Motivational Story : कहानियाँ जो आपमें भर देगी ऊर्जा

“Motivational Story” शब्द से ही भरा है जो एक अद्वितीय और प्रभावी रूप से लिखी गई कहानी को संदर्भित करता है। यह शब्द वहां से आता है जहां हमें उत्साहित करने वाली एक शक्तिशाली संदेश मिलता है कि जीवन में हर कदम पर कुछ सिख होती है और अगर हम सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखते हैं, तो हर मुश्किल को पार कर सकते हैं।

“Motivational Story” के अंदर छुपी बातें हमें उस साहस और उत्साह की ओर मोड़ती हैं जो हमें अपने लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं। इसमें जीवन की हर दहलीज पर आने वाले चुनौतियों का सामना करने वाले व्यक्ति की कहानी होती है, जो अपने सपनों की पूर्ति के लिए हर संघर्ष को स्वीकार करता है।

“Motivational Story” हमें सिखाती है कि अगर हम अपने लक्ष्यों के प्रति समर्पित हैं और हर चुनौती को साहस से आना स्वीकार करते हैं, तो हम किसी भी मुश्किल को पार कर सकते हैं और अपने सपनों की पूर्ति कर सकते हैं।

Motivational Story: दादा की सीख देने वाली कहानी

Motivational Story: दादा की सीख देने वाली कहानी
Motivational Story: दादा की सीख देने वाली कहानी

एक बार की बात है, एक गांव में एक 10, 12 साल का लड़का अपने माता पिता के साथ रहता था। तो एक दिन वो लड़का कई सालों के बाद अपने दादा जी के गांव जाता है। वहां जाकर वह हर समय अपने दादाजी के साथ खेलता है तो खेलते खेलते उसने एक दिन अपने दादाजी से कहा कि दादाजी जब मैं बड़ा हो जाऊंगा तो मैं बहुत ज्यादा सक्सेसफुल बनकर दिखाऊंगा। क्या आप मुझे कामयाब बनने के लिए कुछ तरीके बता सकते हैं? तो उसके दादाजी मुस्कुराते हुए उसकी तरफ देखते हैं और उसे हां कहते हैं। वह उसे पौधों की दुकान पर ले जाते हैं, जहां पर छोटे छोटे पौधे मिलते थे।

वहां से उसके दादाजी दो छोटे पौधे खरीदते हैं और वापस घर आ जाते हैं। घर आने के बाद वह उनमें से एक पौधे को बड़े से गमले में लगा देते हैं और उस गमले को घर के अंदर रख देते हैं और दूसरे पौधे को वह घर के बाहर लगा देते हैं।

फिर वह अपने पोते से पूछते हैं कि तुम्हें क्या लगता है, कौन सा पौधा फ्यूचर में अच्छे से बड़ा हो पाएगा? बच्चे ने थोड़ा सोचा और अपने दादाजी से कहा कि हमने घर के अंदर जो पौधा लगाया है वह अच्छे से बड़ा हो पाएगा क्योंकि घर के अंदर हर प्रॉब्लम से सेफ रहेगा और जो पौधा हमने बाहर लगाया है उसे बहुत सी चीजों का रिस्क है।

जैसे कि सूरज की तेज किरणें, आंधी तूफान, तेज बारिश और जानवरों से भी उस पौधे को रिस्क है। उसके दादा जी ने मुस्कुराया और उससे कहा कि फ्यूचर में देखते हैं इन दोनों पौधों के साथ क्या होता है। फिर चार साल बाद वह लड़का फिर से अपने दादाजी के घर जाता है। दादाजी को देखने के बाद वह फिर से उनसे पूछता है कि दादाजी लास्ट टाइम मैंने आपसे पूछा था कि जिंदगी में सक्सेसफुल कैसे होते हैं? लेकिन आपने मुझे कुछ नहीं बताया था। लेकिन अब आपको मुझे बताना ही पड़ेगा। उसके दादाजी ने मुस्कुराते हुए उससे कहा जरूर, लेकिन सबसे पहले हम उन दो पौधों को देखते हैं जो हमने कुछ साल पहले लगाया था।

यह कहकर उसके दादाजी उसे उसी जगह पर ले गए जहां उन्होंने घर के अंदर जो पौधा रखा था। उन्होंने देखा कि वह पौधा एक बड़ा पौधा बन चुका था। फिर वह उस जगह पर गए जहां उन्होंने दूसरे पौधे को बाहर लगाया था। उन्होंने देखा कि वह छोटा सा पौधा अब एक बहुत बड़ा और विशाल पेड़ बन चुका था। उसकी जो टहनियां थी वह बहुत ही मजबूत और लंबी थी और उसका साया पूरे ग्राउंड पर पड़ रहा था। अब उस लड़के के दादाजी ने उसकी तरफ देखा और उससे कहा कि बताओ कौन सा पौधा ज्यादा बड़ा और मजबूत हो चुका है, कौन सा पौधा ज्यादा सक्सेसफुल हुआ है।

लड़के ने कहा, वह पौधा जो हमने बाहर लगाया था। लेकिन दादा जी यह कैसे संभव है? इस पौधे ने कई डेंजर सिचुएशन सही होंगी। इस पर कई प्रॉब्लम्स आई होंगी, लेकिन फिर भी यह पौधा इतना बड़ा पेड़ कैसे बन गया? उसके दादाजी ने उसकी तरफ देखा और कहा, तुमने ठीक कहा। जो पौधा हमने बाहर लगाया था, उसने कई प्रॉब्लम्स सही होंगी और उन्हीं प्रॉब्लम्स से डील करते हुए वह इतना बड़ा और विशाल हो पाया है।

अब वह जितना चाहे उतना अपनी टहनियों को बड़ा कर सकता है। और जो आंधी तूफान और तेज बारिश जैसी प्रॉब्लम्स है, वह उसकी टहनियों को और भी मजबूत बनाती है। और इसी वजह से आज वो एक बहुत विशाल पेड़ बन चुका है और अब ये सारी प्रोब्लम्स उसके सामने छोटी है। फिर उसके दादा जी ने उसकी तरफ देखा और उससे कहा कि बेटा एक चीज हमेशा याद रखना जब तक तुम अपनी लाइफ में स्ट्रगल नहीं करोगे, जब तक तुम डिफिकल्टी से नहीं गुजरेंगे, तब तक तुम अपनी लाइफ में सक्सेस को अचीव नहीं कर सकते हो।

अगर तुम अपनी लाइफ में हमेशा कम्फर्टेबल चॉइस रखोगे तो तुम अपनी लाइफ में उतना ग्रो नहीं कर पाओगे, जितना तुम कर सकते हो। और अगर तुम्हारे प्रॉब्लम के लिए तैयार रहोगे, हमेशा स्ट्रगल के लिए रेडी रहोगे तो फिर किसी भी मंजिल को पाना तुम्हारे लिए असंभव नहीं होगा और फिर बड़ी बड़ी प्रॉब्लम्स तुम्हें छोटी लगने लगेगी। यह सुनने के बाद उस लड़के ने एक गहरी सांस ली और फिर उस विशाल और बड़े पेड़ की तरफ वह देखने लगा।

उसके दादा जी के शब्द उसके दिमाग में घूम रहे थे। दोस्त, प्रॉब्लम्स, रुकावट, डिफिकल्टी इन चीजों को हम अपनी जिंदगी के दुश्मन समझते हैं। लेकिन यही रुकावटें, यही डिफिकल्टी हमें स्ट्रॉन्ग बनाती है और अपनी जिंदगी में ज्यादा सक्सेसफुल बनाती हैं। किसी ने कहा है ना कि अगर आपकी लाइफ में प्रॉब्लम्स नहीं आ रही है तो समझ जाओ कि आप गलत ट्रैक पर हो।

Motivational Story: जीवन में सही मूल्यों का चयन

Motivational Story: जीवन में सही मूल्यों का चयन

एक बार एक बच्चे ने अपने पापा से पूछा पापा मेरी लाइफ की क्या वैल्यू है? तभी पापा ने कहा, अगर तुम सच में अपनी जिंदगी की कीमत समझना चाहते हो तो मैं तुम्हें एक पत्थर देता हूं। इस पत्थर को लेकर मार्केट में चले जाना और अगर कोई इसकी प्राइस पूछे तो कुछ मत कहना। बस अपनी दो उंगली खड़ी कर देना। वह लड़का मार्केट गया।

कुछ देर तो वहां ऐसे ही बैठा रहा, लेकिन कुछ देर बाद ही एक बूढ़ी औरत उसके पास आई और उस पत्थर का प्राइस पूछने लगी। वह लड़का एकदम चुप रहा। उसने कुछ नहीं कहा और अपनी दो उंगलियां खड़ी कर दी। तभी वह बूढ़ी औरत बोली, ₹200। ठीक है, इस पत्थर को मैं तुमसे खरीद लूंगी।

बच्चा एकदम से शॉक्ड हो गया कि एक पत्थर की कीमत ₹200। क्योंकि पत्थर जनरली कहीं पर भी मिल जाते हैं लेकिन उसका प्राइस ₹200। वो तुरंत अपने पापा के पास गया और बोला पापा मुझे मार्केट में एक बूढ़ी औरत मिली थी और इस पत्थर के ₹200 देने के लिए तैयार थी। पापा ने कहा इस बार तुम। म्यूजियम में लेकर जाना और अगर कोई इसका प्राइस पूछे। कुछ मत कहना। बस अपनी दो उंगली खड़ी कर देना। वो लड़का म्यूजियम में गया। वहां पर एक आदमी की नजर उसके हाथ में रखे पत्थर पर पड़ी और तभी उसने उस। थर का प्राइस पूछा।

वह बच्चा एकदम चुप रहा और उसने अपनी दो उंगलियां खड़ी कर दी। तभी वह आदमी बोला, ₹20,000। ठीक है, मैं तुम्हें इस पत्थर के ₹20,000 देने को तैयार हूं। ये पत्थर तुम मुझे दे दो। वह लड़का फिर से चौंक गया और जाकर अपने पापा से कहा, पापा, म्यूजियम में मुझे एक आदमी मिला था और इस पत्थर के ₹20,000 देने को तैयार था। तब उसके पापा ने कहा। अब मैं तुम्हें आखिरी जगह भेजने जा रहा हूं और अब तुम्हें जाना है।

कीमती पत्थरों की दुकान पर है और अगर वहां पर भी कोई प्राइस पूछे तो कुछ मत कहना। बस अपनी दो उंगलियां खड़ी कर देना। वो लड़का जल्दी से कीमती पत्थरों की दुकान पर गया और उसने देखा कि बुढा आदमी था जो काउंटर के पीछे खड़ा था। जैसे ही उस बूढ़े इंसान की नज़र उस पत्थर पर पड़ी वो एकदम शॉक्ड हो गया। वो काउंटर से बाहर निकला और तुरंत उस बच्चे के हाथ से पत्थर छुड़ा लिया और बोला ओह माई गॉड! इस पत्थर की तलाश में मैंने अपनी पूरी जिंदगी गुजार दी।

कहां से मिला पत्थर और क्या इसका कितना लोगे? तुम इस पत्थर के लिए? वो बच्चा तब भी चुप रहा और अपनी दो उंगलियां खड़ी कर दी। तभी वो बूढ़ा आदमी बोला कितने ₹2 लाख? ठीक है, मैं इसके लिए तुम्हें ₹2 लाख देने को तैयार हूं। प्लीज तुम ये पत्थर मुझे दे दो। उस लड़के को अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था। वो जल्दी से अपने पापा के पास पहुंचा और बोला पापा! बूढ़ा आदमी इसके लिए ₹2 लाख देने को तैयार है।

तभी उसके पापा ने कहा क्या तुम समझे अपनी लाइफ की वेल्यू। आपकी लाइफ की वैल्यू इस बात पर डिपेंड करती है कि आप अपने आप को कहां रखते हैं। ये आपको डिसाइड करना है कि आपको ₹200 का पत्थर बनना है या फिर ₹2 लाख का। जिंदगी में कई सारे ऐसे लोग होते हैं जो आपसे बहुत प्यार करते हैं। उनके लिए आप सब कुछ हैं और कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो आपको सिर्फ एक वस्तु के रूप में उपयोग करेंगे। उनके लिए आप कुछ भी नहीं हैं। ये आपके ऊपर डिपेंड करता। कि आपकी लाइक की वैल्यू क्या होगी।

यह कहानी हमें एक महत्वपूर्ण सिख देती है कि हमारी जिंदगी की मूल्य उसी तक महसूस होता है, जितना हम खुद उसे महत्वपूर्ण मानते हैं। बच्चे ने एक साधारित पत्थर को लेकर कौन-कौन से स्तरों की मूल्यांकन किये, यह दिखाता है कि उसने अपनी जिंदगी को कितना महत्वपूर्ण माना।

Motivational Story: मेहनत का फल

मेहनत का फल क्यों मीठा होता है? तो चलिए इस कहानी के माध्यम से मैं बताने वाला हूं तो बेटियों को बिल्कुल भी स्किप नहीं कीजिएगा। एक नगर में प्रतिष्ठित व्यापारी रहते थे जिन्हें बहुत समय बाद एक पुत्र की प्राप्ति हुई थी। उनका नाम चंद्रकांत रखा गया। चंद्रकांत घर में बहुत सबसे बड़ा दुलारा व्यक्ति थे।

Motivational Story: मेहनत का फल
Motivational Story: मेहनत का फल

अति कठिनाईयों एवम लम्बे समय इन्तजार के बाद संतान का सुख मिलने पर घर के प्रत्येक व्यक्ति के मन में व्यापारी के पुत्र चंद्रकांत के प्रति विशेष लाड प्यार था जिसने चंद्रकांत को बहुत बिगाड़ दिया था। घर में किसी भी बात का अभाव नहीं था। चंद्रकांत की मांग से पहले ही उसकी सभी इच्छाएं पूरी कर दी जाती थी। शायद इसी के कारण चंद्रकांत को न सुनने की आदत नहीं थी, न ही मेहनत के महत्व का आभास था। चंद्रकांत ने जीवन में कभी अभाव नहीं देखा था, इसलिए उसका नजरिया जीवन के प्रति बहुत अलग था और वही व्यापारी के। कड़ी मेहनत से अपना व्यापार बनाता था।

ढलती उम्र के साथ अपने कारोबार के प्रति चिंता होने लगी थी। व्यापारी को चंद्रकांत के बाहर से प्रत्यक्ष था कि उसके पुत्र को मेहनत का फल का महत्व नहीं मिल पाता। उसे आभास हो चुका था कि उसके लाड प्यार ने चंद्रकांत को जीवन की वास्तविकता और जीवन में महत्व के मेहनत के महत्व से बहुत दूर कर दिया था। गहन चिंतन के बाद व्यापारी ने निश्चय किया कि वह चंद्रकांत को मेहनत का, फल का महत्व एवं समय सिखाएगा।

चाहे उसके लिए उसे कठोर क्यों न बनना पड़े। व्यापारी ने चंद्रकांत को अपने पास बुलाया और बहुत ही तीखे स्वर में उससे बात की। उसने कहा कि तुम्हारे मेरे परिवार में कोई अस्तित्व नहीं है। तुमने मेरे कारोबार में कोई योगदान नहीं दिया और इसीलिए मैं चाहता हूँ कि तुम अपनी मेहनत से धन कमाओ। तभी तुम्हें तुम्हारे धन के मुताबिक दो वक्त का खाना दिया जाएगा।

यह सुनकर चंद्रकांत ज्यादा कोई फर्क नहीं पड़ा। उसने उसे झाँका भर का गुस्सा समझ लिया। लेकिन व्यापारी ने भी ठान लिया कि उसने घर के सभी सदस्यों को आदेश दिया कि कोई चंद्रकांत की मदद नहीं करेगा और न ही उसे भी चंद्रकांत से सभी बहुत प्यार करते थे। धन के भोजन दिया जाएगा, जिससे उसने बहुत फायदा उठाया और रोज किसी न किसी के पास जाकर धन मांग लाता और अपने पिता को दे देता और व्यापारी उसे उन पैसों को कुएं में फेंकने का बोलता जिससे चंद्रकांत के बिना किसी अड़चन के फेंका था और उसे रोज भोजन मिल जाता।

ऐसा कोई दिन तक चलता रहा। लेकिन अब घर के लोगों को रोज रोज धन देना भारी पड़ने लगा। सभी उसने अपने अन्न काटने लगे जिस कारण चंद्रकांत को मिलने वाला धन कम होने लगा और उस धन के हिसाब से उसका भोजन कम होने लगा। एक दिन चंद्रकांत को किसी ने धन नहीं दिया और उसे अपनी भूख को शांत करने के लिए गांव में जाकर कार्य करना पड़ा। उस दिन वह बहुत देर से थका हारा व्यापारी के पास पहुंचा और धन देकर भोजन मांगा।

रोज के अनुसार व्यापारी ने उसे धन को कुएं में फेंकने का आदेश दिया, जिससे स्थान का चंद्रकांत सहजता से स्वीकार नहीं कर पाया और उसे पलटकर जवाब दिया। पिताजी ने बोले मैं इतनी मेहनत करके पसीना बहाकर इस धन को लाया और आपने मुझे एक क्षण में इसे कुएं में फेंकने का दिया।

यह सुनकर व्यापारी समझ गया कि आज चंद्रकांत मेहनत के फल का मा समझ में आ गया। व्यापारी भली भांति जानता था कि उसके परिवार वाले चंद्रकांत की मदद कर रहे हैं। तभी चंद्रकांत इतनी आसानी से आता था, लेकिन उसे पता था एक न एक दिन सभी परिवार जन चंद्रकांत की कन्नी काट लेंगे। उस दिन के चंद्रकांत के पास कोई विकल्प शेष नहीं होगा। व्यापारी ने चंद्रकांत को गले लगा लिया और उतना सारा कारोबार उसे सौंप दिया।

आज के समय में उच्च वर्ग के परिवारों की संतानों का मेहनत का फल कम मेहनत पता नहीं होता है और ऐसे में यह दायित्व उनके माता पिता का होता है कि वह अपने बच्चे को जीवन की वास्तविकता से अवगत कराएं।

लक्ष्मी उसी का घर आती है जहां उसका सम्मान होता है। मेहनत ही एक ऐसी हथियार है जो मनुष्य को किसी भी परिस्थितियों से बाहर ला सकता है। व्यापारी के पास इतना धन तो था, लेकिन चंद्रकांत को उसकी आने वाली पीढ़ी बिना किसी मेहनत के जीवन आसानी से निकाल लेते थे। लेकिन अगर आज व्यापारी अपने पुत्र को मेहनत का महत्व नहीं बताता। तो एक दिन, एक दिन व्यापारी की आनेवाली पीढ़ी व्यापारी को कोसती।

Motivational Story: चिड़िया की सीख

आज की कहानी में चिड़िया की नसीहत। एक शख्स ने चिड़िया पकड़ने के लिए जाल बिछाया। इत्तफाक से चिड़िया उसमें फंस गई और शिकारी ने उसे पकड़ लिया। चिड़िया ने उससे कहा, इंसान तुमने आज तक कई हिरन, बकरे और मोर खाए हैं। उन चीजों के मुकाबले में मेरी क्या हैसियत है? जरा सा गोश्त मेरे जिस्म में है, उससे तुम्हारा क्या बनेगा? तुम्हारा तो पेट भी नहीं भरेगा।

Motivational Story: चिड़िया की सीख
Motivational Story: चिड़िया की सीख

लेकिन अगर तुम मुझे आजाद कर दो तो मैं तुम्हें तीन नसीहतें करुँगी, जिन पर अमल करना तुम्हारे लिए बहुत फायदेमंद साबित होगा। उनमें से एक नसीहत तुम्हें अभी करूंगी, जबकि दूसरी उस वक्त जब तुम मुझे छोड़ दोगे और मैं दीवार पर जा बैठूंगी। उसके बाद तीसरी और आखिरी नसीहत उस वक्त करूंगी जब दीवार से उड़कर सामने दरख्त की शाख पर जा बैठूंगी।

उस शख्स के दिल में जासूस पैदा हुआ कि न जाने चिड़िया क्या फायदेमंद नसीहत करे। उसने चिड़िया की बात को मानते हुए उससे कहा, तुम मुझे पहली नसीहत करो, फिर मैं तुम्हें छोड़ दूंगा। चुनांचे चिड़िया ने कहा मेरी पहली नसीहत यह है कि जो बात कभी नहीं हो सकती, उसका यकीन हरगिज मत करना। यह सुनकर उस आदमी ने चिड़िया को छोड़ दिया और वह सामने दीवार पर जा बैठी और फिर बोली मेरी दूसरी नसीहत यह है कि जो बात हो जाए उसका गम हरगिज न करना। और फिर कहने लगी भलेमानस, तुमने मुझे छोड़

कर बहुत बड़ी गलती की है क्योंकि मेरे पेट में पाव भर का इन्तहा ही नया पत्थर है। अगर तुम मुझे जिबह करते और मेरे पेट से उस मोती को निकाल लेते तो इसको फरोख्त करने से तुम्हें इस कदर दौलत हासिल होती कि तुम्हारी आने वाली कई नस्लों के लिए काफी होती और तुम बहुत बड़े रईस हो जाते। उस शख्स ने जो यह बात सुनी तो लगा अफसोस करने और बहुत पछताया कि इस चिड़िया को छोड़ कर अपनी जिंदगी की बहुत बड़ी गलती की।

अगर इसे न छोड़ता तो मेरी नस्लें सवर जाती। चिड़िया ने उसे इस तरह सोच में पड़े देखा तो उड़कर दरख्त की शाख पर जा बैठी और बोली, भलेमानस! मैंने तुम्हें पहली नसीहत की जिसे तुम भूल गए कि जो बात कभी न हो सकने वाली हो, इसका हरगिज यकीन मत करना। लेकिन तुमने मेरी उस बात का एतबार कर लिया कि मैं छटांक भर वजन रखने वाली चिड़िया अपने पेट में एक पाव वजन कम होती रखती हूं।

क्या यह मुमकिन है? मैंने तुम्हें दूसरी नसीहत यह की थी कि जो बात हो जाए, उसका गम हरगिज न करना। मगर तुमने दूसरी नसीहत का भी कोई असर न लिया और गम अफसोस में मुब्तला हो गई कि ख्वाब हुआ ही मुझे जाने दिया। तुम्हें कोई भी नसीहत करना बिल्कुल बेकार है। तुमने मेरी पहली दो नसीहतों पर कब अमल किया है, जो तुम तीसरी पर करोगे?

तुम नसीहत के काबिल ही नहीं हो। यह कहते हुए चिड़िया फिर से उड़ी और हवा में परवाज कर गई। वह शख्स वहीं खड़ा चिड़िया की बातों पर फिकर करते हुए सोचों में गुम हो गया।

दोस्तो, इस कहानी का मकसद यह है कि वह लोग बहुत खुशनसीब होते हैं जिन्हें कोई नसीहत करने वाला हो। हम अक्सर खुद को अकेले कूल समझते हुए अपने मुफलिस साथियों और बजुर्गों की नसीहतों पर कान नहीं धरते। इसमें नुकसान हमारा ही होता है। ये नसीहतें सिर्फ कहने की बातें नहीं होती कि किसी ने कह लिया और हमने सुन लिया बल्कि दाना और दूसरों के तजुर्बा से हासिल होने वाले अनमोल से होते हैं, जो यकीनन हमारे लिए मशाले साबित हो सकते हैं।

Motivational Story: नन्ही चिड़िया की कहानी

एक समय की बात है। एक घना जंगल था, जिसमें हर तरह के छोटे बड़े जानवरों और पंछियों का बसेरा था। उसी जंगल के एक पेड़ पर घोसला बनाकर एक नन्ही चिड़िया भी रहा करती थी। एक दिन उस जंगल में भीषण आग लग गई। समस्त प्राणियों में हाहाकार मच गया। सब अपनी जान बचाकर भागने लगे।

Motivational Story: नन्ही चिड़िया की कहानी
Motivational Story: नन्ही चिड़िया की कहानी

नन्ही चिड़िया जिस पेड़ पर रहा करती थी, वह भी आग की चपेट में आ गई। गया था। उसे भी अपना घोसला छोड़ना पड़ा। लेकिन वह जंगल की आग देखकर घबराई नहीं, परंतु तुरंत नदी के पास गई और अपनी चोंच में पानी भरकर जंगल की ओर लौटी। चोंच में भरा पानी आग में पानी छिड़ककर वह फिर नदी की ओर गई। इस तरह नदी से अपनी चोंच में पानी भरकर बार बार जंगल की आग में डालने लगी। जब बाकी जानवरों ने उसे ऐसा करते देखा तो हंसने लगे और बोले अरे चिड़िया रानी, यह क्या कर रही हो? चोंच भर पानी से जंगल की आग बुझा रही हो।

मूर्खता छोड़ो और प्राण बचाकर भागो। जंगल की आग से नहीं बुझेगी। उनकी बातें सुनकर नन्ही चिड़िया बोली, तुम लोगों को भागना है तो भागो, मैं नहीं भाग दूंगी। ये जंगल मेरा घर है और मैं अपने घर की रक्षा के लिए अपना पूरा प्रयास करूंगी। फिर कोई मेरा साथ दे न दे। चिड़िया की बात सुनकर सभी जानवरों के सिर शर्म से झुक गए। उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ। सब सबने नन्ही चिड़िया से क्षमा मांगी और फिर उसके साथ जंगल में लगी आग बुझाने के प्रयास में जुट गए। अंततः उन्हीं की मेहनत रंग लाई और जंगल में लगी आग बुझ गई।

READ MORE

Leave a Comment