Panchtantra Ki Kahaniya In Hindi

Panchtantra Ki Kahaniya In Hindi “रंग बदला, दोस्ती बनी” में एक अनूठी गतिविधि के माध्यम से बताया गया है कि कैसे भगवान की कृपा और साथीता की महत्वपूर्णता से रिश्तों में सार्थकता बढ़ सकती है।Panchtantra Ki Kahaniya In Hindi में सफेद पक्षियों की चिंता और उनके विवादों का समाधान भगवान के सामर्थ्य से होता है। रंग बदलने की क्षमता से सफेद पक्षियाँ पहचानने में समर्थ हो जाती हैं और एक-दूसरे के साथ दोस्ती करती हैं।

Panchtantra Ki Kahaniya In Hindi से हमें यह सिखने को मिलता है कि समस्याओं का सामाजिक समाधान केवल सहयोग और समझदारी से ही हो सकता है। Panchtantra Ki Kahaniya In Hindi हमें दिखाती है कि कैसे समृद्धि और समर्थन के साथ, जीवन के रंग बदल सकते हैं और एक सकारात्मक दृष्टिकोण की ओर एक नई शुरुआत हो सकती है।

रंग बदला, दोस्ती बनी: एक प्रेरणादायक कहानी – Panchtantra Ki Kahaniya In Hindi

वो खरगोश एक था खरगोश एक नंबर का भुक्खड़ था। वो बहुत खाता था और सोता रहता था। हमेशा खाता दिन रात खाता रहता था। इतना खाता था फिर भी संतुष्ट नहीं होता था। एक बार क्या हुआ कि सभी खरगोश मटर के खेत में घुसे। सभी ने जल्दी जल्दी खाना खा लिया। पर अपने भुलक्कड़ खरगोश का खाना खत्म ही नहीं हो रहा था।

रंग बदला, दोस्ती बनी: एक प्रेरणादायक कहानी - Panchtantra Ki Kahaniya In Hindi

एक खरगोश ने उसे कहा, ये जल्दी चलना नहीं तो खेत का मालिक हमें देख लेगा और हमें पत्थरों से मारेगा। भुलक्कड़ खरगोश बोला, अरे रुक रे और खाता हूँ ना। बड़ी सी डकार लेता हूँ। और फिर हम चलेंगे नुक्कड़। खरगोश, भाकर भाकर खाने लगा। इस पर दूसरा खरगोश फिर बोला ये जल्दी करना।

वो देख टेकड़ी के ऊपर से खेत का मालिक आता हुआ दिख रहा है। इस पर भुक्खड़ खरगोश बोला अरे ठीक है, अरे अभी खेत तक तो नहीं पहुंचा ना खाने देना मुझे जरा और थोड़ा खाता हूँ, बड़ी सी डकार लेता हूँ और फिर हम चलेंगे। देखते देखते खेत का मालिक खेत में आ गया। सभी खरगोश चिल्लाने लगे भागो भागो। खेत का मालिक आ गया। खेत का मालिक आ गया। सभी खरगोश दौड़ने लगे। फटाफट लम्बी लम्बी छलांगे मारने लगे। भुक्खड़ खरगोश के 12 बज गए। उसका जोर से भागते बन रहा था और ना ही लंबी छलांगें मारते बन रहा था। सभी खरगोश खेत की मेड़ के ऊपर से कूद कूद कर जा रहे थे।

भुक्खड़ खरगोश ने भी कूदने की कोशिश की पर उसका पेट इतना भारी हुआ था कि वो कांटेदार मेड़ में ही गिर गया। उसको बहुत कांटे चुभे। उतने में खेत का मालिक हाथ में डंडा लेकर आया। उसने वो डंडा उठाया और भुक्खड़ खरगोश को दे मारा। वो खरगोश के पैरों में लगा। फिर लंगड़ाते लंगड़ाते, भुक्खड़ खरगोश जैसे तैसे भागने लगा। थोड़ी देर में उसका घर आया। खुश बच गया।

ऐसा सोचकर वह धीरे धीरे चलने लगा। उतने में वहां एक सियार दौड़कर आया। बाकी के खरगोश झट से घर में घुस गए। भुक्खड़ खरगोश पीछे रह गया। वह भी घर में घुसने लगा। पर उसका पेट खा खाकर इतना फूल गया था कि वह घर के अंदर नहीं घुस पाया। वह दरवाजे पर ही अटक गया। अंदर से सभी खरगोश उसे अंदर खींचने लगे। बाहर से सियार उसकी पूंछ पकड़कर उसे बाहर खींचने लगा। भुलक्कड़ खरगोश चिल्लाने लगा। रोने लगा, पर सियार ने उसकी पूंछ नहीं छोड़ी। आखिर में भुक्खड़ खरगोश की पूंछ ही कटकर निकल गई और सियार धड़ाम से पीछे गिर गया।

रंग बदला, दोस्ती बनी: एक प्रेरणादायक कहानी - Panchtantra Ki Kahaniya In Hindi

सभी खरगोशों ने भुक्खड़ खरगोश को जैसे तैसे घर के अंदर खींच लाया। बेचारा खरगोश। उसका भुलक्कड़ पन उसे ही रास नहीं आया। जान पर ही बनाई थी। पर पूंछ ने कीमत चुकाई। बदल चला। मेला घूमने। बच्चों। यह कहानी है एक मेले की। तुम्हें मेले के बारे में पता ही होगा ना? महाशिवरात्रि का मेला। बैसाखी का मेला। ऐसा ही एक मेला था। वहां जाने के लिए एक दिन एक मुर्गा, एक चूहा और एक गिलहरी घर से निकल पड़े। रास्ते में उन्हें एक बत्तख मिला। उसने पूछा अरे दोस्तों! मैं भी तुम्हारे साथ उस मेले में चलूं। यह सुनकर मुर्गा हंसने लगा। चूहा हंसा। गिलहरी भी हंसने लगी। चूहे ने कहा तुम कैसे आओगे?

मेले में तुम्हें तो ठीक से चलना भी नहीं आता। मुझे देखो मैं कितना जल्दी जल्दी चलता हूं। हम मेले में बहुत मजा करने वाले हैं। तुम्हें तो ठीक से चलना भी नहीं आता। तुम क्यों आ रहे हो मेले में? मुर्गे ने कहा, अरे बतख, तुम्हारे कपड़े तो बहुत ही सादे हैं। मेरे देखो कितने सुंदर रंग बिरंगे कपड़े हैं। मेले में जाने के लिए ऐसे ही रंग बिरंगे कपड़े लगते हैं। तुम हमारे साथ मेले में।

गिलहरी बोली अरे पागल! देख मेरी पूंछ कितनी लहरदार है। तेरी पूंछ तो एकदम छोटी सी है। अच्छा, तुम्हें पेड़ पर चढ़ना आता है क्या? बत्तख बोला नहीं, मुझे पेड़ पर चढ़ना नहीं आता। गिलहरी बोली फिर तो तुम बिल्कुल मेले में मताना। तुम मेले में आकर क्या करोगे? तुम्हें चलना नहीं आता, पेड़ पर चढ़ना नहीं आता। तुम्हारे कपड़े भी अच्छे नहीं हैं। अरे बतख। तुम्हें मेले में बिल्कुल नहीं आना चाहिए।

हम तुम्हें अपने साथ मेले में नहीं ले जाएंगे। बेचारा बतख बहुत ज्यादा उदास हो गया। मुर्गी, चूहा और गिलहरी निकल पड़े मेले की ओर। चलते चलते मेले में क्या क्या मजा करना है, ये बातें करने लगे। ये हम सबसे ऊंचे झूले में बैठेंगे। हां एक मैं तो बड़े से गोल झूले में बैठूंगा।

मैं तो मिठाई खाऊंगा। मैं तो फुग्गे लूंगा। मैं तो सीटी बजाऊंगा। मैं तो गेंद लूंगा। मेले में नहीं जाने के कारण बतख बहुत उदास हो गया था। पर वह धीरे धीरे चल रहा था। उसने मन में ठान ली थी मैं मेले में जाऊंगा, मतलब जाउंगा। उधर तीनों मतलब मुर्गा, चूहा और गिलहरी तेजी से चले जा रहे थे। मेले में जाने के लिए बत्तख की याद करके उसका मजाक उड़ा रहे थे।

चूहे ने कहा अच्छा हुआ उस भिखारी बत्तख को अपने साथ नहीं लाया। गिलहरी बोली सही बात है। वह लंगड़ा लूला बतख अच्छा हुआ अपने साथ नहीं आया। रास्ते में उन्हें एक नदी मिली। मुर्गे ने एक पैर नदी में डाला और झट से वापस आया। गिलहरी ने भी एक पैर पानी में डाला और तुरंत बाहर भाग आई।

रंग बदला, दोस्ती बनी: एक प्रेरणादायक कहानी - Panchtantra Ki Kahaniya In Hindi

चूहा भी एक कदम आगे गया और वापस आ गया। अब क्या करें? नदी पार किए बिना मेले में कैसे जाएंगे? उनमें से किसी को भी तैरना नहीं आता था। अब मेला वाला कुछ नहीं। तीनों बेचारे नदी के किनारे बैठकर रोने लगे। उतने में धीरे धीरे चलते हुए बत्तख आया। उसने देखा ये तीनों रो रहे थे। उसे समझ ही नहीं आया क्यों रो रहे थे।

इतने उत्साह से और खुशी से निकले थे। मेले में जाने के लिए अचानक रोने लगे। बत्तख ने पूछा अरे तुम सभी ऐसे रोक क्यों रहे हो? फिर क्या करें? तीनों बोले हमें तैरना नहीं आता। अब हम मेले में कैसे जाएंगे? नदी पार कैसे करेंगे? बत्तख बोला घबराओ नहीं, मैं तुम सभी को नदी के पार लेकर जाता हूं। मुझे तैरना आता है। बत्तख पानी में उतरा और एक गोल चक्कर मारकर किनारे पर आया। यह देखकर तीनों बहुत खुश हुए। अब सभी ने बतख से कहा अरे बतख ये मुझे नदी के पार ले चलना।

मैं तुझे मेला घुमाने ले जाऊंगा। बत्तख हँसा और बोला घबराओ नहीं, मैं तीनों को ही नदी के पार ले चलूंगा। देखा बच्चों। इन तीनों ने ही बतख को मेले में ले जाने से मना किया था पर बतख ने उनकी मदद की। फिर बतख ने एक उपाय सोचा। उसने एक लकड़ी की डाल लाई। उसे एक रस्सी से बांधा। मुर्गे को, गिलहरी को और चूहे को उस पर बैठाया और रस्सी चोंच में पकड़कर बतख तैरने लगा। सभी लोग नदी के उस पार आ गए। अब तीनों बहुत ही खुश थे। बत्तख तुम बहुत अच्छे हो। तुम भी चलो ना हमारे साथ।

मेले में हम सभी बहुत बहुत मजा करेंगे। हम तुम्हें खूब सारे पैसे देंगे। बतख हंसने लगा। फिर वे सभी मेले में गए। बहुत मजे किए और फिर बच्चों। मालूम है उस दिन के बाद से बत्तख की और उन तीनों की गहरी दोस्ती हो गई। कौवा काला क्यों? बहुत बहुत सालों पहले सभी पक्षी सिर्फ सफेद रंग के ही होते थे। इसके कारण पता ही नहीं चलता था कि कौन सा पक्षी कौन सा है। यही पहचान में नहीं आता था। अब आप ही कल्पना करो। हरे भरे पेड़ पर अगर एक सफेद तोता बैठा हो तो वह तुरंत दिख जाएगा कि नहीं।

इसलिए ऐसा ही होता था। और सभी शिकारियों की मौज होती थी। उनको वे सफेद पक्षी तुरंत दिख जाते थे। और इसलिए हुआ ये कि सभी पक्षी घबरा गए। चिडिय़ा, तोता, चील, गरूड़, मोर सभी पक्षी जमा हुए और उन्होंने अपनी यह शिकायत भगवान जी से की। भगवान को उनकी बात समझ में आई। वे बोले। ओह पक्षियों, मैं अब रंग बनाता हूं। ठीक आठ दिन बाद सभी पक्षियों को जमा करके मेरे पास लाओ।

मैं तुम सभी को रंग दूँगा। हम सभी पक्षी उस दिन का इन्तजार करने लगे और भगवान के पास जाने का वह दिन आ ही गया। सभी ने एक दूसरे को बुलाया और वे सभी भगवान के पास पहुँच गये। पहला नम्बर था तोते का। उसने कहा हे भगवान!”

निष्कर्ष

Panchtantra Ki Kahaniya In Hindi का संगीत सुरु हो गया जब भगवान ने पक्षियों को रंग बदलने की शक्ति दी। तोते ने अपनी नीली रंग की तारीके से बात की और सभी पक्षियों ने एक-दूसरे के रंग बदलने में मदद की। इस सहयोग ने उन्हें साथ लाकर एक नई दोस्ती की ऊँचाईयों तक पहुंचाई।

तोते, चील, गरूड़, चिड़ीया, मोर, और तमाम पक्षियों ने मिलकर भगवान की कृपा से एक साथी रंगीन जगह बना ली। इस परम्परागत रंग बदलने ने उन्हें दुनियाभर में पहचान दिलाई और एक दूसरे की भलाइयों का ध्यान रखने का सिखाया।

Panchtantra Ki Kahaniya In Hindi का संदेश है कि हमें अपने विभिन्नता को स्वीकार करना चाहिए और सहयोग करके ही हम अधिक से अधिक प्राप्त कर सकते हैं। इसने हमें यह सिखाया कि जब हम साथ मिलकर काम करते हैं, तो कोई भी मुश्किल हमारे रास्ते में नहीं आ सकती। इस रंगीन दोस्ती ने सभी को मिलकर एक सुंदर और प्रेरणादायक जीवन की ओर अग्रसर किया।

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