Sad Story In Hindi

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Sad Story In Hindi – दुख का पहाड़

Sad Story In Hindi - दुख का पहाड़

एक बार की बात है, एक गाँव में एक बूढ़ा आदमी रहता था। उसका नाम राम था। राम बहुत ही गरीब था। उसके पास न तो अपना घर था और न ही कोई ज़मीन। वह एक छोटे से झोंपड़े में रहता था और लोगों के घरों में काम करके अपना गुज़ारा करता था।

राम बहुत ही मेहनती और ईमानदार आदमी था। वह हमेशा दूसरों की मदद करने के लिए तैयार रहता था। गाँव के सभी लोग उसका बहुत सम्मान करते थे।

राम का एक ही बेटा था, जिसका नाम मोहन था। मोहन बहुत ही आलसी और बदमाश था। वह किसी भी काम को करना पसंद नहीं करता था और हमेशा अपने पिता के पैसों से ऐश करता था।

राम बहुत परेशान था कि उसका बेटा इतना आलसी और बदमाश है। उसने मोहन को बहुत समझाने की कोशिश की, लेकिन मोहन उसका कुछ भी नहीं सुनता था।

एक दिन राम बहुत बीमार हो गया। वह बिस्तर पर पड़ा हुआ था और उठकर भी नहीं सकता था। मोहन को अपने पिता के लिए दवाई लेने के लिए बाज़ार जाना था, लेकिन वह जाने से मना कर दिया।

मोहन ने कहा, “पिताजी, मुझे बाज़ार जाना नहीं है। मुझे भूख लगी है। मैं खाना खाऊँगा और फिर सो जाऊँगा।”

राम बहुत दुखी हो गया। उसने सोचा कि उसका बेटा कितना बेदर्द है। वह अपने बेटे से बहुत प्यार करता था, लेकिन उसका बेटा उससे प्यार नहीं करता था।

राम ने कहा, “मोहन, मुझे तुम्हारे लिए बहुत दुख है। तुम कभी भी समझ नहीं पाओगे कि मैं तुम्हारे बारे में कितना सोचता हूँ।”

मोहन ने कुछ नहीं कहा और वह खाना खाने के लिए चला गया। राम अकेला रह गया। वह बहुत दुखी था और उसकी आँखों में आँसू आ गए।

राम ने सोचा कि उसकी ज़िंदगी बहुत दुख भरी है। वह बहुत गरीब था और उसका कोई घर नहीं था। उसका इकलौता बेटा भी उससे प्यार नहीं करता था।

राम ने सोचा कि वह अब और नहीं जीना चाहता। वह अपने बिस्तर पर लेट गया और अपनी आँखें बंद कर लीं। राम सो गया और फिर कभी नहीं उठा।

गाँव के लोगों को राम की मौत की खबर मिली। वे सब बहुत दुखी हुए। वे राम को बहुत पसंद करते थे और उन्हें उसकी बहुत कमी महसूस होगी।

गाँव के लोगों ने राम का अंतिम संस्कार बहुत ही श्रद्धा के साथ किया। वे सब जानते थे कि राम एक बहुत ही अच्छा आदमी था।

मोहन भी अपने पिता के अंतिम संस्कार में आया। वह बहुत दुखी था, लेकिन वह पछतावा नहीं कर रहा था। वह सोच रहा था कि अब वह अपने पिता के पैसों से खूब ऐश करेगा।

मोहन ने अपने पिता की सारी जायदाद अपने नाम कर ली। वह गाँव में सबसे अमीर आदमी बन गया।

मोहन ने बहुत ही अमीर ज़िंदगी जी। उसने बड़े-बड़े महलों में रहना शुरू कर दिया और महंगी गाड़ियाँ चलाने लगा। वह हर रोज़ पार्टियाँ देता था और बहुत से नौकर रखता था।

लेकिन मोहन बहुत खुश नहीं था। वह हमेशा अकेला महसूस करता था। उसके पास कोई दोस्त नहीं था और कोई उससे प्यार नहीं करता था।

मोहन को अपने पिता की बहुत याद आती थी। वह सोचता था कि अगर उसके पिता जिंदा होते तो वह कितना खुश होता।

मोहन को अपने पिता के शब्द याद आते थे, “मोहन, मुझे तुम्हारे लिए बहुत दुख है। तुम कभी भी समझ नहीं पाओगे कि मैं तुम्हारे बारे में कितना सोचता हूँ।”

मोहन ने सोचा कि वह अपने पिता का कितना दुखी कर रहा था। वह अपने पिता की बातें मानने के लिए कितना बड़ा पछतावा कर रहा था।

मोहन ने फैसला किया कि वह अपनी ज़िंदगी बदल देगा। वह अब और ऐश नहीं करे।

Sad Story In Hindi – दुख का सागर

Sad Story In Hindi - दुख का सागर

एक बार की बात है, एक गाँव में एक गरीब किसान रहता था। उसका नाम रमेश था। रमेश बहुत ही मेहनती किसान था। वह सुबह से शाम तक काम करता था और अपने परिवार का पेट पालता था।

रमेश की पत्नी का नाम सीता था। सीता बहुत ही सुशील और समझदार स्त्री थी। वह अपने पति का हर काम में हाथ बँटाती थी।

रमेश और सीता के दो बच्चे थे। उनका बड़ा बेटा रामू था और छोटी बेटी सीमा थी। रामू और सीमा दोनों बहुत ही प्यारे और अच्छे बच्चे थे।

रमेश और सीता अपने बच्चों से बहुत प्यार करते थे। वे उनके लिए हर सुख सुविधा जुटाने की कोशिश करते थे।

एक दिन रमेश का गाँव के जमींदार से झगड़ा हो गया। जमींदार बहुत ही अमीर और दबंग था। वह गाँव के सभी लोगों को डरा धाँस देता था।

रमेश जमींदार से नहीं डरा। उसने जमींदार के सामने सच बोल दिया। जमींदार को रमेश की बातों में गुस्सा आ गया और उसने रमेश को बहुत बुरी तरह से मारपीट की।

रमेश को बुरी तरह से घायल कर दिया गया। वह बेहोश होकर गिर पड़ा।

गाँव के लोग रमेश को उठाकर घर ले आए। सीता अपने पति को देखकर रोने लगी। वह नहीं जानती थी कि उसके पति के साथ क्या हुआ है।

रमेश को डॉक्टर के पास ले जाया गया। डॉक्टर ने रमेश का इलाज किया, लेकिन वह अब ठीक नहीं हो सका।

रमेश कुछ ही दिनों में मर गया। सीता और उसके बच्चों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। उनके घर का सारा सहारा छीन गया।

सीता अपने बच्चों का पालन-पोषण करने के लिए बहुत परेशान थी। वह किसी से मदद नहीं मांग सकती थी।

सीता दिन में मजदूरी करती थी और रात में अपने बच्चों को खाना खिलाकर सुला देती थी। वह अपने पति को बहुत याद करती थी।

सीता के बच्चे भी बहुत दुखी थे। वह अपने पिता से बहुत प्यार करते थे।

एक दिन सीता बीमार पड़ गई। वह बिस्तर पर पड़ी हुई थी और उठकर भी नहीं सकती थी।

सीता के बच्चों को पता नहीं था कि क्या करें। उनके घर में कोई नहीं था जो उनकी मदद कर सकता था।

रामू और सीमा अपने पिता की तरह ही मेहनती थे। उन्होंने गाँव के लोगों के घरों में काम करना शुरू कर दिया।

रामू और सीमा अपने घर का सारा काम भी खुद ही करते थे। वे अपने छोटे से घर में खुश थे।

सीता कुछ दिनों बाद ठीक हो गई। वह अपने बच्चों को देखकर बहुत खुश हुई। उसने उन्हें गले लगा लिया और कहा कि वह उनसे बहुत प्यार करती है।

सीता, रामू और सीमा अपना जीवन बड़ी मुश्किल से गुज़ार रहे थे। लेकिन वे एक साथ थे और एक-दूसरे का सहारा थे।

वे जानते थे कि उनके पिता की यादें हमेशा उनके साथ रहेंगी।

दुख के सागर में भी खुशियों की एक छोटी सी नाव थी, जो उनके जीवन की दिशा तय कर रही थी।

Sad Story In Hindi – एक टूटा हुआ सपना

Sad Story In Hindi - एक टूटा हुआ सपना

एक बार की बात है, एक छोटे से गाँव में एक लड़की रहती थी जिसका नाम सुनीता था। सुनीता बहुत ही गरीब थी। उसके माँ-बाप मजदूरी करते थे और उनकी कमाई से गरीबी के साए को मिटाना मुश्किल था।

सुनीता के माँ-बाप का सपना था कि उनकी बेटी एक डॉक्टर बनेगी। वह गरीबों का इलाज करेगी और अपनी मेहनत से उनका नाम रोशन करेगी।

सुनीता भी अपने माँ-बाप के सपने को पूरा करना चाहती थी। वह दिन-रात पढ़ाई करती थी और सपने में खुद को एक सफल डॉक्टर के रूप में देखती थी।

लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। सुनीता जब दसवीं कक्षा में थी, तभी उसके पिता का एक्सीडेंट हो गया। एक्सीडेंट में उनका एक पैर टूट गया और वे काम करने में असमर्थ हो गए।

सुनीता के घर की हालत और खराब हो गई। सुनीता की माँ अकेले ही परिवार का पेट पालती थी और उनकी कमाई से सुनीता की पढ़ाई जारी रखना मुश्किल हो गया था।

सुनीता का सपना धीरे-धीरे टूटने लगा। उसके मन में निराशा और हताशा भर गई। वह सोचती थी कि अब वह कभी भी डॉक्टर नहीं बन पाएगी।

एक दिन सुनीता का स्कूल फीस भरने के लिए पैसे नहीं थे। सुनीता ने अपनी माँ से कहा कि वह अब स्कूल नहीं जाएगी। वह अपने माँ-बाप का बोझ नहीं बनना चाहती थी।

सुनीता की माँ ने उसे समझाया कि शिक्षा ही उसके अंधकार में रोशनी ला सकती है। लेकिन सुनीता का मन नहीं बदला।

सुनीता ने स्कूल जाना छोड़ दिया। वह अपने घर पर रहकर दिनभर रोती रहती थी। उसका सपना टूट चुका था और वह अपने भविष्य को लेकर अनिश्चित थी।

सुनीता के माँ-बाप भी बहुत दुखी थे। उन्होंने अपनी बेटी के सपने को पूरा करने के लिए हर संभव कोशिश की थी, लेकिन किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया।

एक दिन सुनीता की माँ ने उसे गाँव के सरपंच के पास ले गई। सरपंच बहुत ही दयालु और नेक इंसान थे। उन्होंने सुनीता की कहानी सुनकर उसकी मदद करने का फैसला किया।

सरपंच ने सुनीता को शहर के एक होटल में काम दिला दिया। होटल में काम करने से सुनीता को कुछ पैसे मिल जाते थे, जिससे वह अपनी पढ़ाई जारी रख सकती थी।

सुनीता ने फिर से पढ़ाई शुरू कर दी। वह दिन में होटल में काम करती थी और रात में पढ़ाई करती थी। वह अपने सपने को पूरा करने के लिए दृढ़ संकल्पित थी।

सुनीता ने अपनी मेहनत से अपनी पढ़ाई जारी रखी और अंत में वह डॉक्टर बन गई। वह अपने माँ-बाप का सपना पूरा करने में सफल हो गई।

सुनीता की कहानी यह बताती है कि हार मानने वाले कभी नहीं जीतते और जीतने वाले कभी नहीं हारते। हमें अपने सपनों को पूरा करने के लिए निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए।

Sad Story In Hindi – एक अकेला पिता का दर्द

Sad Story In Hindi - एक अकेला पिता का दर्द

एक बार की बात है, एक अकेला पिता था जिसका नाम अशोक था। अशोक की पत्नी कुछ साल पहले एक दुर्घटना में मर गई थी। तब से अशोक अकेले ही अपने दो बच्चों, राजू और रानी की परवरिश कर रहा था।

अशोक एक बहुत ही मेहनती आदमी था। वह दिन में मजदूरी करता था और रात में अपने बच्चों की देखभाल करता था। वह अपने बच्चों से बहुत प्यार करता था और उनके लिए हर सुख सुविधा जुटाने की कोशिश करता था।

अशोक के बच्चे भी अपने पिता से बहुत प्यार करते थे। वे जानते थे कि उनके पिता ही उनके एकमात्र सहारे हैं।

एक दिन अशोक को पता चला कि वह एक लाइलाज बीमारी से पीड़ित है। डॉक्टर ने कहा कि उसके पास जीने के कुछ ही महीने बाकी हैं।

अशोक को यह सुनकर बहुत दुख हुआ। लेकिन वह अपने बच्चों के सामने दुखी नहीं होना चाहता था। वह हमेशा की तरह ही उनके साथ हँसता-खेलता रहा और उनकी हर बात मानता रहा।

अशोक के बच्चे अपने पिता के चेहरे पर हर पल की चिंता को देखते थे। उन्हें पता था कि उनके पिता को कुछ परेशानी है, लेकिन वे उनसे कुछ नहीं पूछते थे।

अशोक अपने बच्चों के भविष्य को लेकर बहुत चिंतित था। वह नहीं जानता था कि उनके जाने के बाद उनकी देखभाल कौन करेगा।

एक दिन अशोक ने अपने बच्चों को अपने पास बुलाया और उनसे कहा कि वह कुछ दिनों के लिए एक काम से बाहर जा रहा है।

अशोक के बच्चे अपने पिता की बातों पर यकीन नहीं कर सके। उन्हें पता था कि उनके पिता उन्हें छोड़कर नहीं जा सकते।

अशोक अपने बच्चों को गले लगाकर उनके माथे पर चूम लिया और फिर वह चला गया।

अशोक अपने बच्चों को अलविदा कहने के लिए कभी नहीं लौट सका। वह उसी रात अस्पताल में चल बसा।

जब राजू और रानी को अपने पिता की मौत की खबर मिली तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। वे अपने पिता को बहुत याद करते थे और उन्हें यकीन नहीं था कि अब वे कैसे रह पाएँगे

राजू और रानी अपने पिता के बिना बहुत अकेले थे। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने पिता की तरह ही मेहनत कर।

Sad Story In Hindi – एक टूटा हुआ रिश्ता

एक बार की बात है, एक खूबसूरत महिला थी जिसका नाम राधा था। राधा बहुत ही खुशमिजाज और मिलनसार थी। वह हमेशा दूसरों की मदद करने के लिए तैयार रहती थी।

राधा के गाँव में एक लड़का रहता था, जिसका नाम मोहन था। मोहन बहुत ही मेहनती और समझदार था। वह राधा से बहुत प्यार करता था।

राधा को भी मोहन से प्यार हो गया। वे दोनों एक-दूसरे के लिए बहुत अच्छे थे। वे हमेशा साथ रहते थे और एक-दूसरे का बहुत ख्याल रखते थे।

एक दिन राधा के पिता ने राधा की शादी एक अमीर आदमी से करने का फैसला किया। राधा बहुत दुखी हुई, लेकिन वह अपने पिता की बात नहीं मान सकती थी।

राधा ने मोहन को सारी बात बताई। मोहन भी बहुत दुखी हुआ। उसने राधा से कहा कि वह उससे शादी कर लेगा, चाहे उसके पिता कुछ भी कहें।

राधा और मोहन ने भागकर शादी कर ली। वे दोनों एक छोटे से गाँव में जाकर रहने लगे। वे दोनों बहुत खुश थे और एक-दूसरे का बहुत प्यार करते थे।

एक दिन राधा के पिता उन्हें बहुत ढूँढकर उनके गाँव में आ गए। उन्होंने राधा और मोहन को बहुत बुरी तरह से मारापीट की।

राधा और मोहन बहुत दुखी हुए। वे नहीं जानते थे कि क्या करें। उन्हें अपने गाँव से भागना पड़ा।

राधा और मोहन बहुत दिनों तक भटकते रहे। उन्हें कहीं रहने के लिए जगह नहीं मिली। वे बहुत गरीब और परेशान थे।

एक दिन मोहन बीमार पड़ गया। वह बहुत कमजोर हो गया और उठकर भी नहीं सकता था।

राधा बहुत परेशान थी। वह नहीं जानती थी कि मोहन का इलाज कैसे कराएँ। उसके पास पैसे भी नहीं थे।

राधा ने मोहन की बहुत सेवा की, लेकिन मोहन की हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही थी।

एक दिन मोहन की मृत्यु हो गई। राधा बहुत दुखी हुई। वह अपने मोहन से बहुत प्यार करती थी।

राधा ने मोहन की चिता को आग लगाई और बहुत रोई। वह नहीं जानती थी कि उसके बिना कैसे जी पाएगी।

राधा ने अपने गाँव वापस जाने का फैसला किया। वह जानती थी कि उसके पिता उसे कभी माफ नहीं करेंगे, लेकिन वह मोहन की यादों को अपने साथ ले जाना चाहती थी।

राधा अपने गाँव वापस चली गई। उसके पिता बहुत गुस्से में थे, लेकिन राधा को देखकर उनका दिल पिघल गया।

राधा के पिता ने राधा को माफ कर दिया और उसे अपने घर ले आए। राधा अपने पिता के साथ रहने लगी, लेकिन वह मोहन को कभी नहीं भूल सकी।

राधा अपने जीवन में बहुत दुख देख चुकी थी, लेकिन वह हमेशा मजबूत रही। वह जानती थी कि उसे अपने जीवन में आगे बढ़ना चाहिए और मोहन की यादों को अपने साथ रखना चाहिए।

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