Moral Stories In Hindi For Class 5

आप अपने बच्चों को नैतिक शिक्षा देना चाहते हैं? आप उन्हें रोचक और प्रेरणादायक कहानियां सुनाना चाहते हैं? तो आपको हमारी वेबसाइट पर आना चाहिए। हमारी वेबसाइट पर आपको Moral Stories in Hindi for Class 5 का संग्रह मिलेगा। ये कहानियां आपके बच्चों को जीवन के मूल्य, अच्छाई, बुराई, लालच, ईमानदारी, साहस, दया, और अन्य गुणों के बारे में सिखाएंगी। ये कहानियां आपके बच्चों को लोगों और दुनिया को समझने में मदद करेंगी।

एकता में शक्ति – Moral Stories In Hindi For Class 5

एक बार की बात है, एक गांव में एक बुजुर्ग व्यक्ति रहता था। उसके चार बेटे थे, जो आपस में लड़ते-झगड़ते रहते थे। वह उन्हें बार-बार समझाता था, लेकिन वे उसकी बातों पर ध्यान नहीं देते थे।

Moral Stories In Hindi For Class 5
Moral Stories In Hindi For Class 5

एक दिन, वह बीमार पड़ गया और अपने बेटों को बुलाया। उसने उनसे कहा, “मुझे ज्यादा दिन नहीं बचे हैं। मुझे तुम्हारी एक बात पूछनी है।” उसने एक लकड़ी का डंडा उठाया और उसे अपने सबसे बड़े बेटे को दिया। उसने कहा, “इस डंडे को तोड़ कर दिखाओ।” बड़ा बेटा ने डंडे को आसानी से तोड़ दिया। फिर उसने डंडे के दो टुकड़े अपने दूसरे बेटे को दिए और कहा, “इन्हें भी तोड़ कर दिखाओ।” दूसरा बेटा ने भी वैसा ही किया। फिर उसने चौथे टुकड़े अपने तीसरे बेटे को और पांचवे टुकड़े अपने छोटे बेटे को दिए और कहा, “इन्हें भी तोड़ कर दिखाओ।” तीसरा और छोटा बेटा ने भी उन्हें तोड़ दिया।

बुजुर्ग ने उनसे कहा, “अब इन सभी टुकड़ों को एक साथ बांध दो और फिर से तोड़ने की कोशिश करो।” बेटों ने ऐसा किया, लेकिन वे उन्हें तोड़ नहीं पाए। वे एक-दूसरे को देखते रह गए।

बुजुर्ग ने उन्हें समझाया, “यही तुम्हारी कहानी है। जब तुम अकेले होते हो, तो तुम्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता। लेकिन जब तुम आपस में लड़ते हो, तो तुम आपस में ही तोड़े जाते हो। अगर तुम एकजुट होकर रहोगे, तो तुम्हारी ताकत बढ़ जाएगी और तुम्हें कोई भी नहीं हरा सकेगा।”

बेटों ने अपने पिता की बातों को समझा और उन्हें माफी मांगी। वे वादा किया कि वे आपस में प्रेम और सद्भाव से रहेंगे। बुजुर्ग को उनकी एकता देखकर बहुत खुशी हुई।

शिक्षा: एकता में शक्ति है।

दया और करुणा – Moral Stories In Hindi For Class 5

एक बार की बात है, एक जंगल में एक शेर और एक लोमड़ी रहते थे। वे दोनों दोस्त थे और एक साथ शिकार करते थे। एक दिन, वे एक बकरी को पकड़ने का प्लान बनाते हैं। वे बकरी के पास जाते हैं और उसे डराते हैं। बकरी भागने की कोशिश करती है, लेकिन वे उसे घेर लेते हैं।

LION AND FOX
LION AND FOX

शेर ने कहा, “अब तुम्हारा अंत हो गया है। हम तुम्हें खा जाएंगे।” बकरी ने दया भीख मांगी और कहा, “कृपया मुझे बख्श दो। मुझे छोटे-छोटे बच्चे हैं, जो मुझे इंतजार कर रहे हैं। वे बिना मुझे नहीं रह सकते।” शेर ने उसकी बातों पर ध्यान नहीं दिया और कहा, “यह तुम्हारा बहाना है। तुम बस अपनी जान बचाने की कोशिश कर रही हो। हम तुम्हें नहीं छोड़ेंगे।”

लोमड़ी ने शेर से कहा, “दोस्त, तुम बहुत निर्दयी हो। बकरी की बात सच है। उसके बच्चे उसके लिए रो रहे होंगे। हमें उसे जाने देना चाहिए। हम किसी और शिकार को ढूंढ लेंगे।” शेर ने लोमड़ी को गुस्से से देखा और कहा, “तुम बेवकूफ हो। तुम इस बकरी के चक्कर में अपना शिकार खोना चाहते हो। तुम अपना हिस्सा नहीं लेना चाहते हो, तो मुझे कोई आपत्ति नहीं है। मैं अकेला ही इसे खा लूंगा।”

लोमड़ी ने सोचा कि शेर को मनाना बेकार है। वह उसे अकेला छोड़कर चली गई। शेर ने बकरी को अपने मुंह में पकड़ा और उसे खाने की तैयारी की। लेकिन उसी वक्त, एक शिकारी ने उसे देख लिया और उस पर बंदूक से गोली चला दी। शेर की गर्दन में गोली लगी और वह वहीं मर गया। शिकारी ने उसका शिकार किया और उसे अपने साथ ले गया।

बकरी ने इसे देखा और बच गई। वह अपने बच्चों के पास भागी और उन्हें अपनी कहानी सुनाई। वे सब बहुत खुश हुए और उसका आभारी रहे।

शिक्षा: दया और करुणा से जीवन में बहुत कुछ पाया जा सकता है।

लालच बुरी बलाय – Moral Stories In Hindi For Class 5

एक बार की बात है, एक नदी के किनारे एक बड़ा और सुंदर वृक्ष था। उस वृक्ष पर बहुत सारे फल लगते थे, जो मीठे और रसीले होते थे। उस वृक्ष के नीचे एक चूहा रहता था, जो वृक्ष के फलों का आनंद लेता था। वह वृक्ष को अपना मित्र मानता था और उससे बातें करता था।

TREE
TREE

एक दिन, एक भूका शेर उस वृक्ष के पास आया। उसने वृक्ष पर फल देखे और उन्हें खाने का मन किया। लेकिन वह उन फलों तक नहीं पहुंच सकता था, क्योंकि वह बहुत ऊंचे थे। उसने वृक्ष से कहा, “हे वृक्ष, तुम्हारे फल बहुत ही आकर्षक लग रहे हैं। क्या तुम मुझे कुछ फल दे सकते हो?” वृक्ष ने शेर को देखा और उसे जानता था कि वह बहुत ही खतरनाक है। वह उससे डर गया और कहा, “मुझे माफ करो, शेर, लेकिन मैं तुम्हें अपने फल नहीं दे सकता। ये मेरे बच्चों के लिए हैं। तुम तो मांसाहारी हो, तुम्हें फलों की क्या जरूरत है?”

शेर ने वृक्ष को धमकाया और कहा, “तुम मुझसे बहाने बना रहे हो। तुम्हारे फलों में कुछ खास बात होगी, जो तुम मुझसे छुपा रहे हो। अगर तुम मुझे अपने फल नहीं दोगे, तो मैं तुम्हारी छाल को फाड़कर तुम्हें खा जाऊंगा।” वृक्ष ने शेर की बातों से घबराया और कहा, “ठीक है, ठीक है, मैं तुम्हें कुछ फल देता हूं। लेकिन तुम मुझे कुछ वक्त दो, मैं अपने फलों को गिराने का तरीका सोचता हूं।”

वृक्ष ने अपने नीचे रहने वाले चूहे को देखा और उससे मदद मांगी। चूहा ने वृक्ष की मुसीबत समझी और उसे एक युक्ति बताई। वह वृक्ष के ऊपर चढ़ा और उसके फलों को काटने लगा। फल नीचे गिरने लगे। शेर ने उन्हें खाने की कोशिश की, लेकिन वे इतने कड़वे थे कि उसे उल्टी आ गई।

वह वृक्ष से बोला, “ये कौन से फल हैं? ये तो जहर के समान हैं। तुमने मुझे धोखा दिया है।” वृक्ष ने कहा, “नहीं, शेर, ये मेरे फल नहीं हैं। ये तो मेरे दुश्मनों के फल हैं, जो मुझे नुकसान पहुंचाने के लिए मेरे ऊपर फेंके गए थे। मेरे फल तो बहुत मीठे और स्वादिष्ट हैं, लेकिन वे अभी पके नहीं हैं। तुम थोड़ा इंतजार करो, जब वे पक जाएंगे, तो मैं तुम्हें दूंगा।”

शेर ने वृक्ष की बातों पर विश्वास कर लिया और उसने कहा, “ठीक है, मैं इंतजार करता हूं। लेकिन तुम मुझे अपने फल जल्दी देना, वरना मुझे और भूख लगेगी और मैं तुम्हें ही खा लूंगा।” वृक्ष ने हां में सिर हिलाया और चूहे को इशारा किया।

शिक्षा: लालच से बचना चाहिए। लालची व्यक्ति कभी भी संतुष्ट नहीं होता है और अपने ही हाथों से अपना भला बिगाड़ लेता है।

अपने से बड़ों और ताकतवरों की नकल न करें – Moral Stories In Hindi For Class 5

एक बार की बात है, एक गांव में एक गधा रहता था। वह एक किसान का गधा था, जो उसे बहुत काम में लगाता था। वह उसे बोझ उठाने, खेत में हल चलाने और पानी लाने के लिए इस्तेमाल करता था। गधा बहुत ही थका हुआ और दुखी था। वह अपने मालिक से छुटकारा पाना चाहता था।

DONKEY
DONKEY

एक दिन, वह अपने मालिक के साथ शहर जा रहा था। रास्ते में, वह एक बाघ को देखा, जो एक पिंजरे में बंद था। वह बाघ एक सरकारी चिड़ियाघर का था, जो गांवों में लोगों को अपने जानवरों का प्रदर्शन करता था। गधा ने बाघ को देखकर सोचा, “यह तो बहुत ही शानदार जानवर है। वह इतना ताकतवर और सुंदर है। लोग उसकी इज्जत करते हैं और उसे खाना और पानी देते हैं। वह किसी के भी आगे झुकने या काम करने की जरूरत नहीं महसूस करता है। वह अपनी मर्जी का मालिक है। मुझे भी ऐसा होना चाहिए।”

गधा ने अपने मालिक से कहा, “मुझे उस बाघ के पास जाने दो। मुझे उससे बात करनी है।” मालिक ने कहा, “तुम पागल हो गए हो? वह तुम्हें खा जाएगा। तुम अपना काम करो और चुप रहो।” लेकिन गधा ने जिद करना शुरू कर दिया। वह बाघ के पास जाने के लिए रोने लगा। मालिक ने उसे थप्पड़ मारा और उसे खींचकर आगे बढ़ाया।

गधा बहुत नाराज हुआ। वह अपने मालिक को देखकर सोचा, “यह तो बहुत ही बुरा आदमी है। वह मुझे बहुत ही बुरा सलूक करता है। वह मुझे अपना दोस्त नहीं मानता है। वह मुझे अपना गुलाम समझता है। मुझे इससे छुटकारा पाना है।”

गधा ने एक योजना बनाई। वह अपने मालिक को धोखा देने का फैसला किया। वह अपने मालिक को कहा, “मुझे बहुत प्यास लगी है। मुझे नदी में पानी पीने दो।” मालिक ने कहा, “ठीक है, लेकिन जल्दी करो। हमें शहर पहुंचना है।” वह उसे नदी के किनारे ले गया।

गधा ने नदी में पानी पीने का ढोंग किया। फिर वह अपने मालिक के हाथ से छूटकर नदी में भाग गया। वह नदी के दूसरे किनारे तक तैर गया। वहां उसने एक जंगल देखा, जहां वह बाघ को देखा था। वह उसकी तरफ भागा।

मालिक ने उसे भागते हुए देखा और चिल्लाया, “रुको, रुको, गधे, वापस आ जाओ। तुम कहां जा रहे हो? वहां तुम्हारा कोई नहीं है। वहां तुम्हें खतरा है।” लेकिन गधा ने उसकी बातों पर ध्यान नहीं दिया। वह अपनी आजादी के लिए भागता रहा।

वह जंगल में पहुंचा और बाघ के पिंजरे के पास गया। वह बाघ से कहा, “हे बाघ, मुझे तुमसे मिलने की बहुत इच्छा थी। मुझे तुम्हारी तरह बनना है। तुम मुझे अपना दोस्त बना लो और मुझे अपनी बातें बताओ।” बाघ ने गधे को देखा और हंसा। वह सोचा, “यह तो बहुत ही मूर्ख गधा है। वह मुझे अपना दोस्त बनाना चाहता है। वह नहीं जानता कि मैं उसे खा जाऊंगा। लेकिन मुझे उसे तुरंत नहीं खाना है। मुझे उसे थोड़ा और मज़ा चखाना है।”

बाघ ने गधे से कहा, “हे गधे, तुम बहुत ही बहादुर और बुद्धिमान हो। मुझे तुमसे बात करने में बहुत खुशी हुई है। तुम मेरा दोस्त बन सकते हो, लेकिन उसके लिए तुम्हें एक शर्त पूरी करनी होगी।” गधा ने पूछा, “वह कौन सी शर्त है?” बाघ ने कहा, “तुम्हें मुझे अपने पिंजरे से छुड़ाना होगा। तुम्हें मेरे पिंजरे का ताला तोड़ना होगा। फिर मैं तुम्हारे साथ चला जाऊंगा।”

गधा ने सोचा, “यह तो बहुत ही आसान काम है। मुझे बस उसके पिंजरे को अपने दांतों से काटना है। फिर मैं उसे अपना दोस्त बना लूंगा।” वह बाघ के पिंजरे के पास गया और उसके ताले को काटने लगा। बाघ ने उसे देखते हुए मुस्कुराया। वह सोचा, “यह गधा तो अपनी मौत को बुला रहा है। जैसे ही मेरा पिंजरा खुलेगा, मैं उसे अपने नाखूनों और दांतों से चीर दूंगा।”

गधा ने बाघ के पिंजरे का ताला तोड़ दिया। बाघ ने एक झटके में अपना पिंजरा खोला और गधे पर झपटा। गधा ने बाघ को आते हुए देखा और चिल्लाया, “हे बाघ, तुम क्या कर रहे हो? तुम तो मेरा दोस्त बनने का वादा किया था। तुम मुझे क्यों मारना चाहते हो?” बाघ ने कहा, “तुम मुझसे दोस्ती करना चाहते थे, लेकिन मैंने तुमसे कभी ऐसा वादा नहीं किया था। मैं तो तुम्हें अपना शिकार बनाना चाहता था। तुम तो बस मेरे लिए एक नाश्ता हो।”

गधा ने बाघ की बातों से घबराया और उससे बचने की कोशिश की। लेकिन वह बाघ से तेज नहीं था। बाघ ने उसे पकड़ लिया और उसे खा लिया।

शिक्षा: अपने से बड़ों और ताकतवरों की नकल न करें। अपनी औकात में रहें।

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