्डी ने चींटी से अनाज मांगा, लेकिन चींटी ने उसे मना कर दिया।

चींटी ने टिड्डी को समझाया कि अगर वह आलसी नहीं होती और मेहनत करती तो उसे सर्दियों में भूखा नहीं रहना पड़ता। टिड्डी ने चींटी की बात मानी और उसने अगली गर्मियों से मेहनत करना शुरू कर दिया।

कहानी का नैतिक

  • मेहनत का फल हमेशा मीठा होता है।
  • आलस्य का फल हमेशा कड़वा होता है।
  • आने वाली मुश्किलों के लिए तैयार रहना चाहिए।

अतिरिक्त जानकारी

  • इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि मेहनत करना हमेशा फायदेमंद होता है। जो लोग मेहनत करते हैं, वे हमेशा सफल होते हैं।
  • आलस्य एक बुरी आदत है। इससे हमें नुकसान होता है।
  • हमें हमेशा आने वाली मुश्किलों के लिए तैयार रहना चाहिए।

Small moral stories in hindi – चालाक लोमड़ी और बुद्धिमान बंदर

Small moral stories in hindi - चालाक लोमड़ी और बुद्धिमान बंदर

एक बार की बात है, एक जंगल में एक चालाक लोमड़ी और एक बुद्धिमान बंदर रहते थे। लोमड़ी हमेशा बंदर को धोखा देने की कोशिश करती थी, लेकिन बंदर हमेशा उसकी चालों से बच जाता था।

एक दिन, लोमड़ी ने बंदर को एक पेड़ पर खड़े देखा। उसने सोचा कि यह एक अच्छा मौका है बंदर को धोखा देने का। उसने बंदर से कहा, “हे बंदर, क्या तुम जानते हो कि मैं एक जादूगर हूँ? मैं तुम्हें एक जादू दिखा सकता हूँ।”

बंदर को लोमड़ी का जादू देखने में दिलचस्पी थी। उसने कहा, “ठीक है, मैं तुम्हारा जादू देखना चाहूँगा।”

लोमड़ी ने एक पत्थर उठाया और उसे हवा में फेंका। पत्थर हवा में उड़ता रहा और फिर अचानक गायब हो गया। बंदर को यह बहुत आश्चर्यचकित कर गया। उसने कहा, “वाह, यह तो बहुत ही कमाल का जादू है। तुमने यह कैसे किया?”

लोमड़ी ने कहा, “यह एक बहुत ही सरल जादू है। तुम भी इसे सीख सकते हो।”

Small moral stories in hindi - चालाक लोमड़ी और बुद्धिमान बंदर

लोमड़ी ने बंदर को जादू सिखाने का नाटक किया। उसने बंदर को बताया कि उसे एक पत्थर उठाना है और उसे हवा में फेंकना है। फिर उसे अपने हाथों को बंद करना है और धीरे-धीरे खोलना है।

बंदर ने लोमड़ी की बातों को ध्यान से सुना और उसने जादू करने की कोशिश की। उसने एक पत्थर उठाया और उसे हवा में फेंका। फिर उसने अपने हाथों को बंद किया और धीरे-धीरे खोला।

लेकिन जादू नहीं हुआ। पत्थर हवा में उड़ता रहा और फिर जमीन पर गिर गया। बंदर को बहुत निराशा हुई। उसने लोमड़ी से कहा, “तुम्हारा जादू काम नहीं कर रहा है।”

लोमड़ी ने कहा, “यह तुम्हारी गलती है। तुमने जादू को सही तरीके से नहीं किया।”

लोमड़ी ने बंदर को फिर से जादू सिखाने की कोशिश की, लेकिन इस बार भी जादू नहीं हुआ। बंदर को अब समझ में आ गया कि लोमड़ी उसे धोखा दे रही है। उसने लोमड़ी से कहा, “मैं तुम्हारी चालों से वाकिफ हूँ। तुम मुझे धोखा नहीं दे सकते।”

लोमड़ी को बंदर की बातों से बहुत गुस्सा आया। उसने बंदर पर हमला करने की कोशिश की, लेकिन बंदर ने उसे चकमा दिया और पेड़ से नीचे उतर गया।

लोमड़ी बंदर को पकड़ने के लिए पीछे दौड़ी, लेकिन बंदर जंगल में भाग गया। लोमड़ी को बंदर पर बहुत गुस्सा आया, लेकिन वह उसे पकड़ नहीं पाई।

कहानी का नैतिक

  • बुद्धिमान लोग हमेशा चालाक लोगों से बच जाते हैं।
  • हमेशा दूसरों की चालों से सावधान रहना चाहिए।

अतिरिक्त जानकारी

  • इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि बुद्धिमान लोग हमेशा चालाक लोगों से बच जाते हैं। जो लोग बुद्धिमान होते हैं, वे हमेशा दूसरों की चालों को समझ लेते हैं और उनसे बच जाते हैं।
  • हमें हमेशा दूसरों की चालों से सावधान रहना चाहिए। हमें दूसरों के झांसे में नहीं आना चाहिए।

Small moral stories in hindi – ईमानदार राजा और चालाक व्यापारी

Small moral stories in hindi - ईमानदार राजा और चालाक व्यापारी

एक बार की बात है, एक ईमानदार राजा था जो अपने राज्य में न्याय और सच्चाई को सर्वोच्च मानता था। एक दिन, एक चालाक व्यापारी राजा के दरबार में आया और उसने राजा से कहा कि वह उसके राज्य में व्यापार करना चाहता है।

राजा ने व्यापारी का स्वागत किया और उसे अनुमति दे दी कि वह अपने राज्य में व्यापार करे। व्यापारी ने राजा को बताया कि वह बहुत ही ईमानदार है और वह हमेशा अपने ग्राहकों के साथ ईमानदारी से व्यवहार करता है।

राजा व्यापारी की बातों पर भरोसा कर लिया और उसने उससे खूब सारा सोना और हीरे खरीद लिए। व्यापारी ने राजा को बताया कि वह बाद में पैसे दे देगा।

कुछ दिन बाद, व्यापारी ने राजा के पास एक पत्र भेजा और उसने कहा कि वह राजा को पैसे नहीं दे सकता क्योंकि उसके जहाज पर लुटेरों ने हमला कर दिया है और सारा सोना और हीरे छीन ले गए हैं।

राजा को व्यापारी की बात पर यकीन नहीं हुआ। उसने सोचा कि व्यापारी उससे धोखा कर रहा है। उसने अपने सैनिकों को व्यापारी को ढूंढने के लिए भेजा।

राजा के सैनिकों ने व्यापारी को ढूंढ लिया और उसे राजा के पास ले आए। राजा ने व्यापारी से पूछा कि उसने उससे क्यों धोखा किया।

Small moral stories in hindi - ईमानदार राजा और चालाक व्यापारी

व्यापारी ने कहा कि उसने राजा से कोई धोखा नहीं किया है। उसने कहा कि उसके जहाज पर लुटेरों ने हमला कर दिया है और सारा सोना और हीरे छीन ले गए हैं।

राजा व्यापारी की बातों पर विश्वास नहीं कर रहा था। उसने व्यापारी को जेल में डाल दिया।

व्यापारी जेल में बहुत दुखी था। वह सोच रहा था कि वह राजा को कैसे सच्चाई बताए।

एक दिन, व्यापारी के मित्र ने उसे एक विचार दिया। उसने कहा कि वह जेल के दरवाजे पर एक नोटिस लिख दे कि वह उस व्यक्ति से संपर्क करना चाहता है जो उसके जहाज पर लुटेरों से लूटे गए सोने और हीरे को वापस ला सकता है।

व्यापारी ने अपने मित्र की बात पर ध्यान दिया और उसने जेल के दरवाजे पर एक नोटिस लिख दिया।

कुछ दिन बाद, एक आदमी जेल में आया और उसने कहा कि वह व्यापारी से संपर्क करना चाहता है। उसने कहा कि वह जानता है कि व्यापारी के जहाज पर लुटेरों से लूटे गए सोने और हीरे कहाँ हैं।

व्यापारी ने आदमी की बातों पर विश्वास किया और उसने उसे सोने और हीरे के बारे में बताया। आदमी ने व्यापारी को बताया कि सोना और हीरे एक गुफा में छिपाए हुए हैं।

व्यापारी ने आदमी की मदद से सोना और हीरे को ढूंढ लिया। वह बहुत खुश था कि उसने अपना खोया हुआ धन वापस पा लिया है।

व्यापारी ने सोना और हीरे लेकर राजा के पास गया और उसने उसे सारी सच्चाई बता दी। राजा को व्यापारी की ईमानदारी से बहुत खुशी हुई। उसने व्यापारी को अपना सारा धन वापस कर दिया और उसने उसे एक बड़ा इनाम भी दिया।

कहानी का नैतिक

  • ईमानदारी हमेशा फायदेमंद होती है।
  • झूठ का पैर कभी नहीं टिकता है।
  • मेहनत का फल हमेशा मीठा होता है।

अतिरिक्त जानकारी

  • इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि ईमानदारी हमेशा फायदेमंद होती है। जो लोग ईमानदार होते हैं, वे हमेशा सफल होते हैं।
  • झूठ का पैर कभी नहीं टिकता है। जो लोग झूठ बोलते हैं, वे हमेशा पकड़े जाते हैं और उन्हें सजा मिलती है।
  • मेहनत का फल हमेशा मीठा होता है। जो लोग मेहनत करते हैं, वे हमेशा सफल होते हैं।

Small moral stories in hindi – दयालु हाथी और स्वार्थी गीदड़

Small moral stories in hindi - दयालु हाथी और स्वार्थी गीदड़

एक बार की बात है, एक जंगल में एक दयालु हाथी रहता था। वह हमेशा दूसरों की मदद करने के लिए तैयार रहता था। एक दिन, हाथी जंगल में घूम रहा था कि उसे एक गीदड़ रोता हुआ मिला। हाथी ने गीदड़ से पूछा कि वह क्यों रो रहा है।

गीदड़ ने बताया कि उसका पैर टूट गया है और वह चल नहीं पा रहा है। हाथी ने गीदड़ की मदद करने का फैसला किया। उसने गीदड़ को अपने सूंड में उठाया और उसे अपने घर ले गया।

हाथी ने गीदड़ के पैर की अच्छी तरह से मरहम पट्टी की और उसे आराम करने के लिए कहा। गीदड़ को हाथी की मदद से बहुत अच्छा लगा। वह हाथी का आभारी था।

कुछ दिनों बाद, गीदड़ का पैर ठीक हो गया। वह हाथी के घर से जाने के लिए तैयार था। हाथी ने गीदड़ से कहा, “तुम अब जा सकते हो, लेकिन मैं तुम्हें कुछ सलाह देना चाहता हूं।”

गीदड़ ने कहा, “ज़रूर, मुझे आपकी सलाह सुनने में बहुत खुशी होगी।”

Small moral stories in hindi - दयालु हाथी और स्वार्थी गीदड़

हाथी ने कहा, “तुम एक स्वार्थी जानवर हो। तुम हमेशा दूसरों की मदद करने के लिए तैयार नहीं रहते हो। तुम्हें दूसरों की मदद करना सीखना चाहिए।”

गीदड़ ने कहा, “मैं समझ गया। मैं आगे से दूसरों की मदद करने की कोशिश करूंगा।”

गीदड़ ने हाथी की सलाह मानी और वह एक दयालु जानवर बन गया। वह हमेशा दूसरों की मदद करने के लिए तैयार रहता था।

कहानी का नैतिक

  • दूसरों की मदद करना हमेशा अच्छा होता है।
  • स्वार्थी होना कभी अच्छा नहीं होता है।
  • दूसरों की मदद करने से हम खुश होते हैं।

अतिरिक्त जानकारी

  • इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि दूसरों की मदद करना हमेशा अच्छा होता है। जो लोग दूसरों की मदद करते हैं, वे हमेशा खुश होते हैं।
  • स्वार्थी होना कभी अच्छा नहीं होता है। जो लोग स्वार्थी होते हैं, वे हमेशा अकेले रहते हैं।
  • दूसरों की मदद करने से हम एक बेहतर इंसान बनते हैं।

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