Seekh Dene Wali Kahani In Hindi

इस ‘Seekh Dene Wali Kahani In Hindi’ में आपको एक ऐसी कहानी मिलेगी जो न केवल आपको प्रेरित करेगी, बल्कि आपके जीवन को सफल बनाने के लिए आपको संबोधित करेगी। यह कहानी आपको मोटिवेट करने वाली है और आपको उत्साहित करेगी ताकि आप अपने लक्ष्यों की प्राप्ति में सफल हो सकें।

Seekh Dene Wali Kahani In Hindi

खुद पर विजय – Seekh Dene Wali Kahani In Hindi

यह कहानी बहुत पहले की है। किसी नगर में एक व्यक्ति रहा करता था जिसका इस संसार से मन भर चुका था। जो इस संसार की मोह माया को त्याग देना चाहता था। उसने एक दिन यह फैसला किया कि वह इस संसार की हर एक मोहमाया को त्याग देगा। उसने अपना मन बना लिया था। उस व्यक्ति ने संन्यासियों का जीवन देखा था और उसने अब यह तय कर लिया था कि वह अब एक संन्यासी बनेगा।

वह तुरंत अपने घर से निकलकर पास में रह रहे एक बौद्ध भिक्षु के पास जाता है और उनसे कहता है कि मुझे एक संन्यासी जीवन जीना है। मैं इस संसार की मोह माया को त्याग देना चाहता हूं। इस पर वह बौद्ध भिक्षु उस संन्यासी से कहते हैं कि क्या तुम सच में संन्यासी का जीवन जीना चाहते हो? इस पर वह व्यक्ति उस बौद्ध भिक्षु के सवालों का जवाब देता है और कहता है, जी बिल्कुल। वह व्यक्ति कहता है, मैंने तय कर लिया है कि अब मुझे इस संसार की मोह माया को त्यागना है।

खुद पर विजय - Seekh Dene Wali Kahani In Hindi

उस वृद्ध की बात सुनकर बौद्ध भिक्षु कहते हैं तो ठीक है, लेकिन तुम्हें मेरी एक बात माननी होगी। इस पर वह व्यक्ति कहता है कि मैं आपकी सारी बात मानने को तैयार हूं।

इस पर वह बौद्ध भिक्षु उस व्यक्ति से कहते हैं कि आज के बाद तुम मुझसे कभी नहीं मिलोगे। जब मुझे जरूरत होगी तब तुम्हें खुद ही बुला लूंगा। हमारे आश्रम में हजार संन्यासी रहते हैं। तुम्हें उन्हीं की तरह रहना है और उन्हीं की तरह खाना है। उन्हीं की तरह वस्त्र पहनना होगा और ठीक वैसा ही जीवन जीना होगा, जैसे कि वे सब जी रहे हैं।

इस पर वह व्यक्ति कहता है कि ठीक है गुरुवर, मैं तैयार हूं। इतना कहकर वह व्यक्ति उस बौद्ध भिक्षु को प्रणाम करता है और वहां से आश्रम की ओर चला जाता है।

आश्रम में जाने के बाद उसे एक कमरा मिलता है। वहां जाकर चुपचाप बैठ जाता है। आश्रम में रहने वाले सभी लोग उसे चावल कूटने का काम दे देते हैं।

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वह व्यक्ति उन हजार संन्यासियों के लिए हर रोज चावल कूटने का काम करने लगा। इसी तरह उसका जीवन व्यतीत होने लगा। उसे लगता था कि जब गुरुजी को उसकी जरूरत होगी, तब वह उसे बुला लेंगे। इसी इंतजार में वह व्यक्ति वहां रहने लग जाता है। वह सुबह से लेकर शाम तक केवल चावल कूटने का ही काम करता था।

उसे यह काम करते करते धीरे धीरे 12 साल बीत गए। अभी तक वह बौद्ध भिक्षुओं ने उस चावल कूटने वाले व्यक्ति को कभी नहीं बुलाया। लेकिन यह काम करते करते अब उस चावल कूटने वाले व्यक्ति के मन में कोई भी विचार नहीं रह गए थे। न ही कोई अड़चन और न ही कोई समस्या उसके मन में पनप रही थी। 12 सालों के बाद वह बौद्ध भिक्षु कब बूढ़े हो चुके थे। Seekh Dene Wali Kahani In Hindi

उन्हें लग चुका था कि अब उनका अंतिम समय आ चुका है और उन्हें अपना एक उत्तराधिकारी चुनना होगा। इसीलिए उन्होंने पूरे आश्रम में घोषणा करवा दी कि जो कोई भी मेरा उत्तराधिकारी बनना चाहता है, वह देर रात में मेरे कमरे के बाहर चार पंक्तियां लिखकर जाएगा और उसे उन पंक्तियों में बताना होगा कि जीवन जीने का सही तरीका क्या है?

इस जीवन को किस तरीके से जीना सही है। इस जीवन का सत्य लिखना होगा। लेकिन एक बात याद रखना उसे खुद के अनुभव के द्वारा लिखना होगा। किताब में कही हुई बातों को नहीं लिखना होगा या कहीं से नकल मारकर नहीं लिखना है। जो भी यह बताने में सफल हो जाएगा, वही मेरा उत्तराधिकारी होगा।

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आश्रम में जितने भी लोग रह रहे थे, वह सब उस बौद्ध भिक्षु को बहुत मानते थे। कोई भी उन्हें धोखा नहीं देना चाहता था। सभी भिक्षुओं के मन में यह चाहत थी कि वह उनका उत्तराधिकारी बने, लेकिन कोई भी यह काम करना नहीं चाहता था। उन हजार बौद्ध भिक्षुओं में से एक विद्वान भिक्षुक ने बहुत ही हिम्मत जुटाकर अंधेरी रात में दीवार के बाहर लिख दिया कि मन एक दर्पण की तरह है। उसमें धूल जम जाती है। उस धूल को साफ कर दो तो सत्य अनुभव में आ जाता है और सत्य मिल जाता है। ये चार पंक्तियां उस शिष्य ने बड़ी हिम्मत जुटाकर अपने गुरुवर के कमरे के बाहर लिख दिया।

अगली सुबह जब बौद्ध भिक्षु उठे और कमरे के बाहर लिखी चार पट्टियों को पढ़ा और कहा कि किस मूर्ख ने लिखी है, मेरी दीवार को किसने खराब कर दिया है। उसे पकड़कर अभी मेरे पास लाओ। जब आश्रम में सभी लोगों ने पता किया तो पता लगा कि वह विद्वान शिष्य उन पंक्तियों को लिखने के बाद रात्रि में ही उस आश्रम को छोड़ दिया था, क्योंकि यह विचार उसके अपने नहीं थे और विद्वान शिष्य ने जाते जाते अपने कुछ मित्रों से कह दिया था। Seekh Dene Wali Kahani In Hindi

सुबह अगर गुरुवार को मेरी को चार पंक्तियां पसंद आई तो वह लोग मुझे बता देंगे और अगर इन चार पंक्तियों को पढ़ने के बाद गुरुवर गुस्सा हो जाएं तो तुम सब मेरा पता उन्हें कभी भी मत बताना। आश्रम के सभी लोग चिंता में पड़ गए कि कितनी अच्छी पंक्तियां तो लिखी हैं उसमें, फिर भी गुरुवर नाराज क्यों हो गए। इतनी अच्छी बात तो लिखी थी उसने कि मां ने दर्पण की तरह है। अगर उसे साफ कर दिया जाए तो उसका प्रतिबिंब स्पष्ट दिखने लगता है।

वे सब कहते हैं, चलो देखते हैं कि गुरुवर को ऐसा उत्तराधिकारी कौन मिलेगा जो उनके सवालों का सही जवाब उस दीवाल पर लिख सके। वह कौन होगा जिसके पास इससे भी विचार होंगे? कुछ लोग यह सब बातें उस चावल कूटने वाले व्यक्ति के कमरे के बाहर कर रहे थे। वह चावल कूटने वाला व्यक्ति पूरी बातें सुन लेता है और जोर जोर से हंसने लग जाता है।

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लोग उससे पूछते हैं, इसमें हंसने वाली बात क्या है? तुम्हें इसमें क्या गलत लगता है? वह चावल कूटने वाला व्यक्ति कहता है, गुरुवर सही तो कह रहे हैं कि किस नासमझ ने यह सब लिखा है। इस पर वैसे लोग गुस्सा हो जाते हैं और उस चावल कूटने वाले से कहते हैं कि तुम्हें क्या पता। तुम तो 12 सालों से सिर्फ चावल कूटने का ही काम कर रहे हो। तुम्हें किस बात का ज्ञान है? न तो तुम्हें शास्त्रों का ज्ञान है और न ही गुरुदेव ने तुम्हें कभी ज्ञान दिया। Seekh Dene Wali Kahani In Hindi

अगर तुम्हें इतना ही ज्ञान है तो तुम ही क्यों नहीं अच्छे शब्द बता देते। वह व्यक्ति हंसते हुए कहता है कि ठीक है, मैं जरूर बता दूंगा। लेकिन इतने सालों से मैंने लिखने का अभ्यास नहीं किया हूं तो लिखना मैं भूल गया हूं। मैं बातों को जरूर बता दूंगा, लेकिन किसी को मेरी बातें लिखनी होगी और यह भी याद रखना कि मुझे उत्तराधिकारी बनने का कोई भी शौक नहीं है। इस पर वैसे लोग कहते हैं तो ठीक है, क्या लिखना है? बताओ। वह चावल कूटने वाला व्यक्ति कहता है तो लिखो जो मैं बता रहा हूं।

कैसा दर्पण, कैसी धूल? न कोई दर्पण, न कोई धूल। जो इसे जान लेता है, वह सत्य को प्राप्त हो जाता है। यह बात उस गुरुदेव के कानों में पड़ जाती है। आधी रात को वह गुरुदेव उस चावल कूटने वाले व्यक्ति के पास आते हैं और उससे कहते हैं कि तुम यहां से चले जाओ, वरना यहां पर रहने वाले आश्रम के सभी हजार लोग तुम्हें छोड़ेंगे नहीं।

यह जोगा ले लो। तुम मेरा उत्तराधिकारी बनना चाहो या न जाओ, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। तुम उत्तराधिकारी बनो या न बनो, लेकिन जो शब्द तुमने कहे थे, वही शब्द बिल्कुल सत्य हैं और जीवन के अनुभव को दर्शाते हैं।

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इसलिए मन ही मन मैं तुम्हें अपना उत्तराधिकारी मान लिया हूं और अगर यह बातें उन हजार आश्रम वाले लोगों तक पहुंच जाएंगी तो वह सब तुमसे जलने लगेंगे और तुम्हें चोट पहुँचायेंगे। यह लोग बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे। यह चावल कूटने वाले व्यक्ति उत्तराधिकारी कैसे बन सकता है? जिसे कभी ज्ञान नहीं, जिसने कभी शास्त्र पढ़ा ही नहीं, वह उत्तराधिकारी कैसे बन सकता है? वह भला कैसे सत्य को प्राप्त कर सकता है? और यहां पर शास्त्र जानने वाले सभी लोग सर पीटते रह जाएंगे।

इसलिए तुम यहां से चले जाओ, कहीं और अपनी दुनिया बनाओ और वहां के लोगों को ज्ञान से भर दो। इस पर महात्मा बुद्ध ने भी अपने एक शिष्य से कहा था, जब तुम्हारे मन के सारे विचार शांत हो जाएं, तुम्हारे भीतर विचार आना बंद हो जाए, उस दिन से तुम्हें सत्य का अनुभव हो जाएगा। Seekh Dene Wali Kahani In Hindi

तुम सत्य का अनुभव करोगे, खुद को भी और इस ब्रह्मांड को भी समझ पाओगे। और यही बुद्धत्व प्राप्ति का पहला कदम है। मन को शांत करने का पहला तरीका जो बौद्ध ग्रंथों में बताया गया है, वह खुद के विचारों पर करना, इन्हें अच्छे से समझना कि आखिर आपके अंदर कौन से विचार उत्पन्न हो रहे हैं, आपके अंदर आखिर क्या चल रहा है।

उन्हें अच्छी तरीके से और जागरूकता के साथ समझने की कोशिश करना, न कि अपने विचारों को दबाने की कोशिश करना। अगर आप अपने मन के विचारों को दबाने की कोशिश करते हैं तो यह गलत होगा जिसकी वजह से मन और तेजी से भटकने लगेगा और बार बार भटकेगा। लेकिन जब भी आपको लगने लगे कि आपका मन बहुत तेजी से भटक रहा है तो तुरंत आप उस पर ध्यान देना शुरू कर दें। उसको जागरुकता के साथ देखें और अपने विचारों पर ध्यान दें।

निरंतर प्रयासों के बाद आप पाएंगे कि आपके अंदर विचारों को जागरूक होकर देखने की एक आदत सी लग गई है। लेकिन उसी के साथ आप यह भी देख पाएंगे कि आपके मन में बुरे विचार अत्यधिक उत्पन्न हो रहे हैं। आपके मन में जो भी विचार उत्पन्न हो रहे हैं, वह सकारात्मक भी हो सकते हैं और नकारात्मक भी।

उनसे आपको कोई भी छेड़खानी नहीं करनी है। बस आपको अपने प्रयास पर काम करते रहना है। लेकिन यह अभ्यास आप लगातार करते रहे हैं। तो एक समय आने के बाद आप अपने विचारों को नियंत्रित करने में सफल हो जाएंगे और उसे रोक भी सकते हैं। तब जाकर आपको असली शांति और सुकून की प्राप्ति हो जाएगी। तब आपको किसी भी प्रकार की चिंता नहीं सताएगी क्योंकि आप खुद पर विजय प्राप्त कर लिए हैं। आप अपने विचारों को नियंत्रित कर सकते हैं।

समापन

इस Seekh Dene Wali Kahani In Hindi का संक्षेप करते हुए कह सकते हैं कि यह कहानी आपको मोटीवेट करेगी और जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए प्रेरित करेगी। यह कहानी हमें यह सिखाती है कि कभी-कभी जीवन में आनेवाली मुश्किलें ही हमें एक नई दिशा में बदल देती हैं और हमें सच्ची मेंमता की ओर ले जाती हैं।

इसमें छिपी सीखें हमें साहस और समर्पण की ओर प्रेरित करती हैं, जिससे हम अपने लक्ष्यों की प्राप्ति में सफल हो सकते हैं। इस कहानी के माध्यम से हमें यह भी बताया जाता है कि हालात चाहे जैसे भी हों, हमारी मेहनत और आत्मविश्वास ही हमें आगे बढ़ने में मदद कर सकते हैं।

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