Hindi short moral story

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Hindi short moral story – ईमानदारी की जीत

Hindi short moral story - ईमानदारी की जीत

एक बार एक छोटे से गाँव में एक ईमानदार और मेहनती किसान रहता था। उसका नाम मोहन था। मोहन बहुत गरीब था, लेकिन वह अपने जीवन से खुश था। वह हर सुबह जल्दी उठकर अपने खेत में काम करता था और शाम तक काम करता था।

मोहन के पास एक छोटी सी झोपड़ी और एक छोटा सा खेत था। वह अपने खेत में सब्जियां उगाता था और उन्हें बाजार में बेचकर अपना गुजारा करता था। मोहन की पत्नी भी बहुत मेहनती थी। वह घर के कामकाज में मोहन की मदद करती थी और सब्जियां बेचने में भी उनकी मदद करती थी।

एक दिन मोहन अपने खेत में काम कर रहा था, तभी उसने एक छोटा सा पौधा देखा। पौधा बहुत मुरझाया हुआ था और ऐसा लग रहा था कि वह मर जाएगा। मोहन को पौधे पर दया आई और उसने उसे पानी दिया। अगले दिन पौधा थोड़ा ठीक हो गया था। मोहन ने उसे हर रोज पानी दिया और उसकी देखभाल की।

कुछ दिनों बाद पौधा बहुत बड़ा और हरा-भरा हो गया। मोहन बहुत खुश था। उसने सोचा कि अब पौधे में फल लगेंगे। वह हर रोज पौधे को देखता और उसकी देखभाल करता था।

एक दिन मोहन ने देखा कि पौधे में फूल खिल गए हैं। फूल बहुत सुंदर थे। मोहन को बहुत अच्छा लगा। वह हर रोज फूलों को देखता और उनकी खुशबू लेता था।

कुछ दिनों बाद फूलों की जगह फल लग गए। फल बहुत बड़े और हरे थे। मोहन बहुत खुश था। उसने सोचा कि अब वह फलों को बेचकर बहुत सारा पैसा कमाएगा।

एक दिन मोहन फलों को तोड़ने के लिए गया, तभी उसने देखा कि एक आदमी उसके खेत में है। आदमी फलों को तोड़कर खा रहा था। मोहन को बहुत गुस्सा आया। वह आदमी के पास गया और उससे कहा कि वह उसके खेत में क्या कर रहा है।

आदमी ने कहा कि वह बहुत भूखा है और उसने फलों को देखा तो उसे बहुत लालच आ गया। उसने मोहन से माफी मांगी और कहा कि वह अब कभी ऐसा नहीं करेगा।

मोहन को आदमी की बात पर यकीन नहीं हुआ, लेकिन उसने फिर भी उसे माफ कर दिया। उसने आदमी को कुछ फल दिए और कहा कि वह अब जा सकता है।

आदमी फलों को लेकर चला गया। मोहन बहुत उदास था। उसने सोचा कि उसने अपना सारा मेहनत बेकार कर दिया है।

कुछ दिनों बाद मोहन ने देखा कि आदमी फिर से उसके खेत में है। आदमी इस बार भी फलों को तोड़कर खा रहा था। मोहन को बहुत गुस्सा आया। उसने आदमी को पकड़ लिया और पुलिस के पास ले गया।

पुलिस ने आदमी को गिरफ्तार कर लिया और उसे जेल में डाल दिया। मोहन बहुत खुश था। उसने सोचा कि अब वह अपने खेत में शांति से काम कर सकेगा।

मोहन ने अपने खेत में फिर से फूल लगाए और उनकी देखभाल की। कुछ दिनों बाद फूलों की जगह फल लग गए। इस बार मोहन ने फलों को बहुत अच्छे से रखा। उसने फलों को बाजार में बेचकर बहुत सारा पैसा कमाया।

मोहन बहुत खुश था। उसने अपने पैसों से एक नई झोपड़ी और एक बड़ा सा खेत खरीदा। वह अब बहुत अमीर था, लेकिन वह पहले की तरह ही ईमानदार और मेहनती था।

मोहन की कहानी हमें सिखाती है कि हमें हमेशा ईमानदार और मेहनती रहना चाहिए। हमें कभी भी दूसरों का सामान नहीं चुराना चाहिए। हमें हमेशा अपनी मेहनत का फल मिलता है।

Hindi short moral story – किसान की ईमानदारी

Hindi short moral story

एक बार एक छोटे से गाँव में एक लकड़हारा रहता था। उसका नाम रामू था। रामू बहुत गरीब था, लेकिन वह अपने जीवन से खुश था। वह हर सुबह जल्दी उठकर जंगल में लकड़ी काटने जाता था और शाम तक काम करता था।

रामू के पास एक छोटी सी झोपड़ी और एक छोटा सा परिवार था। उसकी पत्नी और दो छोटे बच्चे थे। रामू अपनी पत्नी और बच्चों से बहुत प्यार करता था और वह उनके लिए हर मुसीबत उठाने को तैयार था।

एक दिन रामू जंगल में लकड़ी काट रहा था, तभी उसने एक बड़ी सी गुफा देखी। गुफा बहुत अंधेरी थी और उसमें से कुछ अजीब तरह की आवाजें आ रही थीं। रामू को बहुत डर लगा, लेकिन वह अपनी जिज्ञासा को रोक नहीं सका। वह गुफा के अंदर जाने लगा।

गुफा के अंदर जाते ही रामू को एक बड़ा सा खजाना मिला। खजाने में सोने और चांदी के सिक्के, हीरे और जवाहरात भरे हुए थे। रामू को बहुत खुशी हुई। उसने सोचा कि अब वह अपनी गरीबी से छुटकारा पा सकेगा।

रामू ने खजाने को अपनी झोपड़ी में ले जाकर छिपा दिया। वह अब हर रोज खजाने से कुछ सोने और चांदी के सिक्के निकालकर बाजार में बेचता था और अपने परिवार का गुजारा करता था।

कुछ दिनों बाद रामू के गाँव में एक व्यापारी आया। व्यापारी ने रामू से पूछा कि उसने इतने सारे पैसे कहाँ से कमाए। रामू ने व्यापारी को बताया कि उसने जंगल में एक बड़ा सा खजाना पाया है।

व्यापारी को बहुत लालच आया। उसने रामू से कहा कि वह उसे खजाना दिखा दे। रामू ने व्यापारी को खजाना दिखाने से मना कर दिया, लेकिन व्यापारी ने उसे बहुत सारे पैसे का लालच दिया और आखिर में रामू मान गया।

व्यापारी और रामू जंगल में गए और रामू ने व्यापारी को गुफा दिखाई। व्यापारी को गुफा में खजाना देखकर बहुत खुशी हुई। उसने रामू को धन्यवाद दिया और कहा कि वह अब जा सकता है।

रामू गुफा से बाहर आ गया और व्यापारी के जाने का इंतजार करने लगा। लेकिन व्यापारी नहीं गया। रामू ने व्यापारी को आवाज दी, लेकिन व्यापारी ने कोई जवाब नहीं दिया।

रामू को बहुत डर लगा। वह समझ गया कि व्यापारी ने उसे लूट लिया है और वह गुफा में फंस गया है। रामू ने बहुत रोया और चिल्लाया, लेकिन कोई उसकी मदद करने नहीं आया।

रामू कई दिनों तक गुफा में भूखा और प्यासा रहा। उसने सोचा कि वह अब कभी बाहर नहीं निकल पाएगा। लेकिन रामू ने हार नहीं मानी। वह हर रोज गुफा के रास्ते को ढूंढता रहा और आखिर में एक दिन उसे रास्ता मिल गया।

रामू गुफा से बाहर निकल गया और अपने गाँव वापस आ गया। रामू को देखकर उसकी पत्नी और बच्चे बहुत खुश हुए। रामू ने उन्हें बताया कि वह गुफा में फंस गया था और आखिर में कैसे बाहर निकला।

रामू ने अपने परिवार को बताया कि उसने खजाना लौटा दिया है और अब वह फिर से जंगल में लकड़ी काटकर अपना जीवन गुजारेगा। रामू के परिवार को उसकी ईमानदारी पर बहुत गर्व हुआ।

रामू की कहानी हमें सिखाती है कि हमें कभी भी दूसरों का माल नहीं लूटना चाहिए। हमें हमेशा ईमानदार और मेहनती रहना चाहिए। हमें हमेशा अपनी मेहनत का फल मिलता है।

Hindi short moral story – लालची राजा का अंत

लालची राजा का अंत

एक बार एक छोटे से गाँव में एक राजा रहता था। राजा बहुत अमीर था, लेकिन वह बहुत लालची भी था। राजा हमेशा दूसरों का पैसा हड़पने के तरीके सोचता रहता था।

एक दिन राजा ने सोचा कि वह अपने गाँव के लोगों को धोखा देकर बहुत सारा पैसा कमा सकता है। उसने अपने मंत्रियों को बुलाया और उन्हें अपना प्लान बताया।

राजा ने अपने मंत्रियों से कहा कि वह गाँव के लोगों से कहें कि वह अपने सारे गहने और सोने के सिक्के राजा के पास जमा कर दें। राजा ने कहा कि वह उनकी संपत्ति की रक्षा करेगा और उन्हें हर साल इसके बदले में ब्याज देगा।

गाँव के लोगों को राजा पर बहुत भरोसा था, इसलिए उन्होंने उसकी बात मान ली और अपने सारे गहने और सोने के सिक्के राजा के पास जमा कर दिए। राजा ने उनकी संपत्ति को अपने महल में छिपा दिया।

कुछ दिनों बाद राजा ने गाँव के लोगों को बताया कि वह अपने खजाने को लुटेरों से बचाने के लिए एक बड़ा सा किला बनवाना चाहता है। राजा ने कहा कि किले के निर्माण के लिए बहुत सारे पैसे की जरूरत है, इसलिए वह गाँव के लोगों से मदद मांग रहा है।

गाँव के लोग राजा के लिए बहुत चिंतित थे, इसलिए उन्होंने उसके लिए फिर से बहुत सारा पैसा इकट्ठा कर दिया। राजा ने उनकी सारी संपत्ति को अपने महल में छिपा दिया।

कुछ दिनों बाद राजा ने गाँव के लोगों को बताया कि वह अपने राज्य के विस्तार के लिए एक बड़ी सी सेना तैयार करना चाहता है। राजा ने कहा कि सेना के प्रशिक्षण और हथियारों की खरीद के लिए बहुत सारे पैसे की जरूरत है, इसलिए वह गाँव के लोगों से मदद मांग रहा है।

गाँव के लोग अपने देश के भविष्य के लिए बहुत चिंतित थे, इसलिए उन्होंने उसके लिए फिर से बहुत सारा पैसा इकटठा कर दिया। राजा ने उनकी सारी संपत्ति को अपने महल में छिपा दिया।

कुछ दिनों बाद राजा एक रात अपने महल से सारी संपत्ति लेकर भाग गया और कभी नहीं लौटा। गाँव के लोग बहुत दुखी हुए, लेकिन उन्होंने अपनी ईमानदारी नहीं छोड़ी। उन्होंने फिर से मेहनत करना शुरू कर दिया और कुछ सालों बाद वे फिर से अमीर हो गए।

गाँव के लोगों की कहानी हमें सिखाती है कि हमें कभी भी किसी पर भरोसा नहीं करना चाहिए, भले ही वह कितना भी अमीर या शक्तिशाली हो। हमें हमेशा अपनी मेहनत का फल मिलता है।

Hindi short moral storyईमानदार किसान का इनाम

 ईमानदार किसान का इनाम

एक बार एक छोटे से गाँव में एक गरीब लेकिन ईमानदार किसान रहता था। उसका नाम कृष्ण था। कृष्ण के पास एक छोटी सी झोपड़ी और एक छोटा सा खेत था। वह अपने खेत में सब्जियां उगाता था और उन्हें बाजार में बेचकर अपना गुजारा करता था।

कृष्ण की पत्नी भी बहुत ईमानदार और मेहनती थी। वह घर के कामकाज में कृष्ण की मदद करती थी और सब्जियां बेचने में भी उसकी मदद करती थी। कृष्ण और उसकी पत्नी दोनों बहुत खुश थे, हालांकि वे गरीब थे।

एक दिन कृष्ण अपने खेत में काम कर रहा था, तभी उसने देखा कि एक आदमी उसके खेत में घुसकर सब्जियां तोड़ रहा है। कृष्ण को बहुत गुस्सा आया, लेकिन वह आदमी से कुछ नहीं बोला। उसने सोचा कि आदमी भूखा होगा, इसलिए उसने उसे सब्जियां तोड़ने से नहीं रोका।

अगले दिन कृष्ण ने देखा कि वही आदमी फिर से उसके खेत में घुसकर सब्जियां तोड़ रहा है। कृष्ण को इस बार भी गुस्सा आया, लेकिन उसने फिर से आदमी से कुछ नहीं बोला। उसने सोचा कि आदमी की कोई मजबूरी होगी, इसलिए उसने उसे सब्जियां तोड़ने से नहीं रोका।

कुछ दिनों बाद कृष्ण ने देखा कि आदमी हर रोज उसके खेत में घुसकर सब्जियां तोड़ रहा है। कृष्ण को अब बहुत गुस्सा आया और उसने आदमी को पकड़ लिया। कृष्ण ने आदमी से पूछा कि वह हर रोज उसके खेत में क्यों आता है और सब्जियां क्यों तोड़ता है।

आदमी ने कहा कि वह एक गरीब किसान है और उसके पास खाने के लिए कुछ नहीं है। उसने कृष्ण से माफी मांगी और कहा कि वह अब कभी ऐसा नहीं करेगा।

कृष्ण को आदमी की बात पर यकीन नहीं हुआ, लेकिन उसने फिर भी उसे माफ कर दिया। उसने आदमी को कुछ सब्जियां दीं और कहा कि वह अब जा सकता है।

आदमी ने कृष्ण को धन्यवाद दिया और चला गया। कृष्ण बहुत उदास था। उसने सोचा कि उसने अपना सारा मेहनत बेकार कर दिया है।

कुछ दिनों बाद कृष्ण ने देखा कि आदमी फिर से उसके खेत में है, लेकिन इस बार वह कुछ अलग कर रहा है। आदमी कृष्ण के खेत में पानी दे रहा था और उसकी सब्जियों की देखभाल कर रहा था।

कृष्ण को बहुत हैरानी हुई। उसने आदमी से पूछा कि वह क्या कर रहा है।

आदमी ने कहा कि वह कृष्ण का शुक्रगुजार है और वह उसकी मदद करना चाहता है। उसने कहा कि वह कृष्ण के खेत में काम करेगा और उसकी देखभाल करेगा।

कृष्ण बहुत खुश हुआ। उसने आदमी को अपने खेत में काम करने की अनुमति दे दी।

कुछ महीनों बाद कृष्ण के खेत में बहुत अच्छी फसल हुई। कृष्ण और आदमी ने सब्जियां बेचकर बहुत सारा पैसा कमाया।

कृष्ण और आदमी दोनों बहुत खुश थे। उन्होंने सीखा कि ईमानदारी और मेहनत हमेशा फलती है।

Hindi short moral storyदूसरों की मदद करने का फल

दूसरों की मदद करने का फल

एक बार एक छोटे से गाँव में एक बहुत ही दयालु और मददगार ब्राह्मण रहता था। उसका नाम रघु था। रघु बहुत गरीब था, लेकिन वह अपने जीवन से खुश था। वह हमेशा दूसरों की मदद करने के लिए तैयार रहता था।

रघु के पास एक छोटी सी झोपड़ी और एक छोटा सा परिवार था। उसकी पत्नी और दो छोटे बच्चे थे। रघु अपनी पत्नी और बच्चों से बहुत प्यार करता था और वह उनके लिए हर मुसीबत उठाने को तैयार था।

एक दिन रघु जंगल में लकड़ी काटने गया था, तभी उसने एक बूढ़े आदमी को देखा जो बहुत थका हुआ था और उसे भूख लगी थी। रघु को बूढ़े आदमी पर दया आई और उसने उसे अपने घर ले गया। रघु ने बूढ़े आदमी को खाना और पानी दिया और उसे आराम करने के लिए एक जगह दी।

बूढ़े आदमी ने रघु को धन्यवाद दिया और कहा कि वह उसका बहुत आभारी है। उसने रघु को बताया कि वह एक व्यापारी है और वह बहुत दूर से आया है। व्यापारी ने रघु को कहा कि वह उसे कभी नहीं भूलेगा और वह एक दिन उसकी मदद जरूर करेगा।

कुछ दिनों बाद व्यापारी रघु के घर वापस आया और उसने रघु को एक बड़ा सा खजाना दिया। व्यापारी ने कहा कि यह खजाना रघु की दयालुता और मददगार स्वभाव का इनाम है।

रघु बहुत खुश हुआ। उसने सोचा कि अब वह अपनी गरीबी से छुटकारा पा सकेगा। रघु ने खजाने को अपनी झोपड़ी में ले जाकर छिपा दिया। वह अब हर रोज खजाने से कुछ सोने और चांदी के सिक्के निकालकर बाजार में बेचता था और अपने परिवार का गुजारा करता था।

कुछ दिनों बाद रघु के गाँव में एक सूखा पड़ गया। गाँव के लोग बहुत परेशान थे। उनके पास खाने के लिए कुछ नहीं था और उनके बच्चे भूख से मर रहे थे।

रघु ने गाँव के लोगों की मदद करने का फैसला किया। उसने अपने खजाने से कुछ पैसा निकाला और गाँव के लोगों के लिए अनाज और कपड़े खरीदे। रघु ने यह सुनिश्चित किया कि हर किसी के पास खाने के लिए पर्याप्त भोजन और पहनने के लिए पर्याप्त कपड़े हों।

गाँव के लोग रघु की मदद से बहुत खुश थे। उन्होंने रघु को अपना देवता मान लिया और उसकी पूजा करने लगे। रघु बहुत विनम्र था और उसने गाँव के लोगों से कहा कि वह उनकी मदद करने के लिए बाध्य था।

रघु की कहानी हमें सिखाती है कि हमें दूसरों की मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। हमें दूसरों के दुख में उनका साथ देना चाहिए और उनकी मदद करनी चाहिए। हमें यह भी सीखना चाहिए कि हमें कभी भी अपने धन का अहंकार नहीं करना चाहिए और हमेशा विनम्र रहना चाहिए।

दूसरों की मदद करने से न केवल दूसरों को खुशी मिलती है, बल्कि इससे हमें भी बहुत खुशी मिलती है। दूसरों की मदद करने से हमारे दिल में शांति और सुकून होता है। हमें यह भी सोचना चाहिए कि आज हम जिस मदद की उम्मीद कर रहे हैं, कल वही मदद किसी और को भी देनी पड़ सकती है। इसलिए हमें दूसरों की मदद करने में हमेशा आगे रहना चाहिए।

Hindi short moral storyकिसान की ईमानदारी

किसान की ईमानदारी

एक बार एक छोटे से गाँव में एक ईमानदार और मेहनती किसान रहता था। उसका नाम मोहन था। मोहन बहुत गरीब था, लेकिन वह अपने जीवन से खुश था। वह हर सुबह जल्दी उठकर अपने खेत में काम करता था और शाम तक काम करता था।

मोहन के पास एक छोटी सी झोपड़ी और एक छोटा सा खेत था। वह अपने खेत में गेहूँ, चावल, सब्जियां और फल उगाता था। वह हर साल अपनी फसल बेचकर अपना गुजारा करता था।

एक दिन मोहन अपने खेत में काम कर रहा था, तभी उसने देखा कि एक आदमी उसके खेत में घुसकर सब्जियां तोड़ रहा है। मोहन को बहुत गुस्सा आया, लेकिन वह आदमी से कुछ नहीं बोला। उसने सोचा कि आदमी भूखा होगा, इसलिए उसने उसे सब्जियां तोड़ने से नहीं रोका।

अगले दिन मोहन ने देखा कि वही आदमी फिर से उसके खेत में घुसकर सब्जियां तोड़ रहा है। मोहन को इस बार भी गुस्सा आया, लेकिन उसने फिर से आदमी से कुछ नहीं बोला। उसने सोचा कि आदमी की कोई मजबूरी होगी, इसलिए उसने उसे सब्जियां तोड़ने से नहीं रोका।

कुछ दिनों बाद मोहन ने देखा कि आदमी हर रोज उसके खेत में घुसकर सब्जियां तोड़ रहा है। मोहन को अब बहुत गुस्सा आया और उसने आदमी को पकड़ लिया। मोहन ने आदमी से पूछा कि वह हर रोज उसके खेत में क्यों आता है और सब्जियां क्यों तोड़ता है।

आदमी ने कहा कि वह एक गरीब किसान है और उसके पास खाने के लिए कुछ नहीं है। उसने मोहन से माफी मांगी और कहा कि वह अब कभी ऐसा नहीं करेगा।

मोहन को आदमी की बात पर यकीन नहीं हुआ, लेकिन उसने फिर भी उसे माफ कर दिया। उसने आदमी को कुछ सब्जियां दीं और कहा कि वह अब जा सकता है।

आदमी ने मोहन को धन्यवाद दिया और चला गया। मोहन बहुत उदास था। उसने सोचा कि उसने अपना सारा मेहनत बेकार कर दिया है।

कुछ दिनों बाद मोहन ने देखा कि आदमी फिर से उसके खेत में है, लेकिन इस बार वह कुछ अलग कर रहा है। आदमी मोहन के खेत में पानी दे रहा था और उसकी सब्जियों की देखभाल कर रहा था।

मोहन बहुत हैरानी हुआ। उसने आदमी से पूछा कि वह क्या कर रहा है।

आदमी ने कहा कि वह मोहन का शुक्रगुजार है और वह उसकी मदद करना चाहता है। उसने कहा कि वह मोहन के खेत में काम करेगा और उसकी देखभाल करेगा।

मोहन बहुत खुश हुआ। उसने आदमी को अपने खेत में काम करने की अनुमति दे दी।

कुछ महीनों बाद मोहन के खेत में बहुत अच्छी फसल हुई। मोहन और आदमी ने सब्जियां बेचकर बहुत सारा पैसा कमाया।

मोहन और आदमी दोनों बहुत खुश थे। उन्होंने सीखा कि ईमानदारी और मेहनत हमेशा फलती है।

किसान की ईमानदारी हमें सिखाती है कि हमें हमेशा ईमानदार रहना चाहिए, चाहे कोई देख रहा हो या नहीं। हमें यह भी सिखाती है कि हमें कभी हार नहीं माननी चाहिए और हमेशा मेहनत करते रहना चाहिए।

Hindi short moral storyसत्य की जीत

Hindi short moral story - सत्य की जीत

एक बार एक छोटे से गाँव में एक सच्चा और ईमानदार राजा रहता था। उसका नाम अशोक था। राजा अशोक अपने राज्य के लोगों से बहुत प्यार करता था और वह उनके लिए हर मुसीबत उठाने को तैयार था। राजा अशोक हमेशा सत्य की राह पर चलता था और वह कभी भी झूठ नहीं बोलता था।

एक दिन राजा अशोक अपने दरबार में बैठा था, तभी एक गरीब किसान उसके पास आया। किसान ने राजा से कहा कि उसके खेत में एक बड़े व्यापारी ने घुसकर उसकी सारी फसल लूट ली है। किसान ने राजा से न्याय की गुहार लगाई।

राजा अशोक ने किसान की बात सुनी और उसने उससे कहा कि वह चिंता न करे, उसे न्याय जरूर मिलेगा। राजा अशोक ने व्यापारी को दरबार में बुलाया और उससे किसान की बात पूछी। व्यापारी ने कहा कि उसने किसान का खेत नहीं लूटा है और किसान झूठ बोल रहा है।

राजा अशोक ने किसान और व्यापारी दोनों की बातों को ध्यान से सुना। उसने पाया कि किसान की बात में सच्चाई है और व्यापारी झूठ बोल रहा है। राजा अशोक ने व्यापारी को सजा के तौर पर उसके सारे पैसे और धन-दौलत छीनकर किसान को दे दी।

राजा अशोक के इस फैसले से गाँव के लोग बहुत खुश हुए। उन्होंने राजा अशोक की जय-जयकार की और कहा कि वह एक सच्चा और ईमानदार राजा है। राजा अशोक ने गाँव के लोगों से कहा कि वह हमेशा सत्य की राह पर चलेगा और कभी भी झूठ नहीं बोलेगा।

राजा अशोक की कहानी हमें सिखाती है कि हमें हमेशा सच बोलना चाहिए और कभी भी झूठ नहीं बोलना चाहिए। सत्य की हमेशा जीत होती है और झूठ का कभी कोई भरोसा नहीं होता है। हमें यह भी सिखाती है कि हमें कभी किसी का माल नहीं लूटना चाहिए और हमेशा मेहनत करके अपना गुजारा करना चाहिए।

सत्य की जीत हमें यह भी सिखाती है कि हमें कभी भी हार नहीं माननी चाहिए और हमेशा सत्य के लिए लड़ना चाहिए। सत्य ही हमारा सबसे बड़ा हथियार है और इससे हम किसी भी मुश्किल का सामना कर सकते हैं।

Hindi short moral story – दयालु व्यापारी

दयालु व्यापारी

एक बार एक छोटे से गाँव में एक दयालु और उदार व्यापारी रहता था। उसका नाम सेठ धर्मराज था। सेठ धर्मराज बहुत अमीर था, लेकिन वह बहुत विनम्र और ईमानदार भी था। वह हमेशा दूसरों की मदद करने के लिए तैयार रहता था।

सेठ धर्मराज के पास एक बड़ी सी दुकान थी और वह अपने व्यापार से बहुत सारा पैसा कमाता था। लेकिन वह कभी भी अपने धन का अहंकार नहीं करता था और हमेशा दूसरों की मदद करता था।

एक दिन सेठ धर्मराज जंगल से लकड़ी ले जा रहा था, तभी उसने देखा कि एक आदमी बहुत थका हुआ है और उसे भूख लगी है। सेठ धर्मराज को आदमी पर दया आई और उसने उसे अपने घर ले गया। सेठ धर्मराज ने आदमी को खाना और पानी दिया और उसे आराम करने के लिए एक जगह दी।

आदमी ने सेठ धर्मराज को धन्यवाद दिया और कहा कि वह उसका बहुत आभारी है। उसने सेठ धर्मराज को बताया कि वह एक गरीब व्यापारी है और वह बहुत दूर से आया है। व्यापारी ने सेठ धर्मराज को कहा कि वह उसे कभी नहीं भूलेगा और वह एक दिन उसकी मदद जरूर करेगा।

कुछ दिनों बाद व्यापारी सेठ धर्मराज के घर वापस आया और उसने सेठ धर्मराज को एक बड़ा सा खजाना दिया। व्यापारी ने कहा कि यह खजाना सेठ धर्मराज की दयालुता और उदार स्वभाव का इनाम है।

सेठ धर्मराज बहुत खुश हुआ। उसने सोचा कि अब वह अपनी गरीबी से छुटकारा पा सकेगा। सेठ धर्मराज ने खजाने को अपनी दुकान में ले जाकर छिपा दिया। वह अब हर रोज खजाने से कुछ सोने और चांदी के सिक्के निकालकर बाजार में बेचता था और अपने परिवार का गुजारा करता था।

कुछ दिनों बाद सेठ धर्मराज के गाँव में एक प्राकृतिक आपदा आ गई। गाँव के लोग बहुत परेशान थे। उनके पास खाने के लिए कुछ नहीं था और उनके बच्चे भूख से मर रहे थे।

सेठ धर्मराज ने गाँव के लोगों की मदद करने का फैसला किया। उसने अपने खजाने से कुछ पैसा निकाला और गाँव के लोगों के लिए अनाज और कपड़े खरीदे। सेठ धर्मराज ने यह सुनिश्चित किया कि हर किसी के पास खाने के लिए पर्याप्त भोजन और पहनने के लिए पर्याप्त कपड़े हों।

गाँव के लोग सेठ धर्मराज की मदद से बहुत खुश थे। उन्होंने सेठ धर्मराज को अपना देवता मान लिया और उसकी पूजा करने लगे। सेठ धर्मराज बहुत विनम्र था और उसने गाँव के लोगों से कहा कि वह उनकी मदद करने के लिए बाध्य था।

सेठ धर्मराज की कहानी हमें सिखाती है कि हमें दूसरों की मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। हमें दूसरों के दुख में उनका साथ देना चाहिए और उनकी मदद करनी चाहिए। हमें यह भी सीखना चाहिए कि हमें कभी भी अपने धन का अहंकार नहीं करना चाहिए और हमेशा विनम्र रहना चाहिए।

दयालु व्यापारी हमें यह भी सिखाती है कि हमें कभी भी हार नहीं माननी चाहिए और हमेशा सत्य के लिए लड़ना चाहिए। दयालु व्यापारी यह भी सिखाती है कि हमें दूसरों की मदद करने से न केवल दूसरों को खुशी मिलती है, बल्कि इससे हमें भी बहुत खुशी मिलती है। दूसरों की मदद करने से हमारे दिल में शांति और सुकून होता है।

Hindi short moral storyबुद्धिमानी का फल

Hindi short moral story - बुद्धिमानी का फल

एक छोटे से गाँव में एक बुद्धिमान बूढ़ा व्यक्ति रहता था। उसका नाम भगवानदास था। भगवानदास बहुत ही शांत और विनम्र था। वह गाँव के लोगों की बहुत मदद करता था और उनकी हर समस्या का समाधान करता था।

एक दिन भगवानदास जंगल में घूम रहा था, तभी उसने देखा कि एक युवक बहुत परेशान है और रो रहा है। भगवानदास ने युवक से पूछा कि वह क्यों रो रहा है। युवक ने कहा कि वह एक गरीब किसान है और उसके परिवार के पास खाने के लिए कुछ नहीं है। युवक ने भगवानदास से मदद मांगी।

भगवानदास ने युवक को समझाया कि वह उसे पैसा नहीं दे सकता, लेकिन वह उसे कुछ ऐसा सिखा सकता है जिससे वह हमेशा के लिए गरीबी से छुटकारा पा सके। भगवानदास ने युवक को बताया कि वह एक ऐसा काम सीख ले जो दूसरों के लिए फायदेमंद हो। भगवानदास ने युवक को सिलाई करना सिखाया।

कुछ दिनों बाद युवक गाँव के लोगों के लिए कपड़े बनाने लगा। गाँव के लोग युवक की सिलाई से बहुत खुश थे और उन्होंने उसे बहुत सारा पैसा दिया। युवक अब हर दिन बहुत सारा पैसा कमाता था और वह अपने परिवार का गुजारा आसानी से कर सकता था।

युवक ने भगवानदास को धन्यवाद दिया और कहा कि उसकी मदद से वह अब गरीबी से छुटकारा पा चुका है। भगवानदास ने युवक को कहा कि उसे हमेशा मेहनत और ईमानदारी से काम करना चाहिए और दूसरों की मदद करनी चाहिए।

भगवानदास की कहानी हमें सिखाती है कि हमें कभी भी पैसा ही सब कुछ नहीं समझना चाहिए। हमें बुद्धिमानी का उपयोग करके अपना जीवन बनाना चाहिए। हमें यह भी सीखना चाहिए कि हमें हमेशा मेहनत और ईमानदारी से काम करना चाहिए और दूसरों की मदद करनी चाहिए।

बुद्धिमानी का फल हमें यह भी सिखाती है कि हमेशा शांत और विनम्र रहना चाहिए। बुद्धिमानी का फल यह भी सिखाती है कि हमें कभी भी हार नहीं माननी चाहिए और हमेशा अपने लक्ष्य को पाने के लिए कोशिश करते रहना चाहिए।

Hindi short moral storyसच्ची दोस्ती की ताकत

सच्ची दोस्ती की ताकत

एक बार एक छोटे से गाँव में दो बहुत अच्छे दोस्त रहते थे। उनका नाम अमर और अकबर था। अमर और अकबर बचपन से दोस्त थे और वे दोनों एक-दूसरे के बहुत करीब थे।

अमर और अकबर दोनों बहुत गरीब थे, लेकिन वे दोनों बहुत खुश थे। वे दोनों हर दिन साथ में खेलते थे और एक-दूसरे की मदद करते थे।

एक दिन अमर और अकबर जंगल में घूम रहे थे, तभी उन्होंने देखा कि एक अजगर पेड़ पर फंसा हुआ है। अमर और अकबर को अजगर पर दया आई और उन्होंने उसे पेड़ से निकालने का फैसला किया।

अमर और अकबर ने बहुत कोशिश की और आखिरकार उन्होंने अजगर को पेड़ से निकाल लिया। अजगर बहुत खुश हुआ और उसने अमर और अकबर को धन्यवाद दिया। अजगर ने अमर और अकबर से कहा कि वह उन्हें कभी नहीं भूलेगा और वह एक दिन उनकी मदद जरूर करेगा।

कुछ दिनों बाद अमर और अकबर जंगल में गए, तभी उन्होंने देखा कि एक बड़ा सा शेर उनका रास्ता रोक रहा है। अमर और अकबर बहुत डर गए और वे भागने लगे। लेकिन शेर ने उनका पीछा किया और उन्हें पकड़ लिया।

अमर और अकबर को लगा कि अब उनकी मौत हो जाएगी। लेकिन तभी अजगर जंगल से निकल आया और उसने शेर पर हमला कर दिया। अजगर बहुत ताकतवर था और उसने शेर को मार डाला।

अमर और अकबर बहुत खुश हुए और उन्होंने अजगर को धन्यवाद दिया। अजगर ने अमर और अकबर से कहा कि वह उन्हें इसलिए बचा सका क्योंकि उनकी दोस्ती बहुत सच्ची थी। अजगर ने अमर और अकबर से कहा कि सच्ची दोस्ती में ही असली ताकत होती है।

अमर और अकबर की कहानी हमें सिखाती है कि हमें हमेशा सच्ची दोस्ती करनी चाहिए। सच्ची दोस्ती में ही असली ताकत होती है और सच्चे दोस्त हमेशा हमारी मदद करते हैं। हमें यह भी सीखना चाहिए कि हमें कभी भी हार नहीं माननी चाहिए और हमेशा अपने लक्ष्य को पाने के लिए कोशिश करते रहना चाहिए।

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