Short stories for kids in hindi

Short stories for kids in hindi

Short stories for kids in hindi – छोटी चिड़िया और बड़ा हाथी

Short stories for kids in hindi - छोटी चिड़िया और बड़ा हाथी

एक बार की बात है, घने जंगल के बीच में एक छोटी चिड़िया रहती थी। वह बहुत ही चंचल और खुशमिजाज थी। छोटी चिड़िया दिन भर पेड़ों पर उछल-कूद करती और गाना गाती। एक दिन, छोटी चिड़िया जंगल में घूमते-घूमते एक बड़े हाथी से मिल गई।

हाथी बहुत ही बड़ा और शक्तिशाली था। वह जंगल में सबका राजा माना जाता था। छोटी चिड़िया हाथी को देख कर बहुत डर गई। वह सोचने लगी कि इतना बड़ा हाथी उसे पकड़कर खा जाएगा। लेकिन हाथी ने छोटी चिड़िया को देखकर मुस्कुरा दिया और कहा, “मत डरो, छोटी चिड़िया। मैं तुम्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचाऊँगा।”

छोटी चिड़िया हाथी की बात सुनकर थोड़ी-सी रिलैक्स हुई। उसने हाथी से कहा, “लेकिन आप इतने बड़े हैं और मैं इतनी छोटी हूँ। आप मुझे खा सकते हैं।”

हाथी ने कहा, “तुम्हें चिंता करने की ज़रूरत नहीं है। मैं छोटे-छोटे जीवों को नहीं खाता हूँ। मैं सिर्फ पेड़ों के पत्ते और फल खाता हूँ।”

छोटी चिड़िया हाथी की बात सुनकर बहुत खुश हुई। वह हाथी के सिर पर बैठ गई और कहने लगी, “आप बहुत अच्छे हैं। आप इतने बड़े हैं, लेकिन आप छोटे-छोटे जीवों का ख्याल रखते हैं।”

हाथी ने कहा, “यह तो मेरा फर्ज है। मैं चाहता हूँ कि जंगल में सभी जीव खुश रहें।”

छोटी चिड़िया और हाथी दोनों बहुत अच्छे दोस्त बन गए। वे हर दिन साथ में जंगल में घूमते थे। छोटी चिड़िया हाथी के सिर पर बैठकर उसे जंगल की खबरें सुनाती थी। हाथी छोटी चिड़िया को पेड़ों के ऊपर से जंगल का नज़ारा दिखाता था।

एक दिन, जंगल में एक शिकारी आ गया। शिकारी ने हाथी को देख लिया और उसे मारने के लिए बंदूक निकाल ली। छोटी चिड़िया यह देखकर बहुत घबरा गई। वह जल्दी से उड़कर शिकारी के पास गई और जोर-जोर से उसके चेहरे पर चोंच मारने लगी। शिकारी को बहुत दर्द हुआ और वह अपना ध्यान हाथी से हटाकर छोटी चिड़िया को भगाने लगा। इस बीच, हाथी मौका पाकर जंगल में भाग गया।

शिकारी छोटी चिड़िया को पकड़ने की कोशिश करता रहा, लेकिन छोटी चिड़िया बहुत तेज़ी से उड़ रही थी। आखिर में, शिकारी हार मानकर जंगल से निकल गया।

हाथी छोटी चिड़िया का बहुत शुक्रगुज़ार था। उसने कहा, “छोटी चिड़िया, तुमने मेरी जान बचा ली। मैं तुम्हारा बहुत आभारी हूँ।”

छोटी चिड़िया ने कहा, “तुम मेरे दोस्त हो। मैं तुम्हारी मदद करना अपना फर्ज़ समझती हूँ।”

Short stories for kids in hindi – जादुई पेड़

Short stories for kids in hindi - जादुई पेड़

एक बार की बात है, एक छोटे से गांव में एक जादुई पेड़ था। यह पेड़ बहुत बड़ा और पुराना था। इसके पत्ते चमकते थे जैसे तारे। पेड़ के बारे में कहा जाता था कि इसमें जादुई शक्तियां थीं। लोग मानते थे कि यह पेड़ उनकी सारी मुश्किलें हल कर सकता है।

गांव में एक गरीब किसान रहता था। उसके पास बहुत कम ज़मीन थी और वह बहुत गरीब था। किसान की एक छोटी बेटी थी। वह बहुत ही खुशमिजाज और मेहनती थी।

एक दिन, किसान की बेटी जादुई पेड़ के पास खेल रही थी। तभी उसने देखा कि पेड़ से एक फल गिर गया है। फल बहुत ही सुंदर था। लड़की ने फल उठाया और उसे चख लिया। फल बहुत ही स्वादिष्ट था। लड़की ने सोचा कि यह फल जादुई पेड़ का जादू है।

लड़की रोज़ जादुई पेड़ के पास जाती थी और फल खाती थी। कुछ दिनों बाद, लड़की को महसूस हुआ कि वह बहुत ही ताकतवर हो गई है। वह अब बहुत जल्दी और आसानी से काम कर सकती थी। उसकी ज़मीन पर भी बहुत अच्छी फसल होने लगी।

लड़की की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वह अब गरीब नहीं थी। वह अब अपने पिता की मदद भी कर सकती थी। लड़की ने सोचा कि यह सब जादुई पेड़ का जादू है।

लड़की ने अपने पिता को जादुई पेड़ के बारे में बताया। किसान ने भी जादुई पेड़ के फल खाए और वह भी बहुत ताकतवर हो गया। किसान ने अब बहुत मेहनत करके अपनी ज़मीन पर बहुत अच्छी फसल उगाई। वह अब पहले से ज़्यादा अमीर हो गया।

गांव के लोगों को पता चला कि किसान और उसकी बेटी जादुई पेड़ के फल खाकर ताकतवर हो गए हैं। लोग भी जादुई पेड़ के फल खाने लगे। कुछ दिनों बाद, गांव के सभी लोग बहुत खुश और समृद्ध हो गए।

गांव के लोग अब जादुई पेड़ का बहुत सम्मान करते थे। वे मानते थे कि यह पेड़ उनके जीवन का आधार है। वे हर साल जादुई पेड़ की पूजा करते थे और उसे धन्यवाद देते थे।

जादुई पेड़ का जादू हमेशा गांव में बना रहा। गांव के लोग हमेशा खुश और समृद्ध रहे।

Short stories for kids in hindi – खोया हुआ खरगोश

Short stories for kids in hindi - खोया हुआ खरगोश

एक बार की बात है, एक छोटे से गाँव में एक खरगोश परिवार रहता था। खरगोश परिवार में माँ, पिता और उनके तीन बच्चे थे। बच्चों में सबसे छोटा खरगोश बहुत ही शरारती और जिज्ञासु था। वह हमेशा नई-नई चीजों की खोज में रहता था।

एक दिन, छोटा खरगोश अपने माता-पिता से बिना बताए जंगल में घूमने चला गया। वह जंगल में बहुत दूर तक निकल गया। वह इतना मस्त हो गया कि उसे घर जाने का रास्ता नहीं सूझा।

शाम होने लगी और खरगोश को बहुत डर लगने लगा। वह रोते हुए अपने घर की तलाश करने लगा। लेकिन जंगल बहुत बड़ा था और खरगोश को घर का रास्ता नहीं मिल रहा था।

खरगोश ने कई घंटों तक अपने घर की तलाश की, लेकिन वह नहीं मिला। वह बहुत थक गया था और उसे बहुत भूख लगी थी। खरगोश एक पेड़ के नीचे बैठ गया और रोने लगा।

तभी, एक उल्लू उड़ता हुआ आया और खरगोश को रोते हुए देखकर पूछा, “क्यों रो रहे हो, छोटे खरगोश?”

खरगोश ने बताया कि वह रास्ता भटक गया है और उसे अपना घर नहीं मिल रहा है।

उल्लू ने कहा, “चिंता मत करो, छोटे खरगोश। मैं तुम्हें तुम्हारे घर तक पहुंचा दूँगा।”

उल्लू ने खरगोश को अपनी पीठ पर बैठा लिया और उड़ गया। उसने खरगोश को उसके घर के ऊपर से उड़ाया और दिखाया कि उसका घर कहाँ है।

खरगोश बहुत खुश हुआ। उसने उल्लू का शुक्रिया किया और अपने घर की ओर दौड़ गया।

खरगोश के माता-पिता उसे देखकर बहुत खुश हुए। उन्होंने उसे गले लगा लिया और उसे बहुत सारी बातें सुनाईं। खरगोश ने अपने माता-पिता से माफी माँगी कि वह बिना बताए जंगल में चला गया था।

खरगोश ने सीखा कि कभी भी बिना बताए कहीं नहीं जाना चाहिए। उसने यह भी सीखा कि अगर रास्ता भटक जाए तो किसी बड़े से मदद लेनी चाहिए।

Short stories for kids in hindi – मेहनती चिंटी और आलसी टिड्डा

Short stories for kids in hindi - मेहनती चिंटी और आलसी टिड्डा

एक बार की बात है, एक बड़े से घास के मैदान में एक मेहनती चींटी और एक आलसी टिड्डा रहते थे। चींटी हमेशा काम में लगी रहती थी। वह दिन भर घास के मैदान में घूमकर खाना इकट्ठा करती थी।

टिड्डा बहुत ही आलसी था। वह दिन भर धूप में बैठकर गाने गाता था। वह कभी काम नहीं करता था।

गर्मियों के दिनों में, चींटी ने बहुत सारा खाना इकट्ठा कर लिया था। उसने अपने लिए एक बड़ी सी गुफा बना ली थी। गुफा में उसके खाने का बहुत बड़ा अंबार था।

सर्दियों के दिन आ गए। घास के मैदान में हर जगह बर्फ जम गई थी। टिड्डा के पास खाने के लिए कुछ नहीं था। वह बहुत भूखा था और उसे बहुत ठंड लग रही थी।

टिड्डा चींटी के पास गया और उससे मदद माँगी। चींटी ने कहा, “मैं तुम्हें मदद करूँगी, लेकिन तुम्हें भी मेहनत करनी होगी।”

टिड्डा ने कहा, “मैं काम नहीं कर सकता। मैं बहुत आलसी हूँ।”

चींटी ने कहा, “अगर तुम काम नहीं करोगे तो तुम्हें सर्दी से मरना पड़ेगा।”

टिड्डा बहुत डर गया। उसने चींटी से वादा किया कि वह अब से मेहनत करेगा।

टिड्डा ने चींटी की मदद से बहुत सारा खाना इकट्ठा कर लिया। अब वह सर्दियों के लिए तैयार था।

टिड्डा ने सीखा कि मेहनत का फल मीठा होता है। अब वह आलसी नहीं रहता था। वह हमेशा काम में लगा रहता था।

Short stories for kids in hindi – दयालु राजा और भिखारी

Short stories for kids in hindi - दयालु राजा और भिखारी

एक बार की बात है, एक बड़े से राज्य में एक दयालु राजा रहता था। राजा बहुत ही दयालु और नेकदिल था। वह अपने प्रजा से बहुत प्यार करता था।

एक दिन, राजा अपने महल से बाहर घूमने गया। वह शहर के एक गली में गया, जहाँ वह एक भिखारी को देखकर रुक गया। भिखारी बहुत ही गरीब और बदहाल था।

राजा ने भिखारी से पूछा, “तुम इतने गरीब क्यों हो?”

भिखारी ने कहा, “मैं एक गरीब किसान था। मेरी फसल बर्बाद हो गई और मैं कंगाल हो गया। अब मैं भीख माँगकर अपना गुजारा करता हूँ।”

राजा ने भिखारी को दया आ गई। उसने भिखारी को एक थैली में सोने के सिक्के दिए और कहा, “लो ये सिक्के लो। इनसे तुम अपना गुजारा कर सकोगे।”

भिखारी बहुत खुश हुआ। उसने राजा का शुक्रिया किया और चला गया।

कुछ दिनों बाद, राजा फिर से भिखारी को देखने गया। भिखारी अब बहुत खुश और समृद्ध दिख रहा था।

राजा ने भिखारी से पूछा, “तुम इतने खुश कैसे हो?”

भिखारी ने कहा, “आपने मुझे जो सोने के सिक्के दिए थे, उनसे मैंने एक छोटी सी दुकान खोल ली है। अब मेरा काम बहुत अच्छा चल रहा है। मैं अब खुश और समृद्ध हूँ। मैं आपका बहुत-बहुत शुक्रिया करता हूँ।”

राजा बहुत खुश हुआ। उसने भिखारी से कहा, “मैंने तुम्हारी मदद इसलिए की क्योंकि तुम मेरी प्रजा हो। मैं अपने प्रजा की मदद करना अपना कर्तव्य समझता हूँ।”

राजा ने अपने राज्य में गरीबों और असहायों की मदद करना शुरू कर दिया। वह उनके लिए स्कूल, अस्पताल और घर बनवाता था। वह उन्हें रोजगार भी दिलाता था।

राजा की दयालुता से पूरा राज्य खुशहाल हो गया। लोग राजा से बहुत प्यार करते थे। वे उसे ‘दयालु राजा’ कहकर बुलाते थे।

Short stories for kids in hindi – शेर और चूहा

Short stories for kids in hindi - शेर और चूहा

एक बार की बात है, एक घने जंगल में एक शेर रहता था। शेर बहुत ही ताकतवर और शक्तिशाली था। वह जंगल का राजा माना जाता था। एक दिन, शेर एक पेड़ के नीचे सो रहा था। तभी, एक छोटा चूहा उसके ऊपर से भाग गया।

शेर की नींद खुल गई। उसने चूहे को पकड़ लिया और कहा, “तुमने मेरी नींद खराब कर दी है। इसलिए मैं तुम्हें खा जाऊँगा।”

चूहा बहुत डर गया। उसने शेर से रोते हुए कहा, “कृपया मुझे मत खाओ। मैं बहुत छोटा हूँ और आपसे बहुत कमज़ोर हूँ। मैं आपका कोई नुकसान नहीं करूँगा।”

शेर को चूहे पर दया आ गई। उसने कहा, “ठीक है, मैं तुम्हें नहीं खाऊँगा। लेकिन तुम मुझे एक वचन दो।”

चूहा ने कहा, “कौन सा वचन?”

शेर ने कहा, “अगर कभी तुम्हें मेरी मदद की ज़रूरत पड़ेगी तो तुम मेरी मदद ज़रूर करोगे।”

चूहा ने कहा, “ठीक है, मैं आपका वचन देता हूँ।”

Short stories for kids in hindi - शेर और चूहा

कुछ दिनों बाद, शेर एक बड़े से जाल में फंस गया। वह जाल से निकल नहीं पा रहा था। वह बहुत जोर से चिल्लाने लगा।

चूहा शेर की आवाज़ सुनकर उसके पास गया। उसने देखा कि शेर जाल में फंसा हुआ है। चूहा ने जाल के तार को काटना शुरू कर दिया। उसने बहुत मेहनत करके जाल के तार को काट दिया और शेर को जाल से निकाल दिया।

शेर बहुत खुश हुआ। उसने चूहे का शुक्रिया किया और कहा, “तुमने मेरी जान बचाई है। मैं तुम्हारा बहुत आभारी हूँ।”

चूहा ने कहा, “मैंने तो सिर्फ अपना वचन निभाया है।”

शेर ने कहा, “तुम बहुत छोटे हो, लेकिन तुम बहुत बहादुर हो।”

तभी से शेर और चूहा बहुत अच्छे दोस्त बन गए। वे हर दिन साथ में जंगल में घूमते थे। शेर चूहे को अपने सिर पर बैठाकर जंगल का नज़ारा दिखाता था। चूहा शेर के कान में जंगल की खबरें सुनाता था।

Short stories for kids in hindi – दयालु हिरण और मतलबी लोमड़ी

Short stories for kids in hindi - दयालु हिरण और मतलबी लोमड़ी

एक बार की बात है, एक घने जंगल में एक दयालु हिरण रहता था। हिरण बहुत ही शांत और समझदार था। वह जंगल के सभी जीवों की मदद करता था।

एक दिन, हिरण जंगल में घूमते-घूमते एक मतलबी लोमड़ी से मिल गया। लोमड़ी बहुत ही चालाक और होशियार थी। वह हमेशा दूसरों को धोखा देकर अपना काम निकालती थी।

लोमड़ी ने हिरण को देखकर कहा, “हाय हिरण भाई, आप बहुत सुंदर और शांत दिखते हैं।”

हिरण ने कहा, “धन्यवाद लोमड़ी बहन। मैं हमेशा दूसरों की मदद करने में खुश रहता हूँ।”

लोमड़ी ने सोचा, “यह हिरण बहुत भोला है। मैं इसे धोखा देकर इसका मांस खा जाऊँगी।”

लोमड़ी ने हिरण से कहा, “हिरण भाई, मुझे बहुत ज़ोर से भूख लगी है। क्या आप मुझे कुछ खाने के लिए दे सकते हैं?”

हिरण ने कहा, “बेशक। मैं आपके लिए कुछ घास ले आता हूँ।”

हिरण घास लेने के लिए जंगल में चला गया। लोमड़ी मौका पाकर एक कुएँ के पास चली गई। वह जानबूझकर कुएँ में गिर गई और जोर-जोर से चिल्लाने लगी।

हिरण ने लोमड़ी की आवाज़ सुनकर कहा, “लोमड़ी बहन, क्या हो गया है?”

लोमड़ी ने कहा, “हिरण भाई, मैं कुएँ में गिर गई हूँ। मुझे यहाँ से निकालने में मदद करें।”

हिरण दौड़ता हुआ कुएँ के पास गया। उसने देखा कि लोमड़ी कुएँ में गिर गई है। हिरण को बहुत दया आ गई। उसने लोमड़ी को कुएँ से निकालने के लिए एक रस्सी कुएँ में डाल दी।

Short stories for kids in hindi - दयालु हिरण और मतलबी लोमड़ी

लोमड़ी रस्सी पकड़कर कुएँ से बाहर निकल आई। उसने हिरण का शुक्रिया किया और कहा, “हिरण भाई, आपने मेरी जान बचाई है। मैं आपका बहुत आभारी हूँ।”

हिरण ने कहा, “कोई बात नहीं लोमड़ी बहन। मैं आपकी मदद करने में खुश हूँ।”

कुछ दिनों बाद, हिरण एक शिकारी के जाल में फंस गया। वह जाल से निकल नहीं पा रहा था। वह बहुत जोर से चिल्लाने लगा।

लोमड़ी ने हिरण की आवाज़ सुनकर कहा, “हिरण भाई, आप क्या कर रहे हैं?”

हिरण ने कहा, “लोमड़ी बहन, मैं एक शिकारी के जाल में फंस गया हूँ। मुझे यहाँ से निकालने में मदद करें।”

लोमड़ी ने कहा, “हिरण भाई, मैं आपको नहीं बचा सकती। मैं बहुत डर रही हूँ। अगर मैं इस जाल के पास गई तो शिकारी मुझे पकड़कर खा जाएगा।”

हिरण बहुत निराश हो गया। वह सोचने लगा कि अब उसे कोई नहीं बचा सकता।

तभी, एक बहादुर शेर जंगल में घूमते हुए हिरण की आवाज़ सुनकर उसके पास गया। शेर ने देखा कि हिरण जाल में फंसा हुआ है। शेर को बहुत दया आ गई। उसने अपने तेज पंजों से जाल के तार को काटकर हिरण को जाल से निकाल दिया।

हिरण बहुत खुश हुआ। उसने शेर का शुक्रिया किया और कहा, “शेर भाई, आपने मेरी जान बचाई है। मैं आपका बहुत आभारी हूँ।”

शेर ने कहा, “कोई बात नहीं हिरण भाई। यह मेरा कर्तव्य था।”

हिरण ने सीखा कि अच्छाई का फल हमेशा मिलता है। वह अब भी जंगल के सभी जीवों की मदद करता था। लोमड़ी को बहुत अफसोस हुआ कि उसने हिरण की मदद नहीं की। वह अब भी दूसरों को धोखा देकर अपना काम

Short stories for kids in hindi – हाथी और छींटी

Short stories for kids in hindi - हाथी और छींटी

एक बार की बात है, एक घने जंगल में एक बड़ा हाथी रहता था। हाथी बहुत ही शक्तिशाली था। वह जंगल का राजा माना जाता था। एक दिन, हाथी जंगल में घूमते-घूमते एक छोटी सी चींटी से मिल गया।

चींटी बहुत ही मेहनती थी। वह हमेशा काम में लगी रहती थी। हाथी ने चींटी को देखकर कहा, “तुम इतनी छोटी हो, लेकिन तुम इतनी मेहनत करती हो। क्यों?”

चींटी ने कहा, “हाथी भाई, हमें मेहनत करना ही पड़ता है। नहीं तो हम सर्दी में भूखे मर जाएंगे।”

हाथी ने सोचा, “मुझे मेहनत करने की ज़रूरत नहीं है। मैं तो जंगल का राजा हूँ। मैं जो चाहूँगा, वो सब मिल जाएगा।”

हाथी ने चींटी की बात नहीं सुनी और वह घूमने लगा। कुछ दिनों बाद, सर्दी का मौसम आ गया। जंगल में हर जगह बर्फ जम गई थी। हाथी को खाने के लिए कुछ नहीं मिल रहा था। वह बहुत भूखा था और उसे बहुत ठंड लग रही थी।

हाथी चींटी के पास गया और उससे मदद माँगी। चींटी ने कहा, “हाथी भाई, मैंने आपसे कहा था कि सर्दी में भूखे न मर जाने के लिए हमें मेहनत करना चाहिए। लेकिन आपने मेरी बात नहीं सुनी। अब आपका क्या होगा?”

हाथी ने चींटी से माफी माँगी और कहा, “चींटी बहन, आपने सही कहा था। मुझे मेहनत नहीं करना चाहिए था। अब आप ही मेरी मदद करें।”

चींटी ने हाथी को अपने घर ले गई। उसने हाथी को बताया कि उसने सर्दी के लिए कैसे भोजन का अंबार लगाया है। हाथी ने चींटी की बात सुनी और उसने भी सर्दी के लिए भोजन का अंबार लगा लिया।

हाथी ने सीखा कि मेहनत का फल मीठा होता है। अब वह भी मेहनत करने लगा। वह चींटियों की तरह ही हर दिन काम में लगा रहता था।

Short stories for kids in hindi – मछली और कछुआ

Short stories for kids in hindi - मछली और कछुआ

एक बार की बात है, एक सुंदर तालाब में एक छोटी सी मछली रहती थी। मछली बहुत ही चंचल और खुशमिजाज थी। वह दिन भर तालाब में तैरती और खेलती रहती।

एक दिन, मछली एक बड़े से कछुए से मिल गई। कछुआ बहुत ही शांत और बुद्धिमान था। वह दिन भर तालाब के किनारे पर बैठकर सूरज की गर्मी सेहता रहता था।

मछली ने कछुए से कहा, “कछुआ दादा, आप हमेशा तालाब के किनारे पर क्यों बैठकर सूरज की गर्मी सेहते रहते हैं?”

कछुए ने कहा, “मछली पोती, मुझे तालाब का किनारा बहुत पसंद है। यहाँ से मुझे तालाब का पूरा नज़ारा दिखाई देता है। मैं यहाँ बैठकर सूरज की गर्मी सेहता हूँ और तालाब की खबरें सुनता हूँ।”

मछली ने कहा, “लेकिन कछुआ दादा, आप तालाब में तैरना नहीं सीखते?”

कछुए ने कहा, “मछली पोती, मैं तैरना नहीं सीख सकता। मैं बहुत धीमा हूँ।”

मछली ने कहा, “लेकिन कछुआ दादा, तैरना बहुत मज़ा आता है। आप भी तैरना सीख जाइए। मैं आपको सिखा दूँगी।”

कछुआ थोड़ा-सा डर गया, लेकिन उसने मछली की बात मान ली। मछली ने कछुए को तैरना सिखाया। कुछ दिनों बाद, कछुआ भी तैरना सीख गया।

कछुआ बहुत खुश हुआ। उसने मछली का शुक्रिया किया और कहा, “मछली पोती, आपने मेरी बहुत बड़ी मदद की है। अब मैं भी आपके साथ तालाब में तैरकर मज़ा करूँगा।”

मछली और कछुआ दोनों बहुत अच्छे दोस्त बन गए। वे हर दिन साथ में तालाब में तैरते और खेलते रहते थे। मछली कछुए को तालाब के अंदर की दुनिया दिखाती थी। कछुआ मछली को तालाब के बाहर की दुनिया दिखाता था।

Short stories for kids in hindi –  बहादुर छोटी सी चिड़िया 

Short stories for kids in hindi -  बहादुर छोटी सी चिड़िया 

एक बार की बात है, एक बड़े से जंगल में एक छोटी सी चिड़िया रहती थी। चिड़िया बहुत ही बहादुर और समझदार थी। वह जंगल के सभी जीवों की मदद करती थी।

एक दिन, चिड़िया जंगल में घूमते-घूमते एक शिकारी के जाल में फंसे हुए छोटे से खरगोश को देखकर उसके पास गई। खरगोश बहुत डर गया था और वह जोर-जोर से रो रहा था।

चिड़िया ने खरगोश से कहा, “खरगोश भाई, क्यों रो रहे हो?”

खरगोश ने कहा, “चिड़िया बहन, मैं एक शिकारी के जाल में फंस गया हूँ। मुझे यहाँ से निकालने में मदद करें।”

चिड़िया ने खरगोश को दिलासा दिया और कहा, “चिंता मत करो खरगोश भाई, मैं तुम्हें जाल से निकाल दूँगी।”

चिड़िया ने अपनी चोंच से जाल के तार को काटना शुरू कर दिया। उसने बहुत मेहनत करके जाल के तार को काट दिया और खरगोश को जाल से निकाल दिया।

खरगोश बहुत खुश हुआ। उसने चिड़िया का शुक्रिया किया और कहा, “चिड़िया बहन, आपने मेरी जान बचाई है। मैं आपका बहुत आभारी हूँ।”

चिड़िया ने कहा, “कोई बात नहीं खरगोश भाई। यह मेरा कर्तव्य था।”

कुछ दिनों बाद, चिड़िया एक बड़े से पेड़ पर घोंसला बना रही थी। तभी, एक बड़ा सा साँप पेड़ पर चढ़कर चिड़िया के घोंसले को फोड़ने लगा। चिड़िया बहुत डर गई, लेकिन वह अपने बच्चों को बचाने के लिए साँप से लड़ने लगी।

चिड़िया ने अपनी छोटी-सी चोंच से साँप को बार-बार चोंच मारकर भगा दिया। साँप बहुत गुस्सा हो गया और उसने चिड़िया को पकड़ने की कोशिश की, लेकिन चिड़िया बहुत फुर्ती से पेड़ पर उड़ती और साँप को चकमा देती।

आखिर में, साँप थककर चूर हो गया और वह पेड़ से नीचे गिर गया। चिड़िया बहुत खुश हुई। उसने अपने बच्चों को बचा लिया था।

जंगल के सभी जीवों ने चिड़िया की बहादुरी की सराहना की। वे चिड़िया को ‘बहादुर छोटी सी चिड़िया’ कहकर बुलाने लगे। चिड़िया ने सीखा कि बहादुरी से किसी भी मुश्किल का सामना किया जा सकता है।

Leave a Comment