Real Motivational Story

यह Real Motivational Story है एक सामान्य लड़के की, जिसने अपने सपनों को हकीकत में बदलने के लिए मेहनत और संघर्ष की राह चुनी। इस कहानी के माध्यम से हम जानेंगे कि आदमी अपने सपनों को कैसे पूरा करता है और किस प्रकार से वह अपने जीवन में महत्वपूर्ण उच्चाधिकारियों का सामना करता है। इस Real Motivational Storyको पढ़कर आपको निरंतर प्रेरणा मिलेगी और आप भी अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध होंगे।

बायजू रविंद्रन की कहानी : Real Motivational Story

यह Real Motivational Story बायजू रविंद्रन के उन उद्यमी जीवन की है, जिन्होंने अपने प्रेरणादायक संघर्ष और अद्भुत कामयाबी के माध्यम से एक मल्टीनेशनल कंपनी की स्थापना की, जिसका वैल्युएशन आज 37,000 करोड़ रुपये से भी अधिक है। उनका यह सफर सीखने और प्रेरणा प्रदान करने वाला है।

Real Motivational Story

दोस्तों कहते हैं कि बड़े से बड़े लक्ष्य को भी सच्ची मेहनत और लगन से हासिल किया जा सकता है और इस वाक्य को न जाने कितने ही लोगों ने सच करके भी दिखाया है। आज कहानी में हम एक ऐसे ही इंसान की बात करेंगे जिसने अपने खुद के दम पर एक मल्टीनेशनल कंपनी बनाई और आज के समय में उनकी कंपनी के वैल्युएशन करीब 37,000 करोड़ रुपये से भी ज्यादा है।

जी हाँ दोस्तो हम बात कर रहे हैं ऑनलाइन एजुकेशन स्टार्टअप के जरिए क्रांति लाने वाली कंपनी बेजोस के बारे में, जिसके ऐड्स तो शायद आपने अपने टीवी पर जरूर ही देखे होंगे। बाजों पैसे के लिए बैंगलौर बेस्ड एजुकेशनल टेक्नॉलजी और ऑनलाइन ट्यूटोरियल फर्म है, जिसकी शुरुआत आज से कई सालों पहले 2011 में हुई थी। हालांकि उस समय तक इसे बहुत ही कम लोग जानते थे, लेकिन समय के साथ बढ़ने के बाद से ये आज दुनिया की सबसे बड़ी एजुकेशनल टेक्नॉलजी कंपनी बन गई है।

हालांकि दोस्तों भले ही कंपनी आज जिस भी मुकाम पर खड़ी है लेकिन इसकी शुरुआत बायजू रविंद्रन नाम के एक भारतीय ने अकेले ही की थी। लेकिन किस तरह से एक आदमी से शुरुआत होने वाली कंपनी 3200 लोगों तक पहुंच चुकी है। दोस्तों इस कहानी की शुरुआत होती है कन्नौज के एक छोटे से गांव अजी कोठे से जो बैजू रविंद्रन का जन्म एक बड़े से ज्वाइंट फैमिली में हुआ। उनके पिता का नाम भी रविंद्रन और मां का नाम शोभना वल्ली है और दोनों ही प्रोफेशनली एक टीचर थे।

हालांकि बैजू का कहना है कि बचपन में उनका पढ़ाई लिखाई से ज्यादा मन फुटबॉल और क्रिकेट खेलने में लगता था, जिसके चलते वह कई बार क्लास बंक भी किया करते थे। लेकिन बायजू के अनुसार उनके माता पिता ने कभी भी उन पर पढ़ाई लिखाई के लिए दबाव नहीं बनाया क्योंकि खासकर बायजू के पिता का मानना था कि आप स्कूल की क्लासेज से ज्यादा क्लास के बाहर सीखते हैं और इसी तरह से मलयालम मीडियम स्कूल से बायजू ने अपनी शुरुआती पढ़ाई पूरी की और यहां पर पढ़ाई करते हुए उनका मैथ काफी स्ट्रांग था।

हालांकि क्रिकेट की कमेंट्री सुनकर उन्होंने खुद इंग्लिश बोलना भी सीख लिया था और फिर आगे चलकर इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद से बायजू की एक विदेशी मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब लग गई और वहां पर उन्हें अच्छी खासी सैलरी भी मिलने लगी। हालांकि यहां भी दो सालों तक काम करते हुए एक आम आदमी की तरह ही बायजू ने भी कभी भी स्टार्टअप का नहीं सोचा था।

इसी बीच किसी काम की वजह से उन्हें बेंगलौर आना पड़ा, जहां पर उनके कुछ दोस्त कैट की तैयारी कर रहे थे और चूंकि बायजू मैथ्स में काफी अच्छे थे, इसीलिए उनके दोस्तों ने उनसे कैट की एग्जाम की तैयारी में उनकी मदद मांगी और बायजू ने उनकी मदद तो की ही लेकिन साथ ही साथ उन्होंने भी मजे के लिए ही कैट की फॉर्म भर दी और एग्जाम दिया। और फिर सिर्फ मजे के लिए दिए गए इस एग्जाम में उन्होंने 100 पर्सेंटाइल स्कोर किया। हालांकि एमबीए में कोई दिलचस्पी न होने की वजह से वह वापस लौट गए।

लेकिन 2005 में जब वह एक बार फिर से भारत वापस आए तब उनके दोस्तों ने फिर से उनकी मदद मांगी और इस बार वह छह हफ्तों के लिए बेंगलौर में थे, जिसमें के लगभग 1000 स्टूडेंट्स की उन्होंने तैयारी करवाई और वैसे शुरुआती वर्कशॉप तो उनके फ्री में थे, लेकिन अगर लोगों को उनकी क्लास पसंद आती थी तो वह आगे वर्कशॉप के लिए पैसे भी देते थे।

फिर जब बायजू ने यह देखा कि लोगों से उन्हें बहुत ही अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है, तब उन्होंने अपनी जॉब छोड़कर टीचिंग के क्षेत्र में ही कुछ बड़ा करने का फैसला किया और फिर धीरे धीरे बायजू 4 से 5 अलग अलग शहरों में पढ़ाने लगे थे। यहां तक की उनकी लोकप्रियता इतनी ज्यादा बढ़ गई थी कि कई बार उन्होंने स्टेडियम में भी क्लासेज ली थी और अब बायजू जॉब से कहीं ज्यादा टीचिंग से कमाने लगे थे।

साथ ही इसी बीच उनके स्टूडेंट्स ने उनकी क्लासेज का नाम बायजू क्लासेज कर दिया और फिर हायर लेवल के क्लासेज को पढ़ाने के बाद से जब बायजू को यह लगा कि भारत में एजुकेशन का बेस ही सही नहीं है तो फिर उन्होंने स्कूल के बच्चों को पढ़ाने पर फोकस किया।

Real Motivational Story

2011 में उन्होंने थिंग कैन लर्न नाम की एक कंपनी की शुरुआत की और यहां पर भी काफी कामयाबी के बाद से 2015 में बायजू रविंद्रन में बायजू लर्निंग ऐप लॉन्च किए, जिसे कि पहले ही साल में लगभग 55 लाख लोगों ने डाउनलोड किया और फिर इस ऐप्लिकेशन की लोकप्रियता को देखते हुए जल्द ही बायजू को कई सारे इनवेस्टर्स भी मिल गए और इनवेस्टर्स के मिलने के बाद से जो कंपनी का ग्रोथ हुआ, उसका पूछना ही क्या।

2017 में जहां कंपनी की रेवेन्यू 260 करोड़ के आसपास थी, वहीं 2018 में वह 520 करोड़ पहुंच गई और आज कंपनी की वैल्युएशन भी करीब 37,000 करोड़ रुपये है। वहीं इस कंपनी ने 3200 से भी ज्यादा लोगों को जॉब दे रखा है और अगर इस कंपनी के लिए सबकुछ सही चलता रहा तो जल्दी ही देश के एजुकेशन सिस्टम में इस एप्लीकेशन के जरिए जरूर सुधार देखने को मिलेगा। उम्मीद करते हैं कि बायजू रविंद्रन की यह कहानी आपको जरूर पसंद आई होगी। आपका बहुमूल्य समय देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।

निष्कर्ष

बायजू रविंद्रन की Real Motivational Story हमें यह सिखाती है कि किसी भी लक्ष्य को हासिल करने के लिए सच्ची मेहनत, संघर्ष, और निरंतर प्रयास की आवश्यकता होती है। उनकी Real Motivational Story हमें यह भी बताती है कि किसी भी संघर्ष का समापन अगर सही दिशा में होता है, तो सफलता स्वयं ही आती है।

बायजू रविंद्रन की यह अद्भुत Real Motivational Story हमें यह सिखाती है कि आपके सपनों को पूरा करने के लिए न केवल मेहनत, बल्कि सही दिशा और संघर्ष भी महत्वपूर्ण होते हैं। उन्होंने अपने सपनों की पूर्ति के लिए हार नहीं मानी और अपने उद्यमी जूनून के साथ आगे बढ़ाकर दुनिया को एक उज्ज्वल उदाहरण प्रदान किया। इस वास्तविक प्रेरणादायक Real Motivational Story से हमें यह शिक्षा मिलती है कि कोई भी अपने सपनों को पूरा कर सकता है, बस उसे सही दिशा और प्रेरणा की आवश्यकता होती है।

Read More Interesting Posts

Kartik Maas Ki Kahani Hindi Mein

Motivational Story : कहानियाँ जो आपमें भर देगी ऊर्जा

How To Say Love You In Different Ways

मैं अटल हूँ : एक प्रेरणादायी व्यक्तित्व

Success Sonu Sharma Quotes

Thirsty Crow Story In Hindi

Short Motivational Story

Monk Story In Hindi

Leave a Comment